'रेप पीड़िता डरी हुई थीं कि कहीं पति न छोड़ दें'

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'बेहद डरी और सहमी हुई हैं पीड़ित महिलाएं'

दिल्ली से सटे गुड़गांव के पटौदी में एक छोटा सा गांव है मांडपुरा. यहाँ एक फैक्टरी है जिसके बाहर ऊंचे लोहे के गेट लगे हैं. बाहर से ये फैक्टरी सुरक्षित नज़र आती है, लेकिन इसके भीतर काम कर रहे कामगार डर से कांप रहे हैं.

शनिवार की रात इसी फैक्टरी में 7-8 नकाबपोश लोग घुसे और दो नवविवाहिता महिलाओं के साथ गैंगरेप किया. उन्होंने लोगों से नकदी छीन ली, उनके मोबाइल फोन तोड़ डाले और तीन घंटे तक तांडव मचाने के बाद वहाँ से भाग गए.

ये मज़दूर अब भी सदमे में हैं. उनमें से एक ने कहा कि क्या होगा अगर उन्हीं नकाबपोश लोगों का गिरोह या कोई और फैक्टरी में आ धमकेगा.

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ये लोग इतने बेखौफ़ थे उन्होंने अपने लिए चिकन बनाया और इसे मज़े से खाने से बाद सुबह तीन बजे वहाँ से चले गए.

पुलिस की वर्दी में आए थे बदमाश

इस फैक्टरी के मैनेजर कंचन सिंह उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें बदमाशों ने कमरे के अंदर बंद कर दिया था. कंचन सिंह बताते हैं, "वे मेरे कमरे में आए और मुझे जगाकर पूछा कि कि मेरे पास बंदूक है. मैंने कहा कि नहीं. उनके पास हथियार थे और उन्होंने पुलिस की वर्दी पहनी थी."

कंचन आगे कहते हैं, "फिर उन्होंने मुझे बांध दिया और फर्श पर लिटा दिया. मेरे दो मजदूरों को भी बांध दिया और उन्हें चारपाई पर लिटा दिया. उन्होंने हमें बाहर से बंद कर दिया और वहाँ से चले गए."

Image caption कंचन सिंह

कंचन ने बताया, "हमें बंद करने के बाद वे दूसरे कमरों में चले और दूसरे मजदूरों को भी बंद कर दिया. कोई नहीं जानता कि वे उन कमरों में कैसे घुसे जहाँ दो महिलाएं थी. उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया."

मेडिकल रिपोर्ट में भी उन महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार की पुष्टि हुई है.

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डरी और सहमीं हैं पीड़ित महिलाएं

फैक्टरी के मालिक प्रीतम सिंह का कहना है कि दोनों महिलाएं सहमी हुई हैं. प्रीतम कहते हैं, "मैंने उनसे बात की. वे बुरी तरह से घबराई हुई हैं."

पीड़ित महिलाएँ बहुत सहमी हुई थीं. सदमा इतना गहरा था और वे बात करने की हालत में नहीं थीं.

प्रीतम कहते हैं, "उन्होंने साहस जुटाकर सुबह एक फैक्टरी मजदूर को उनके साथ हुई घटना के बारे में बताया."

महिलाओं ने बाद में फैक्टरी मालिक को बताया कि वे डर गईं थी कि कहीं उनके पति उन्हें न छोड़ दें. उनके पति प्रीतम सिंह के यहां काम करते हैं और प्रीतम का कहना है कि वह उन मजदूरों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं.

Image caption प्रीतम सिंह

प्रीतम कहते हैं, "वे मेरे कर्मचारी हैं. मैंने उनसे कहा है कि जो कुछ हुआ वो किसी के साथ भी हो सकता था. इसमें उन महिलाओं का कोई दोष नहीं है. इसलिए अपनी पत्नियों को छोड़ने के बारे में सोचें भी नहीं. मुझे लगता है कि वो भी सदमे में हैं."

इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है. पुलिस मौक़े से सबूतों को इकट्ठा करने में जुटी है.

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अभियुक्तों से सबसे पहले टकराने वाले नंद लाल कहते हैं, "वे पुलिस की वर्दी में थे और कहा कि वे पुलिसवाले हैं. वे जानना चाहते थे कि क्या मेरे पास बंदूक है. जब मैंने कहा नहीं तो उन्होंने मुझे मेरी चारपाई से बांध दिया और कमरे में बंद कर दिया. जाने से पहले वो मेरी जेब से 1000 रुपए भी निकाल ले गए. उन्होंने मेरे मोबाइल से सिम कार्ड भी निकालकर फेंक दिया था."

पुलिस जाँच में जुटी अभी कोई गिरफ़्तारी नहीं

सुबह घर पहुँचने के बाद ही नन्हे लाल को पता लगा कि वे पुलिसवाले नहीं थे.

ये दोनों जगहें एक-दूसरे से पाँच मिनट की दूरी पर हैं. मौके पर पहुँचे पुलिसकर्मियों का कहना था कि ये गिरोह शायद इस इलाक़े से बाहर का था. एक पुलिसकर्मी ने कहा, "हम कई पहलुओं की जाँच कर रहे हैं. जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा."

जाँच में 18 छोटी टीमों को लगाया गया है. आसपास के गांवों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

कहा जा रहा है कि इस गांव में इस तरह की ये पहली घटना है. फैक्टरी मैनेजर कंचन सिंह कहते है कि वो 10 साल ये फैक्टरी चला रहे हैं, लेकिन कभी कोई चोरी या हमले की वारदात नहीं हुई. लेकिन अभी वो जितना डरे हुए हैं, उतना पहले कभी नहीं डरे थे.

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