आठ साल की पीजू ने बचाई थी सहेलियों की जान

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Image caption तार पिजू के पिता तार काना और मां तार याकू, अपनी बेटी की तस्वीर के साथ

भारत के 68वें गणतंत्र दिवस पर देश भर के 25 बहादुर बच्चों को वीरता पुरस्कार दिया जाएगा. इनमें से चार को ये पुरस्कार मरणोपरांत दिया जा रहा है.

आठ साल एक महीने की तार पीजू को मरणोपरांत ये पुरस्कार मिला है. दिल्ली में बेटी पीजू की तरफ से सम्मान लेने आए पिता तार काना की आंखें बेटी की याद में ग़मगीन हो उठती हैं.

तार काना अरुणाचल प्रदेश में फ़ूड एंड सिविल सप्लाई विभाग में सरकारी मुलाज़िम हैं. काना ने बताया, "19 मई 2016 की दोपहर पीजू अपनी सहेलियों के साथ पंचिम नदी को पार कर अपनी दो सहेलियों के साथ फॉर्म हाउस तक आने की कोशिश कर रही थी. तब हमें इसकी जानकारी नहीं थी. इस दौरान पीजू ने अपनी दो सहेलियों को नदी की तेज़ धार में बहते देखा.''

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''उसने पांच फीट गहरी नदी में छलांग लगा दी और उन्हें किनारे पर ले आईं, लेकिन नदी की तेज धारा में वह खुद बह गई. सहेलियों ने बताया तो हमने उसकी तलाश की, पीजू के मिलने पर अस्पताल ले गए, लेकिन वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया."

वहीं उनकी मां तार याकू बताती हैं, "वह कभी खाली नहीं बैठा करती थी, कभी पेंटिंग कभी ड्राइंग तो कभी घर के काम में भी हाथ बंटा दिया करती थी. वह मेरी एक्सट्रा ऑर्डिनरी बेटी थी. उसे सब प्यार किया करते थे फिर चाहे वह घर आने वाले गेस्ट हों या उसके स्कूल के दोस्त या टीचर."

मानव तस्करी रैकेट का पर्दापाश करने के लिए पश्चिम बंगाल की 18 साल की तेजस्विता प्रधान और 17 साल की शिवानी गोंड को भी पुरस्कार मिला है. दोनों कहती हैं कि उन्हें इस काम को करते हुए डर लगा, लेकिन एक एनजीओ, पुलिस और परिवार के सहयोग से उन्होंने ये सब कर डाला.

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Image caption शिवानी गोंड और तेजस्विता प्रधान को मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफ़ाश करने के लिए सम्मान मिला है

शिवानी के पिता बाबूलाल प्रसाद गोंड ने बताया कि उन्हें अभी भी इन बच्चियों की सुरक्षा की चिंता है, इसलिए दोनों को वह प्लेन से दिल्ली लेकर आए हैं. किरण बेदी को अपना आदर्श मानने वाली 17 साल की शिवानी गोंड आईपीएस बनना चाहती हैं.

वह बताती है, "मेतैई नेपाल नाम की संस्था ने एक गुमशुदा लड़की को तलाशने के लिए दार्जिलिंग के एक एनजीओ से मदद मांगी, इस एनजीओ को पता चला कि गुमशुदा लड़की दिल्ली में है. एनजीओ ने दिल्ली सीबीआई और स्टूडेंट एगेंस्ट ट्रैफ़िकिंग क्लब को सूचना दी. हम दोनों इस क्लब की सदस्य हैं. इसके बाद हम दोनों ने लापता लड़की से फेसबुक पर संपर्क साधा और बातचीत शुरू कर दी.''

''हमने नौकरी की तलाश का बहाना कर उससे लगातार संपर्क बनाए रखा. इस लड़की ने हमें दिल्ली में देह व्यापार का लालच दिया. हमें नकली आधार कार्ड भेजे और तुरंत सीमा पर आने को कहा. ये जानकारी पाकर स्थानीय पुलिस और एनजीओ ने जाल बिछाया और हमें लेने आई एक महिला और पुरुष को पुलिस ने धर दबोचा. इसके बाद दिल्ली में इस अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट का सरगना भी पकड़ा गया."

अमरीकन स्ट्रीट फोटोग्राफर विवियन मेयर को अपना रोड मॉडल मानने वाली तेजस्विता कहती हैं "मैं फोटो जर्नलिस्ट बनना चाहती हूँ."

वह मानती हैं, "समाज का विकास होने के बाद भी लड़कियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में कमी नहीं है. इस स्थिति को बदलने के लिए हमें आगे आना होगा. समझना होगा कि लड़के और लड़कियां एक हैं. लड़कों को अपनी सीमाओं का ध्यान रखना होगा."

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Image caption देहरादून के किसान परिवार के लड़के सुमित ममगाईं को भी मिल रहा है वीरता पुरस्कार

इसी तरह देहरादून के गांव फुलेत के एक किसान सुरेश दत्त के 15 साल के बेटे सुमित ममगाईं को संजय चोपड़ा अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. नौवीं क्लास के छात्र सुमित की आंखें उनकी निर्भीकता की कहानी कहती हैं.

वह बताते हैं, "आठ नवंबर 2016 की सुबह मैं और मेरा चचेरा भाई रितेश पशुओं को चारा खिलाने पास के खेत में जा रहे थे. झाड़ियों में छिपे एक गुलदार ने मेरे भाई पर हमला कर दिया, मैंने शोर मचाते हुए गुलदार पर पत्थर फेंके. इससे वह मेरे भाई को छोड़ मेरी तरफ़ बढ़ने लगा, उसकी पूंछ पकड़कर मैंने दंराती से उस पर वार किया इससे वो भाग गया."

सुमित कहते हैं, "मैंने सोच लिया था चाहे कुछ हो जाए मैं अपने भाई को छोड़कर नहीं जाऊंगा. उस वक़्त मुझे केवल अपने भाई की फिक्र थी."

भविष्य के सपनों पर सुमित कहते हैं, "मैं फौज़ी बनूंगा ताकि देश की सेवा कर सकूं."

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