साइकिल पर दावेदारी के साथ गठबंधन बनाने में जुटे अखिलेश यादव

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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में साइकिल का चुनाव चिह्न किसके पास होगा, इसका फ़ैसला चुनाव आयोग शनिवार को कर सकता है.

मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले दोनों खेमों ने चुनाव आयोग के सामने अपनी अपनी दलीलें रखी दीं हैं. ऐसे में अब सबकी नज़रें चुनाव आयोग के फ़ैसले टिकी हैं.

चुनाव चिह्न को लेकर अखिलेश यादव खेमे को पूरा भरोसा है कि साइकिल चुनाव चिह्न उन्हें ही मिलेगा.

अखिलेश गुट के समाजवादी नेता उदयवीर सिंह कहते हैं, "साइकिल हमारे गुट को ही मिलने की उम्मीद है. 90 फ़ीसदी विधायक और कार्यकर्ताओं का समर्थन हमारे गुट को है. अगर यह चुनाव चिह्न नहीं मिलता है तो वैसी स्थिति के लिए भी हमारी ओर से पूरी तैयारी है."

बताया जा रहा है कि ऐसी सूरत में अखिलेश यादव का गुट मोटरसाइकिल चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरने की कोशिश करेगा. ताकि आम मतदाताओं के सामने साइकिल से मोटरसाइकिल के सफ़र को विकास से कामों से जोड़कर सामने रखा जा सके.

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चुनाव चिह्न का इंतज़ार करने के साथ साथ अखिलेश यादव का खेमा दूसरे दलों के साथ गठबंधन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है.

उदयवीर सिंह कहते हैं, "सांप्रदायिक ताक़तों को किनारे रखने के लिए हमलोग बात कर रहे हैं. इस बारे में कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के शीर्ष नेताओं का बयान आ चुका है. अगर हम कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो 300 से ज़्यादा सीटें हासिल करेंगे."

इस गठबंधन में किसको कितनी सीटें मिल रही हैं, इस बारे में उदयवीर कहते हैं कि अभी बातचीत चल रही है और इस बारे में समाजवादी पार्टी की ओर से फ़ाइनल फ़ैसला अखिलेश यादव ही लेंगे और बाक़ी दलों के दूसरे शीर्ष नेता.

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के सचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी नसीब सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "गठबंधन की बातचीत अंतिम दौर में है. समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ही नहीं बल्कि दूसरी तमाम समान विचारधारा वाली पार्टी को कांग्रेस एक साथ लाने की कोशिश कर रही है."

इस गठबंधन से राज्य में कांग्रेस को फ़ायदा होगा, के बारे में पूछे जाने पर नसीब सिंह कहते हैं, "केवल हमारा फ़ायदा ही नहीं होगा, बल्कि गठबंधन के दूसरे साझीदारों को भी फ़ायदा होगा."

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आशंकाओं के भंवर में घिरी है समाजवादी पार्टी

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के साथ साथ राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन में शामिल होना बेहद अहम माना जा रहा है.

राष्ट्रीय लोकदल के महासचिव मसूद अहमद ने बीबीसी को बातचीत में बताया, "पार्टी कार्यकर्ताओं को जयंत चौधरी ने संदेश दिया है कि समाजवादी पार्टी से गठबंधन पर अंतिम फ़ैसला समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह की घोषणा के बाद होगा."

इससे संकेत मिलता है कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल में चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है.

ये बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव राज्य में 100 सीटें छोड़ने के लिए तैयार हैं, जिसमें वे 75 से 80 सीटें कांग्रेस को दे सकते हैं, और 20-25 सीटें राष्ट्रीय लोकदल को.

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इस बारे में उदयवीर सिंह कहते हैं, "सीटों का फ़ैसला तो पिछली विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर होता है, ऐसे में जिसका दावा जहां मज़बूत होगा, वो सीट उनको दी जा सकती है."

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सीटों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर उदयवीर सिंह, नसीब सिंह और मसूद अहमद तीनों का कहना था, इसका फ़ैसला शीर्ष स्तर पर होना है और आधिकारिक तौर पर अभी तक अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है.

इस गठबंधन की अंतिम रोडमैप को तैयार करने में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और जयंत चौधरी निजी तौर पर दिलचस्पी ले रहे हैं.

नसीब सिंह ने ये भी बताया है कि गठबंधन की इस प्रक्रिया में जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों को भी साथ रखने की कोशिश हो रही है, ताकि सांप्रदायिक ताक़तों के ख़िलाफ़ मे विपक्ष को एकमंच पर लाया जा सके.

इन दलों का उत्तर प्रदेश में कोई ख़ास जनाधार नहीं है, बावजूद इसका सांकेतिक महत्व है.

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Image caption राष्ट्रीय लोकदल की ओर जयंत चौधरी गठबंधन में दिलचस्पी ले रहे हैं

समाजवादी पार्टी के उदयवीर सिंह के मुताबिक इस कोशिश में एकसमान विचारधारा वाली पार्टियों को एकजुट रखने की कोशिश से गैर सांप्रदायिक ताक़तों को मज़बूती मिलेगी.

ऐसे में शनिवार का दिन समाजवादी पार्टी में अखिलेश खेमे के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है.

चुनाव चिन्ह पर चुनाव आयोग के फ़ैसले के बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व वाला समाजवादी गुट, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल सहित समान विचार धारा वाले दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन की घोषणा कर सकता है.

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