सिर्फ़ गरज कर रह जाएंगे बादल या बरसेंगे भी?

आसमान पर घने बादल छाये हुए हैं. तेज़ बारिश ने एक बार फिर यहाँ के तापमान को और कम कर दिया है.

लोग ठंड से बचने के लिए जगह जगह अलाव जलाए हुए हैं. आज आसमान पर भले ही बदल छाए हुए हों मगर ज़मीन पर भी यह बादलों का ही इलाक़ा है.

बात हो रही है पंजाब की लांबी विधान सभा सीट की जहां से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पांचवीं बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. वैसे तो यह विधानसभा की सीट बठिंडा संसदीय क्षेत्र में आती है जहाँ से बड़े बादल की बहू हरसिमरत कौर बादल सांसद हैं.

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लांबी के पास ही मुख्यमंत्री का पिंड यानी गाँव है - बादल.

मगर इस बार इस विधानसभा सीट पर रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है क्योंकि कांग्रेस के नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस सीट से अपना पर्चा भरा है. पहले यह समझा जा रहा था कि हमेशा की तरह इस बार भी प्रकाश सिंह बादल के लिए यहाँ से जीतना बहुत आसान होगा.

मगर लांबी में कड़ा संघर्ष होने के आसार हैं क्योंकि आम आदमी पार्टी ने भी यहाँ अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है. आम आदमी पार्टी ने पूर्व पत्रकार और दिल्ली के विधायक जरनैल सिंह को इस सीट के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है.

वैसे सभी पार्टियों के चुनावी कार्यालयों पर सन्नाटा है क्योंकि अभी मतदान के लिए काफी दिन बचे हैं. 'लांबी में सब कुछ आख़िरी वक़्त में ही होता है' - यह कहना है शिरोमणि अकाली दल के चुनावी कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं का.

शायद यही वजह है कि अभी तक बड़े बादल ने यहाँ अपना प्रचार अभियान सही तरह शुरू भी नहीं किया है.

कैप्टन अमरिंदर सिंह भी पर्चा भरने के बाद से लांबी नहीं आए हैं. उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि वो पंजाब के दूसरे हिस्सों में प्रचार की कमान संभाले हुए हैं.

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लांबी में अगर गहमा गहमी कहीं है तो वो आम आदमी पार्टी के खेमे में जहाँ कार्यकर्ताओं का हुजूम है. इस जमात में ज़्यादातर नौजवान हैं.

तो क्या पहली बार पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में इस चुनाव को लेकर ज़्यादा उत्साह है ?

शिरोमणि अकाली दल के नेता और लांबी में पार्टी के प्रचार की कमान संभालने वाले अँगरेज़ सिंह ऐसा नहीं मानते.

वो कहते हैं, "यह तो बड़े बादल साहब की पक्की सीट है. उन्होंने यहाँ के लोगों के लिए काफ़ी कुछ किया है. इस लिए हमें इत्मीनान है कि यहाँ बादल साहब के मुकाबले में कोई टिक नहीं सकता."

Image caption शिरोमणि अकाली दल के नेता और लांबी में पार्टी के प्रचार की कमान संभालने वाले अँगरेज़ सिंह

मगर अँगरेज़ सिंह के चुनावी कार्यालय से कुछ ही दूर चाय की दूकान पर मौजूद लांबी के नौजवान कुछ और ही कहते हैं. वो मेरा ध्यान पास ही गाँव तक जाने वाली सड़क की तरफ दिखाते हैं जो गड्ढों से भरी हुई थी.

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नौजवानों के इस समूह में मौजूद लोग बढ़ती बेरोज़गारी, नशाखोरी और संसाधनों के अभाव की शिकायत कर रहे थे. मगर अँगरेज़ सिंह इन आरोपों को 'पंजाब को बदनाम करने की कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की चाल' कहकर ख़ारिज करते हैं.

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वहीं कांग्रेस के स्थानीय नेता अपने प्रत्याशी के इंतज़ार में हैं. उनका कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लांबी से बड़े बादल के खिलाफ पर्चा भरकर पूरी लड़ाई की दिशा को ही मोड़ दिया है. वैसे कैप्टन ने अपनी पुरानी सीट पटियाला से भी नामांकन दायर किया है.

वहीं आम आदमी पार्टी के जगदीप सिंह का आरोप है कि कैप्टेन अमरिंदर ने लांबी से पर्चा दायर कर प्रकाश सिंह बादल की मदद करने की कोशिश ही की है. उनका आरोप है कि जो लड़ाई प्रकाश सिंह बादल और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के बीच थी उसे कैप्टन ने त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है.

वो कहते हैं, "इन सबकी कोशिशों के बावजूद आम आदमी पार्टी की स्थिति काफी अच्छी है. लोगों को अकाली दल और कांग्रेस के अलावा एक विकल्प मिल गया है."

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यहीं पर मौजूद आम आदमी पार्टी के लिए काम कर रहे पूर्व सैनिक जीवन सिंह 'फौज्जी' कहते हैं कि इतने सालों में कैप्टन अमरिंदर इस इलाके से चुनाव लड़ने कभी नहीं आए थे. उनका आरोप है कि आम आदमी पार्टी के बढ़ते प्रभाव से बड़े बादल घबरा गए इसलिए अकालियों ने कैप्टन को चुनाव लड़ने के लिए बुलाया है.

जीवन सिंह फौज्जी कहते हैं, "मुख्यमंत्री का विधानसभा का क्षेत्र ऐसा होता है क्या? यहाँ दूर दराज़ हर गाँव में आपको शराब की भट्ठी मिलेगी. लोगों को शिक्षित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया इसलिए यहाँ के लोग बाक़ी की दुनिया से बिलकुल कटे हुए हैं. शिक्षा का यह हाल है कि लोग लिफ़ाफ़े को फ्लाफा बोलते हैं."

मगर आम आदमी पार्टी के चुनावी प्रचार अभियान के बावजूद शिरोमणि अकाली दल के खेमे में अगर चिंता भी है तो वो उसे सामने ज़ाहिर नहीं होने दे रहे हैं. वो कहते हैं कि "प्रकाश सिंह बादल सिर्फ गरजने वाले बादल नहीं हैं. वो तो बरसने वाले बादल हैं."

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