'अज्ञात स्रोत' पार्टियों पर सबसे ज़्यादा मेहरबान

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नेशनल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के मुताबिक़ पिछले 11 वर्षों में भारतीय राजनीतिक दलों को 69 फ़ीसद आय 'अज्ञात स्रोतों' से हुई है.

मंगलवार को दिल्ली में जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2004 से लेकर मार्च 2015 तक सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की कुल आय 11,367 करोड़ रुपए रही जिसमें से सिर्फ़ 31 फ़ीसद आय के ही स्रोत का पता है.

मौजूदा नियमानुसार राजनीतिक दलों को किसी भी व्यक्ति या संस्था से प्राप्त हुए 20,000 रुपये से कम का स्रोत बताने की आवश्यकता नहीं है.

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पिछले कुछ वर्षों में कई जानकारों की राय रही है कि इस नियम में तुरंत बदलाव लाने की ज़रूरत है जिससे चुनावी खर्चों और राजनीतिक दलों के काम-काज में पारदर्शिता बढे.

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने इस तरह की मिसाल पर अपने कार्यकाल में कड़ी टिप्पणियां भी दी थी.

उन्होंने कहा था, "हमारी तो कोशिश रही है कि राजनीतिक दल कैश लेने वाले चलन को बंद करें. मगर इस पर बहुत काम बाकी है."

बहरहाल इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले 11 साल के दौरान कांग्रेस पार्टी को 3,323 करोड़ 39 लाख रुपए की आय अज्ञात स्रोतों से हुई जो कि पार्टी की कुल आय का 83 प्रतिशत है.

जबकि नेशनल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स के अनुसार भारतीय जनता पार्टी की 65 प्रतिशत आय अज्ञात स्रोतों से रही, ये राशि 2,125 करोड़ 95 लाख रुपए रही.

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रहा सवाल क्षेत्रीय दलों का तो समाजवादी पार्टी का रिकॉर्ड थोड़ा चौंकाने वाला मालूम पड़ता है.

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इस नई रिपोर्ट के अनुसार, "सपा की कुल आय का 94 प्रतिशत जो कि 766 करोड़ 27 लाख रुपए होती है अज्ञात स्रोतों से हुई, वहीं शिरोमणि अकाली दल की 86 प्रतिशत आय यानी 88 करोड़ 6 लाख रुपए अज्ञात स्रोतों से आई."

भारत में राजनीतिक पार्टियों और चुनावों पर नज़र रखने वाली इन दोनों संस्थाओं के अनुसार अज्ञात स्रोतों में सेल ऑफ़ कूपन्स, आजीवन सहयोग, रिलीफ़ फंड्स वगैरह शामिल रहते हैं.

जबकि राजनीतिक दलों की आय के ज्ञात स्रोतों में चल और अचल संपत्ति, पुराने अखबार, सदस्यता शुल्क, बैंक ब्याज और डेलीगेट फ़ीस वगैरह का ज़िक्र वित्तीय खातों में किया जाता है.

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