जिस देश में बजता है महिलाओं का डंका

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Image caption शार्लिन कार्टराइट-रॉबिंसन

हिलेरी क्लिंटन भले ही राष्रपति पद का चुनाव हार गईं हों और दुनिया में टॉप सरकारी नौकरियों में भले ही महिलाओं का प्रतिशत कम हो, बीबीसी संवाददाता जेम हैंडी एक ऐसे कैरेबियाई देश पहुंची जहाँ महिलाओं ने इस ट्रेंड को पलट रखा है.

टर्क्स एंड केकॉस नामक ब्रिटेन के इस उपनिवेश में हाल ही में हुए चुनावों में पहली बार एक महिला प्रीमियर चुनी गईं.

शार्लिन कार्टराइट-रॉबिंसन ने ये चुनाव जीता है और इस छोटे से देश में उनकी तरह कई और महिलाएं बड़े ओहदों पर मौजूद हैं.

देश के डिप्टी गवर्नर, अटॉर्नी जनरल, चीफ़ जस्टिस, चीफ़ मजिस्ट्रेट, प्रमुख सरकारी वकील और सात में से पांच प्रमुख सचिव पदों पर महिलाएं हैं.

​​महिलाओं के इस बेहतरीन प्रदर्शन के चलते अब देश में युवा पुरुषों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है जिससे वे महिलाओं की सफलता की बराबरी कर सकें.

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Image caption शिक्षा मंत्री जोज़फ़ीन कॉनली

आम तौर पर महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम करने वाला टर्क्स एंड केकॉस देश का 'जेंडर अफ़ेयर्स डिपार्टमेंट' इन दिनों हाई स्कूल के युवाओं को 'ज़्यादा एकाग्रता से समाज में शीर्ष पदों के लिए मेहनत करने का' प्रोत्साहन दे रहा है.

देश की डिप्टी गवर्नर आन्या विलियम्स ने बताया कि इसमें अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाए जाने से लेकर 'लीडरों वाले समर कैंप' आयोजित करना शामिल है.

सवाल ये है इस देश में महिलाओं ने ये मुकाम कैसे हासिल किया?

ऐतिहासिक चुनाव जीतने वाली देश की प्रीमियर कार्टराइट-रॉबिंसन के अनुसार "इस नौकरी के लिए मैं बेस्ट मैन थी."

पारदर्शिता और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को अपने चुनावी मैनिफेस्टो में रखने वाली कार्टराइट-रॉबिंसन ने 52 दूसरे प्रत्याशियों को हराया है.

उन्होंने बीबीसी से ये भी बताया कि उन्हें महिला के बजाय एक ऐसी इंसान के तौर पर देखा गया जो काम पूरे करने में सक्षम हैं और यही जीत की वजह रही.

कुछ ऐसा ही मानना टर्क्स एंड केकॉस की पहली एटॉर्नी जनरल रोह्न्डली ब्रैथवेट-नॉवेल्स का भी है.

उन्होंने बताया, "मेरे साथ कभी भी किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ. हमारे देश के नागरिक समाज में बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जिनकी अपनी पहचान है, चाहे वो कॉरपोरेट जगत हो या राजनीति. कभी-कभार जब वरिष्ठ पदों पर पुरुष रहते हैं तो उनका ध्यान बंट सकता है लेकिन कुछ समय बाद ये सब ख़त्म हो जाता है."

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Image caption एटॉर्नी जनरल रोह्न्डली ब्रैथवेट-नॉवेल्स

उनके मुताबिक़ इससे ज़्यादा मुश्किल ये रहता है कि वरिष्ठ पदों पर आसीन महिलाओं को अपने परिवार या उनके अपने संदर्भ में सात वर्ष के एक बेटे की परवरिश पर भी बराबर ध्यान देने की ज़रुरत होती है.

एटॉर्नी जनरल रोह्न्डली ब्रैथवेट-नॉवेल्स के मुताबिक़, "क्योंकि महिलाएं बहुमुखी होती हैं इसलिए वे इसे पूरा कर लेतीं हैं."

देश की डिप्टी गवर्नर विलियम्स भी इस बात से सहमत हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "35,000 लोगों की जनसंख्या वाले इस देश में महिलाएं हमेशा से शिक्षा, मेडिसिन, राजनीति और सरकारी क्षेत्र में अग्रसर रही है."

हालांकि इंटरव्यू ख़त्म होने से पहले वे एक चेतावनी भी देती हैं.

"महिलाएं यहाँ पर इतने बड़े पदों पर हैं ये एक बड़ी बात है. लेकिन एक जवान बेटे की माँ होने के नाते मेरा फ़र्ज़ है कि उसे आगे आने वाले मौकों और बड़े ओहदों के लिए मेहनत करने का भरपूर प्रोत्साहन देती रहूँ".

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