बेला भाटिया को पुलिस ने सुरक्षा का दिया आश्वासन

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बीते कुछ सालों से बस्तर के आदिवासियों के बीच काम कर रही सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया को कुछ अज्ञात लोगों ने बस्तर छोड़ देने की धमकी दी थी.

भाटिया के मुताबिक़ सोमवार सुबह लगभग 30 लोग कई गाड़ियों में उनके घर पहुंचे और उनसे तुरंत बस्तर छोड़ चले जाने के लिए कहा था और 24 घंटे में ऐसा नहीं करने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी.

अब छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि बेला भाटिया को पर्यात्त सुरक्षा दे दी गई है. पुलिस ने जारी किए अपने बयान में बताया है कि बेला की सुरक्षा में सब इंस्पेक्टर कृपाल सिंह गौतम के नेतृत्व में चार महिला पुलिसकर्मियों के साथ कुल 12 पुलिस बलों को तैनात किया गया है.

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बेला भाटिया ने कहा था,"उन्होंने मुझे नक्सली बताते हुए मेरे ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की, मुझे धमकाया. उन्होंने तुरंत मकान खाली नहीं करने पर मेरा घर जला देने और मेरे पालतू कुत्ते को गोली मार देने की धमकी भी दी."

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उन्होंने बताया था कि हालात बिगड़ते देख वे कपड़ा बदलने के बहाने घर के अंदर गईं और वहां से बस्तर के ज़िलाधिकारी को पूरे मामले की जानकारी दी.

उन्होंने कहा था कि इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन पुलिस के सामने भी उन्हें धमकाया गया.

छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है था कि बेला भाटिया के घर पहुँचे लोग गाँव के ही लोग थे जिन्होंने उनके घर जाकर विरोध प्रदर्शन किया.

प्रदेश के सहायक पुलिस महानिरीक्षक (प्रशासन) अभिषेक पाठक ने कहा था कि सूचना मिलने के बाद तत्काल एक पुलिस टीम को बेला भाटिया के निवास भेजा गया और पुलिस के समझाने के बाद ग्रामवासी लौट गए.

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हालाँकि बेला भाटिया का कहना है उनमें से कोई भी आदमी उस परपा गांव का नहीं था, जहां वे रहती हैं और अधिकांश लोगों ने अपने चेहरे पर कपड़ा बांध रखा थे.

उन्होंने कहा कि उन्होंने और उनकी मकान मालिक ने 24 घंटे में मकान खाली करने का आश्वासन दिया जिसके बाद ही भीड़ वहां से गई.

छत्तीसगढ़ में काम कर रहे मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर लाखन सिंह ने कहा कि बेला भाटिया के मकान मालिक को कुछ दिन पहले ही धमकी दी गई थी.

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डॉक्टर लाखन सिंह ने कहा,"बस्तर में फ़र्जी मुठभेड़ और आदिवासी महिलाओं के यौन उत्पीड़न को उजागर करने में बेला भाटिया की मुख्य भूमिका रही है. राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और दूसरे संगठनों ने बस्तर पुलिस पर लगे आरोपों को सही पाया."

उन्होंने कहा कि इसके बाद से ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों की तरह बेला को भी डराने धमकाने की कोशिशें की जा रही हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि बस्तर पुलिस के संरक्षण में असामाजिक तत्वों ने वहां भय और आतंक का एक ऐसा माहौल बना दिया है जिसमें आम आदमी असुरक्षित है.

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