कोर्ट ने छह महीने के एक गर्भ को अबॉर्ट करने की इजाज़त दी

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भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में मेडिकल कारणों से छह महीने यानी 24 हफ़्ते के भ्रूण के गर्भपात की इजाज़त दे दी है.

जस्टिस एस ए बोबडे और एल नागेश्वर राव की बेंच ने मुंबई की एक 22 साल की महिला को उनके भ्रूण के गर्भपात की इजाज़त ये कहते हुए दी कि भ्रूण की खोपड़ी विकसित नहीं हुई है और बच्चा गर्भ के बाहर ज़िंदा नहीं रह पाएगा.

बेंच ने मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल की रिपोर्ट के आधार पर यह फ़ैसला दिया है जिसमें बताया गया है कि भ्रूण की खोपड़ी विकसित नहीं हो पाई है.

कोर्ट ने 'असामान्य' भ्रूण गिराने की इजाज़त दी

भ्रूण के डीएनए में बदलाव की इजाज़त

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Image caption फ़ाइल फ़ोटो

मोडिकल बोर्ड की 7 सदस्यीय टीम ने रिपोर्ट में कहा है कि बच्चा बिना सिर की खोपड़ी के ज़िंदा नहीं रह सकता.

बेंच ने फ़ैसला देते हुए कहा, "यह उचित और न्याय के हित में है कि हम याचिकाकर्ता को गर्भपात क़ानून के अंतर्गत गर्भपात कराने की इजाज़त देकर उनके जीने के हक़ की रक्षा करें."

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