अब छत्तीसगढ़ की सरकार ही बेचेगी शराब

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गुजरात और बिहार की तर्ज़ पर छत्तीसगढ़ में भी शराबबंदी की मांग उठती रही है लेकिन इसके उलट वहाँ की सरकार ने अब ख़ुद शराब बेचने का निर्णय किया है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक कर आबकारी नियम में संशोधन के लिए अध्यादेश को मंज़ूरी दी है.

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राज्य के आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल के कहा, "अध्यादेश पर मुहर लगा दी गई है और अब इसे मंज़ूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा."

अध्यादेश के मुताबिक़ देसी और विदेशी शराब दुकानों से मिलने वाले राजस्व को सुरक्षित रखने और राज्य के लोगों की सेहत के ख़्याल से देसी और विदेशी शराब की फुटकर बिक्री का अधिकार अब एक नए सरकारी उपक्रम को दिया जाएगा.

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छत्तीसगढ़ में शराब की खपत और उसे बेचकर सरकारी ख़ज़ाने में पिछले 15 सालों में राजस्व में आश्चर्यजनक बढ़ोत्तरी हुई है.

मध्यप्रदेश से अलग जब छत्तीसगढ़ राज्य बना, उस समय 2001-02 में शराब से होने वाली आय 32.61 करोड़ रुपए थी, जो पिछले साल सौ गुना से भी ज़्यादा बढ़कर 3,347.54 करोड़ रूपए तक जा पहुंची.

इस साल यह आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

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लेकिन सरकार के इस निर्णय का विरोध भी शुरु हो गया है.

छत्तीसगढ़ में शराब के ख़िलाफ़ लगातार आंदोलन चलाने वाले शराबबंदी संयुक्त मोर्चा के निश्चय वाजपेयी कहते हैं, "एक तरफ संविधान कहता है कि जनकल्याणकारी सरकार को शराबबंदी की ओर बढ़ना है, जनता भी लगातार शराबबंदी के लिए आंदोलन कर रही है लेकिन कॉरपोरेशन बना कर सरकार के ख़ुद शराब बेचने का फ़ैसला संविधान और जनता दोनों की भावनाओं के उलट है."

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विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार के इस निर्णय का विरोध किया है.

छत्तीसगढ़ में पार्टी के प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा,"यह बहुत शर्मनाक होगा कि कोई चुनी हुई सरकार, जो अपने आपको लोकप्रिय और संवेदनशील भी कहती हो, वह शराब के धंधे में उतर रही है."

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