वो सवाल जिन्हें टालते नज़र आए राहुल-अखिलेश

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कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव लखनऊ में पहली बार एक साथ नज़र आए. विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों ने गठबंधन कर लिया है.

ऐसे में दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि दोनों का उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी के ख़िलाफ़ लड़ना है.

दोनों युवा नेताओं का हाव-भाव काफी आत्मविश्वास भरा दिखा, दोनों मुस्कुराते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए और तमाम सवालों का जवाब भी दिया.

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हालांकि इस दौरान दोनों नेताओं को कई मुश्किल सवालों का समाना करना पड़ा और वो ऐसे सवालों को टालते भी दिखे.

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गठबंधन का सबसे बड़ा पेंच

इस गठबंधन में सबसे बड़ा पेंच अमेठी और रायबरेली की विधानसभा सीटों के बंटवारों से जुड़ा है. लेकिन इससे जुड़े सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि ये गठबंधन का मुख्य मुद्दा नहीं है, आंतरिक मामला है, हम सुलझा लेंगे. वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि अगर सब कुछ आज ही बता देंगे तो आप लोगों को आगे का मसाला कैसे मिलेगा?

ऐसा ही एक सवाल अखिलेश यादव से पूछा गया कि क्या 2019 में वे प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी के चेहरे का साथ देंगे? इस सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि सीएम तो पीएम पद की होड़ में नहीं हैं, अभी उसका समय नहीं है. बाद में ये सवाल फिर से पूछा गया तो अखिलेश ने कहा कि वो तब देखेंगे.

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एक ऐसा सवाल भी सामने आया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन में भ्रष्टाचारी और गुंडागर्दी करने वाले एक साथ आ गए हैं, तो इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा इस गठबंधन में तो भारतीय जनता पार्टी शामिल ही नहीं है.

हालांकि कुछ मौके ऐसे भी आए जो अखिलेश यादव के लिए सहज नहीं रहे. ऐसा एक सवाल कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के संबंधों पर था?

इसका जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे मायावती की बड़ी इज्जत करते हैं, कांशीराम की भी इज्जत करते हैं.

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इस मसले पर उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं, "ये बात अखिलेश के लिए तो सहज नहीं ही होगी, क्योंकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के मंच पर मायावती की तारीफ़ का क्या मतलब हो सकता है?"

शरत प्रधान इसके सांकेतिक मतलब की ओर भी इशारा करते हैं, "ये भी संभव है कि कांग्रेस बहुजन समाज पार्टी के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने का विकल्प खुला रखना चाहती है ताकि आगे या फिर 2019 में समाजवादी पार्टी के बदले बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन बन जाए. कांग्रेस दलितों को अपने खेमे में लाना चाहती है."

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वहीं, वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार अंबिकानंद सहाय कहते हैं, "राहुल गांधी और अखिलेश यादव की बॉडी लैंग्वेज शानदार थी, लेकिन राहुल गांधी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज़्यादा बोले, कई बार कुछ सवालों पर नहीं बोलना भी बेहतर होता है. राहुल की तुलना में अखिलेश कहीं ज़्यादा मैच्योर दिखे."

ऐसा क्यों दिखा, इस बारे में अंबिकानंद सहाय कहते हैं कि जब राहुल गांधी से अखिलेश के काम-काज के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अखिलेश की नीयत अच्छी है और वे उनकी अच्छी नीयत का साथ देना चाहते हैं, जबकि इस गठबंधन में अखिलेश का नारा ही है- काम बोलता है. वे अपने पांच साल के कामों का हिसाब लेकर वोट मांगने जा रहे हैं.

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क्या प्रियंका और डिंपल करेंगी प्रचार?

लखनऊ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल ये भी पूछा गया कि कांग्रेस ने शीला दीक्षित को यूपी में सीएम का उम्मीदवार बनाया था और ऐसा कब उन्हें लगा कि गठबंधन करना ही पड़ेगा. इस सवाल का राहुल गांधी ने कोई जवाब नहीं दिया और अखिलेश यादव ने कहा कि शीला जी से उनका कन्नौज से ही पुराना नाता रहा है.

इतना ही नहीं राहुल गांधी और अखिलेश यादव इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रियंका गांधी और डिंपल यादव के प्रचार अभियान में शामिल होने से जुड़े सवाल टालते नज़र आए. राहुल गांधी ने कहा कि प्रियंका उनकी बहन हैं और हमेशा उनका साथ देती आई हैं, उन्हें लगेगा कि प्रचार करना चाहिए तो वे करेंगी. वहीं अखिलेश यादव ने भी कहा कि डिंपल कन्नौज से सांसद हैं और उन्हें लगेगा तो वे भी प्रचार में उतरेंगी.

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इसके अलावा राहुल गांधी और अखिलेश यादव से ये भी पूछा गया कि क्या इस चुनाव प्रचार में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव भी एक साथ मंच पर आकर प्रचार करेंगे.

इस सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि हमें बड़े नेताओं का आशीर्वाद मिलता रहे, हम उसी में चुनाव जीत जाएंगे.

हालांकि शरत प्रधान के मुताबिक इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक और ऐसी बात थी, जो अखिलेश यादव को असहज लगी होगी.

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शरत प्रधान कहते हैं, "राहुल गांधी ने हमेशा अखिलेश को अखिलेश करके संबोधित किया, जबकि अखिलेश उन्हें राहुल जी कहते दिखे. हो सकता है उम्र का तकाजा रहा हो, लेकिन असली बात ये है कि राहुल गांधी हमेशा ये दर्शाते नज़र आए कि वे बड़े भाई की भूमिका में हैं."

इस बारे में अंबिकानंद सहाय कहते हैं, "ये बात तो सब जानते ही हैं कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की भूमिका ज़्यादा बड़ी है. ये राहुल गांधी के बात करने का स्टाइल हो सकता है, लेकिन यूपी में राजनीतिक और रणनीतिक तौर पर समाजवादी पार्टी बड़े भाई की भूमिका में है, कांग्रेस सहयोगी की."

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हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि ये गठबंधन अवसरवादी नहीं है, बल्कि ये दिल की आवाज़ पर बना है. इससे इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पार्टी 2019 का लोकसभा चुनाव भी साथ मिलकर लड़ सकती हैं.

शरत प्रधान भी ये मानते हैं कि इस गठबंधन को लेकर राहुल गांधी ने पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा परिपक्वता दिखाई है, लेकिन गठबंधन का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों को मुसलमानों का कितना साथ मिलता है.

अंबिकानंद सहाय के मुताबिक राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने मिलकर 2019 की तैयारी अभी से शुरू कर दी है.

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