चोरी के सामान की ऑनलाइन बिक्री, दो गिरफ़्तार

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बिहार में पटना पुलिस ने चोरी की मोटर साइकिल, मोबाइल फ़ोन और दूसरे सामानों की ऑनलाइन बिक्री के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है.

पटना पुलिस के मुताबिक़ ये सामान फ़ोन बिक्री से जुड़ी वेबसाइट ओएलएक्स पर फ़र्ज़ी कागजात तैयार कर बेचे जाते थे.

इस संबंध में पटना एसएसपी मनु महाराज ने बताया, ''लगातार गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं कि ओएलएक्स के ज़रिए ऐसे सामान फर्ज़ी बिल बनाकर बेचे जा रहे हैं. इन्हीं सूचनाओं के आधार पर मंगलवार क़रीब बारह बजे ऑपरेशन विश्वास के तहत दो लोगों को दानापुर थाने के सगुना मोड़ के पास से गिरफ्तार किया गया.''

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गिरफ्तार अभियुक्तों में पटना जिले के सरोश अख्तर और नालंदा जिले के लवकुश कुमार शामिल हैं.

पुलिस को इनके पास से तीन मोटरसाइकिल, छह मोबाइल, एक-एक कंप्यूटर सेट और प्रिंटर मिला है. इसके साथ 10 हजार रुपए नकद, फ़र्जी वोटर और आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज़ भी बरामद किए हैं.

पुलिस का दावा है कि उसकी टीम सादे लिबास में सगुना मोड़ के आस-पास पहले से मौजूद थी. अभियुक्तों को एक व्यक्ति को ठगने की कोशिश करते ही गिरफ्तार कर लिया गया.

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पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार अभियुक्तों ने बताया है कि बीते एक साल से ऐसा फर्जीवाड़ा किया जा रहा था.

साइबर मामलों के जानकार ज्ञानेश्वर वात्सायन के मुताबिक डिजिटल दौर में ऑनलाइन ख़रीद के पहले सामान के दस्तावेज़ की जानकारियों की पुष्टि ज़रुर कर लेनी चाहिए.

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ज्ञानेश्वर बताते हैं कि वाहनों का विवरण परिवहन विभाग की बेवसाइट और टोल-फ्री नंबर पर आसानी से उपलब्ध है. पुरानी गाड़ियों की ऑनलाइन ख़रीद के पहले बेवसाइट पर दी गई जानकारी का मिलान परिवहन विभाग से मिले विवरण से कर लेना चाहिए.

ज्ञानेश्वर ये सलाह भी देते हैं कि किसी भी हाल में अपने एटीएम कार्ड या ऑनलाइन लेन-देन से जुड़े पासवर्ड और दूसरी जानकारियां मोबाइल में संभाल कर न रखें.

ऐसी वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचना भी ऑनलाइन फर्जीवाड़े से बचने का एक तरीका हो सकता है. उन्होंने बताया कि वेबसाइट्स की रेंटिंग, इसके बारे में यूजर्स फीडबैक की पड़ताल कर यह जांच की जा सकती है.

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