जल्लीकट्टू: 5 ग़ुस्साए सांडो से हुआ संवाददाता का सामना

मदुरई ज़िले के एक से छोटे गाँव के खेतों को हम पैदल पार कर रहे थे. खेतों के उस पार से रंभाने की आवाज़ अब तेज़ हो रही थी.

हमारे आगे चलने वाले रंजीत मणि ने कहा, "पेड़ की आड़ में खड़े हो जाइए."

थोड़ी दूर पर, ताड़ के दो पेड़ों के तनों के बीच एक भीमकाय सांड मोटी रस्सी से बंधा हुआ था.

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जल्लीकट्टू नहीं तो सांड की नस्लों पर खतरा

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जब एक गुस्साए जल्लीकट्टु सांड से सामना हुआ

तीन आदमी अजीब से इशारे और आवाज़ों से उसे काबू करने की कोशिश में थे.

मुद्दा था उसे नहलाने का. सुबह नहाने के बाद गुस्साए सांड ने ख़ुद को मिट्टी में रगड़ डाला था.

इस बीच धड़कनें तेज़ हो रहीं थी क्योंकि आसपास खुला मैदान था.

न छिपने की जगह, न ख़ुद को किसी दरवाज़े में बंद करने का जुगाड़.

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50 मिनट बाद जब रंभाना कम हुआ, मैंने डरते हुए 20 फ़ीट दूर से एक पीस-टू कैमरा करने की जुर्रत की.

रिटेक करने पड़े क्योंकि शब्दों के साए में डर था कि कहीं सांड रस्सी तोड़ बैठा तो हवा में तैरा भी सकता है.

बात मई 2016 की है. इस सांड ने दो सालों से जल्लीकट्टू रेस का बस रियाज़ भर किया था क्योंकि दौड़ पर रोक थी.

सांड के मालिक और ट्रेनर रंजीत के मित्र मुदकथन मणि अब हमें अपने पांच पालतू सांडों से मिलवाने ले जा रहे थे.

पलामेडु गाँव के पीछे वाले हिस्से में एक बड़े से गैराज के भीतर बंधे ये सांड बेहद गुस्से में थे.

मुदकथन ने बाहर निकल कर माफ़ी मांगी, "उन्हें निकालना खतरनाक हो सकता है."

ये ज़रूर बोले, "इन पांच सांडों पर महीने का खर्च 40,000 रुपए आता है. पैसे से ज़्यादा मेरी भावना इससे जुड़ी है और ये मेरे बच्चे हैं."

पलामेडु से थोड़ी ही दूर है अलंगनल्लूर जहाँ जल्लीकट्टू का खेल देखने देश-विदेश से लाखों लोग आते थे.

जिस अखाड़े नुमा हाते में खेल शुरू होता था उसमें खड़े होने पर रसेल क्रो की सुपरहिट फिल्म ग्लेडियेटर का सीन याद आ गया.

इस प्रांगण में दर्जनों सांड गरज रहे होते थे. गुस्सा दिलाने के बाद उन्हें एक संकरे रास्ते से बाहर निकल दौड़ने के लिए उकसाया जाता था.

गुस्से से तमतमाए भागते हुए सांडों के काबू करने दर्जनों युवक उन पर सवार होने की कोशिश करते थे.

दर्शकों के बैठने का पूरा इंतज़ाम मौजूद है. विदेशियों के लिए और वीवीआईपी लोगों का भी.

ये जल्लीकट्टू 'स्टेडियम' वीरान था. मुदकथन मणि और रंजीत अपने स्मार्टफ़ोन में पिछली दौड़ का वीडियो दिखा रहे थे.

मुदकथन धीमे से बोले, "वापस चल कर देख लेते हैं शायद पांचों में से कोई एक सांड अब शांत हो गया हो." मैंने साफ़ मना कर दिया.

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