पुलिस चाहती है मानवाधिकार का काम न हो- बेला भाटिया

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सामाजिक कार्यकर्ता और शोधकर्ता बेला भाटिया ने अपने घर पर हुए हमले के मामले में रविवार को पुलिस में एक शिकायत दर्ज़ कराई है.

छत्तीसगढ़ पुलिस ने कहा है कि बेला भाटिया की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

इस बीच, छत्तीसगढ़ सरकार ने बेला भाटिया के अनुरोध पर उन्हें जगदलपुर शहर में एक सरकारी मकान भी आवंटित किया है. हालांकि बेला भाटिया ने कहा है, "मुझे जो सरकारी आवास आवंटित किया गया है, वहां फिलहाल कोई और निवास कर रहा है और वो एक-दो दिन में वहां से जाएंगे."

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बीते कुछ सालों से बस्तर के आदिवासियों के बीच काम कर रही बेला भाटिया के घर पर सोमवार को कुछ अज्ञात लोगों ने प्रदर्शन किया था और उन्हें बस्तर छोड़ने की धमकी दी थी. ऐसा नहीं करने पर उन्हें अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी.

इस मुद्दे को लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने बेला भाटिया को सुरक्षा मुहैया कराई. इस मामले की जांच भी शुरू की गई है.

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रविवार को बेला भाटिया ने पुलिस को चार पन्नों का एक शिकायती पत्र दिया है जिसमें उन्होंने कहा है, "अग्नि संगठन (पुलिस द्वारा समर्थित संगठन) और पुलिस ने मिलकर मुझे तंग करने के इरादे से ऐसा किया है, ताकि मैं मानवाधिकारों के बचाव का काम छोड़कर बस्तर से चली जाऊं. इस इरादे से पहले भी मुझे तंग करते रहे हैं और 22 और 23 जनवरी की घटनाओं को भी इसी उद्देश्य से किया गया है."

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अपनी शिकायत में बेला भाटिया ने कहा है कि अग्नि संगठन में जो सदस्य हैं, वह पहले सामाजिक एकता मंच, महिला एकता मंच में थे. उन्होंने मार्च 2016 में भी इसी तरह से उन्हें परपा गांव से भगाने की कोशिश की थी.

उन्होंने लिखा, "उस समय उन्होंने मेरी फ़ोटो के साथ एक पर्चा छापा था, जिसमें मुझे 'नक्सली दलाल' कहा गया था. इस पर्चे को मेरे गांव में और आस-पास के इलाकों में बांट दिया गया था, और मेरी ज़िंदगी को ख़तरे में डाल दिया था."

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बेला भाटिया ने अपनी शिकायत में कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा, "...मैं इस निष्कर्ष पर पहुंची हूँ कि अग्नि संगठन और बस्तर पुलिस के बीच एक घनिष्ठ संबंध है. यह संगठन पुलिस के संरक्षण में है और उनका सहयोगी है. बस्तर पुलिस और ये संगठन दोनों चाहते हैं कि यहां मानवाधिकारों के बचाव को जो भी काम कर रहा है, उसे रोका जाए."

अग्नि संगठन ने इन आरोपों का खंडन किया है. संगठन के संयोजक आनंद मोहन मिश्रा ने कहा, "ये सारे आरोप बेबुनियाद हैं. बस्तर की जनता गांधीवादी तरीक़े से माओवादियों का विरोध कर रही है. इससे माओवादियों का समर्थन करने वाले बौखला गए हैं."

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