जब एसिड अटैक पीड़िता के घर आई नन्ही परी

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32 साल की सोनाली मुखर्जी के दिन और रात आजकल अपनी बेटी परी के साथ गुज़रते हैं. आज वो इस बात की ख़ुशी मना रही हैं कि बेटी एक महीने की हो गई.

सोनाली बेटी के छोटे-नाज़ुक हाथों और चेहरे को छूकर मन में एक तस्वीर बनाने की कोशिश करती हैं कि उनकी परी कैसी दिखती होगी. क्या बेटी का चेहरा वैसा ही होगा जैसा बचपन में उनका था, क्या उसकी आँखें मम्मी जैसी होंगी या पापा जैसी. जब परी को माँ का स्पर्श मिलता होगा तो नन्हीं बेटी के चेहरे पर मुस्कान आती होगी?

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बेटी का असली नाम निहारिका है लेकिन सोनाली अपनी बेटी को निहार नहीं सकती क्योंकि उनकी आँखों की रोशनी जा चुकी है.

बात 22 अप्रैल 2003 की है जब वो धनबाद में रात को घर की छत पर परिवार के साथ सो रही थीं और कुछ लड़कों ने उनकी आँखों में तेज़ाब डाल दिया था. आँखों की रोशनी चली गई और चेहरा भी बुरी तरह झुलस गया था.

ये वो लड़के थे जो आते-जाते उन्हें परेशान किया करते थे और सोनाली ने उन्हें जवाब देने की हिम्मत की थी. लेकिन बदला लेने के लिए उन्होंने सोनाली पर एसिड अटैक किया.

कई सालों के तकलीफ़देह दौर से गुज़रीं सोनाली की जान पहचान चितरंजन से हुई. सोनाली शादी के लिए तैयाार नहीं थी, उन्होंने वक़्त लिया और 2015 में दोनों ने शादी की.

झारखंड की रहने वाली सोनाली कहती हैं कि परी के आने से उनकी ज़िंदगी के मायने बदल गए हैं. फोन पर मैंने उनसे कई बार बात की, इस बार उनकी आवाज़ में एक नई खनक थी और उत्साह भी, बावजूद इसके कि सिज़ेरियन के बाद वो कमज़ोर महसूस कर रही थीं.

सोनाली कहती हैं, "जब मुझ पर एसिड अटैक हुआ तो सोनाली के चेहरे को तो उन्होंने ख़त्म कर दिया लेकिन मेरे अंदर की सोनाली को मैने ख़त्म नहीं होने दिया. उस सोनाली को अब एक परी मिल गई है."

सोनाली के मुताबिक शादी के बाद वो माँ बनना चाहती थी लेकिन फ़ैसला आसान नहीं था. सोनाली का चेहरा इतना झुलसा चुका था कि कई सर्जरी करवाने के बाद भी अभी उन्हें कई तरह की सर्जरी की ज़रूरत है. तो क्या ऐसे में सर्जरी कराने के लिए माँ बनने की चाहत कुछ साल टाल देनी चाहिए? जब वो खुद देख नहीं सकती क्या ऐसे में एक बच्चे या बच्ची की ज़िम्मेदारी ले पाएँगी ?

सोनाली की शादी उनके ससुराल वालों की मर्ज़ी के बग़ैर हुई थी. सोनाली बताती हैं, ससुराल में हमारी कोशिश जारी है लेकिन लोग कई तरह की बातें तो करते ही हैं. मेरे ऊपर सबसे बड़ा सवाल यही थी कि क्या मेरी लड़की माँ बन भी सकती है या नहीं. शायद ऐसे लोगों को भी अपना जवाब मिल गया है.

नाना-नानी भी परी के आने से बहुत ख़ुश हैं. सोनाली बताती हैं कि एसिड अटैक के बाद तो उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी शादी होगी या कभी मेरी गोद में कोई बच्चा खेलेगा.

सोनाली से मेरी मुलाक़ात करीब पाँच साल पहले दिल्ली में एक सर्द दोपहर को हुई थी. ग़रीब परिवार से आने वाली सोनाली अपने पिता के साथ एम्स में इलाज कराने दिल्ली आई थी और गुरुद्वारे में किसी ने उन्हें रहने की जगह दी थी.

उस समय वो अपने हालात से इतनी परेशान थी कि उन्होंने सरकार से गुहार लगाई थी कि अगर सरकार उनकी मदद नहीं कर सकती तो उन्हें इच्छामृत्यु की इजाज़त दी जाए. मंहगा और तकलीफ़देह इलाज, कोर्ट कचहरी का चक्कर, कोर्ट का ख़र्च...पिता ने बची-खुची ज़मीन और ज़ेवर भी बेच दिए थे.

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उस दौरान मुझे दिए इंटरव्यू में सोनाली ने कहा था, "जब मुझ पर हमला हुआ था तो लग रहा था कि किसी ने मुझे आग की भट्ठी में डाल दिया हो. हर समय लगता था कि सिर्फ़ धुँआ है, जलन है और आग है, पता नहीं इस आग से कैसे निकलूँगी."

ये सोनाली की अपनी हिम्मत ही थी कि वो इस आग से निकलकर ज़िंदगी में आगे बढ़ पाई. इसमें उन्हें मां-बाप, भाई और फिर पति का पूरा साथ मिला. अब इसमें उनकी बेटी भी शामिल हो गई हैं.

सोनाली को बाद में बोकारो में ही नौकरी मिली जहाँ वो माँ-पिता के साथ रहती हैं जबकि उनके पति दूसरे शहर में नौकरी करते हैं. हंसते हुए सोनाली कहती हैं, पहले तो चितरंजन को मुझसे ही दूरी सहनी पड़ती थी और अब बेटी से भी. उनका मन नही लगता.

शादी के वक़्त चितरंजन के फ़ैसले पर सवाल उठाने वाले भी कम नहीं थे. सोनाली से शादी के बाद जब मैंने उनसे बात की थी, तो चितरंजन का जवाब कुछ यूँ था, "लोग चाहते हैं कि शादी के लिए लड़की आईएसआई मार्क के साथ आए कि उसका सब कुछ दुरुस्त हो.

मान लीजिए मैं किसी और से शादी करता. क्या ऐसा हादसा उस लड़की के साथ नहीं हो सकता था. मुझे ही कुछ हो जाए तो? लेकिन मुझे भरोसा है कि मैं और सोनाली वैसा ही सुंदर दांपत्य जीवन बिताएँगे जैसा हर कोई बिताता है. इतना भरोसा दिला सकता हूँ कि हमारी ज़िंदगी दुखी नहीं होगी."

सोनाली से बात करते करते मैं 2012 की उसी दोपहरी में पहुँच गई थी जब मैं पहली दफ़ा सोनाली से मिली थी.

किसी एसिड अटैक पीड़िता से वो मेरी पहली मुलाक़ात थी और मैं जो देखने वाली थी उसके लिए मैं कतई तैयार नहीं थी. तब सोनाली के हालात बहुत ख़राब थे, लेकिन तब भी उसकी आवाज़ में इतनी ही ज़िंदादिली थी और भरोसा कि ज़िंदगी बदलेगी.

ख़ैर बातों का सिलसिला फिर परी पर लौटता है. "हर माँ की तरह सोनाली की भी अब यही तमन्ना है कि वो बेटी को बेहतरीन परवरिश दें. बेटी को छूते हुए कहती है, उसका जो दिल चाहेगा वो करेगी, वो बनेगी. सुना है ख़ूब लंबे-पतले हाथ पाँव है, क्या पता मॉडल बने."

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