औरतों की उम्मीदवारी के मामले में फिसड्डी गोवा

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Image caption दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर

गोवा सरकार में मंत्री एलीना सलदानहा विधानसभा में भाजपा की अकेली महिला विधायक हैं. गोवा विधानसभा में भाजपा के 21 विधायक हैं जिसमें वो अकेली महिला हैं.

2012 में हुए विधानसभा चुनाव में वो अकेली महिला थीं जिन्हें पार्टी की ओर से विधानसभा का टिकट दिया गया था. हालांकि राज्य में पार्टी की एक मज़बूत महिला इकाई भी है.

यहां तक कि एलीना सलदानहा को भी सरकार बनने के एक महीने के अंदर हुए उपचुनाव में टिकट दिया गया था.

यह सीट उनके पति की मौत के बाद खाली हुआ था जिस पर उन्हें टिकट दिया गया.

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Image caption साल 2012 में गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान वोट डालते वोटर.

गोवा का समाज एक उदारवादी समाज के तौर पर जाना जाता है. यहां औरतें जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं फिर चाहे वो राजनीति ही क्यों ना हो. लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में उन्हें तरजीह नहीं दी जाती है.

इस विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की संख्या ने पुरुष मतदाताओं को पीछे छोड़ दिया है. 11 लाख मतदाताओं में 5.64 लाख महिला मतदाता हैं तो वहीं 5.46 लाख पुरुष मतदाता हैं.

महिला मतदाता पुरुषों की तुलना में एक फ़ीसदी ज्यादा है. इसके बावजूद चालीस विधानसभा सीटों वाले गोवा में सिर्फ़ 16 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं. जबकि कुल 250 उम्मीदवार चुनाव के मैदान में हैं.

इसका मतलब यह हुआ कि 51 फ़ीसदी वोट देने वाले तबके का चुनावी मैदान में प्रतिनिधित्व सिर्फ़ 6.4 फ़ीसदी हैं.

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राज्य में पहली बार सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवार आम आदमी पार्टी की ओर से चुनाव लड़ रही हैं. आम आदमी पार्टी ने छह महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाया है.

आम आदमी पार्टी के महिला शाखा की नेता जेन पीनहेरो का कहना है, "हम कम से कम 12 उम्मीदवार चाहते थे लेकिन औरतों में अभी भी चुनाव लड़ने को लेकर आत्मविश्वास की कमी है."

वो बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधती हैं और इस हालत के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराती हैं कि इन पार्टियों ने कभी महिलाओं में विधायक बनने का विश्वास ही नहीं पैदा किया.

लेकिन कांग्रेस की प्रवक्ता स्वाती केरकार इस आरोप को सिरे से खारिज करती हैं.

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वो कहती हैं, "कांग्रेस के पास देश को पहली महिला प्रधानमंत्री देने की विरासत है और आज भी एक महिला (सोनिया गांधी) के हाथों में ही पार्टी की बागडोर है."

उनके मुताबिक़ कांग्रेस ने महिलाओं के विधायक या सांसद बनने की संभावनाओं को पूरी तरह से महिलाओं के पाले में डाल रखा है कि वे ख़ुद आगे बढ़े और अपनी दावेदारी पेश करें.

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कांग्रेस ने इस चुनाव में सिर्फ़ तीन महिलाओं को टिकट दिया है जिनमें से एक मौजूदा विधायक जेनिफ़र मॉसेराटे हैं. जेनिफ़र के पति बाबुश मॉसेराटे भी विधायक हैं.

वहीं कांग्रेस की जो दूसरी उम्मीदवार हैं सावित्री कावालेकर, उनके पति भी चंद्रकांत कावालेकर भी विधायक हैं. माना जा रहा है कि इन दोनों के लिए इनके पतियों ने पार्टी में लॉबिंग की है.

सिर्फ़ एक महिला उम्मीदवार ही कांग्रेस की हैं जिन्हें अपने दम पर टिकट मिला है. ये हैं उर्मियाल नाइक जो पहले सरपंच रह चुकी है. वो मडकाई से चुनाव लड़ रही हैं.

महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी की शशिकला काकोदकर अकेली महिला थीं जो गोवा की मुख्यमंत्री रही थीं. इस पार्टी ने गोवा बनने के बाद गोवा में पहले 17 सालों तक शासन किया था. शशिकला काकोदकर राज्य की दूसरी मुख्यमंत्री थीं.

इस पार्टी ने इस चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारा है.

एलीना सलदानहा ने माना, "बीजेपी को विधानसभा चुनाव में अधिक औरतों को भागीदारी देनी चाहिए थी लेकिन यह पार्टी के आलाकमान पर निर्भर करता है."

वो मानती हैं कि औरतें राजनीति के क्षेत्र में अधिक दृढ़ निश्चयी, एकाग्रचित और लगन के साथ काम करने वाली होती हैं.

वो कहती हैं, "यह मेरा एक विधायक और मंत्री के तौर पर निजी अनुभव है."

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