अमृतसर में नवजोत सिद्धू ठोक पाएंगे ताली?

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पंजाब विधानसभा चुनाव में पूर्वी अमृतसर सीट सबसे अहम मानी जा रही है. बीजेपी छोड़कर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए सिद्धू पूर्वी अमृतसर सीट से हाथ के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं.

सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर बीजेपी की टिकट पर यहां से विधायक चुनी गई थीं. उस चुनाव में सिद्धू ने खुद अहम भूमिका निभाई थी.

नवजोत सिंह सिद्धू बेशक सिलेब्रिटी हैं. मशहूर क्रिकेटर हैं. साथ ही कॉमेडी शोज़ में उनके जलवे देखने को मिले हैं. लेकिन अमृतसर के लोग इस बात से चिंतित हैं कि सिद्धू राज्यसभा और लोकसभा सदस्य के रूप में अपने चुनाव क्षेत्र से लंबे समय तक अनुपस्थिति रहे हैं.

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'बात के पक्के सिद्धू'

पूर्वी अमृतसर क्षेत्र के रहने वाले रणदीप सिंह कहते हैं कि, "किसी ऐसे व्यक्ति पर कैसे भरोसा किया जाए जो उस पार्टी के प्रति भी वफादार नहीं हैं जिसका हाथ थाम कर वे राजनीति में आए थे."

माना जाता है कि नवजोत सिंह सिद्धू को भारतीय जनता पार्टी के अरुण जेटली राजनीति में लेकर आए थे. सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर के मुताबिक़ उनके पति अपनी बात के पक्के हैं. वे कहती हैं, "उन्होंने वही किया जो कहा और अपनी बात पर कायम रहे."

उन्होंने कहा कि, "सिद्धू जब सांसद थे तब शिरोमणि अकाली दल ने उनकी राह में रोड़े अटकाए. नवजोत अपने क्षेत्र के विकास के लिए जो कुछ भी करना चाहते थे, उन्हें करने नहीं दिया गया.''

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कांग्रेस के बाग़ी से है सिद्धू का मुकाबला

उनके मुताबिक़ अब जब कांग्रेस ने उन्हें मैदान में उतारा है तो उनकी जीत तय है. कांग्रेस ने पंजाब में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सिद्धू को सौंपी है. नवजोत सिंह सिद्धू के लिए उनकी पत्नी उनके चुनाव क्षेत्र में लोगों से मिल रही हैं.

पूर्वी अमृतसर से भाजपा के राजेश हनी सिद्धू के खिलाफ़ चुनाव मैदान में हैं. यहां से आम आदमी पार्टी के सरबजोत सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. यानी मुकाबला त्रिकोणीय है.

दिलचस्प है कि कांग्रेस के बागी उम्मीदवार प्रदीप सिंह मन्ना ने यहां से सिद्धू के खिलाफ पर्चा भरा है. बताया जा रहा है कि वे हर रोज लोगों के बीच जाकर सिद्धू के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं. उनकी सभा में अच्छी संख्या में लोग जुट रहे हैं.

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सोनिया और राहुल की आलोचना

प्रदीप सिंह मन्ना ने सिद्धू के खिलाफ़ 'अमीर और जमीर की लड़ाई' जैसा नारा दिया है. प्रदीप सिंह नवजोत सिंह सिद्धू पर तंज कसते हुए कहते हैं कि, "ये वही हैं जिन्होंने कभी सोनिया गांधी और राहुल गांधी को 'मुन्नी और पप्पू' कहा था और अब अपने निहित स्वार्थ के लिए उसी कांग्रेस में शामिल हो गए.''

मन्ना के मुताबिक़ सिद्धू भाजपा से अलग होने और खुद की बोली लगाने के बाद लोगों के बीच अपना आकर्षण खो चुके हैं. कांग्रेस में शामिल होने के बाद सिद्धू ने मुख्य रूप से शिरोमणि अकाली दल के नेताओं पर निशाना साधा है. वे आप नेताओं पर भी हमले करते रहे हैं.

पंजाब में 4 फरवरी को चुनाव है. नतीजे 11 मार्च को आएंगे. अब देखना है कि सिद्धू पूर्वी अमृतसर के मैदान पर खेल पाते हैं या नहीं.

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