पंजाब में थमा चुनावी शोर, किसका कितना ज़ोर?

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गुरुवार को पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रचार का आख़िरी दिन था. अगर पिछले कुछ हफ्तों पर की घटनाओं पर नज़र डालें तो चुनाव के नतीज़े दिलचस्प आने की उम्मीद है.

मतदान चार फ़रवरी को होगा. इसमें करीब दो करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे.

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पंजाब में कितना फैला है नशे का साम्राज्य

अगली सरकार के चुनाव के लिए 22615 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे. अलग-अलग राजनीतिक दलों के कुल 1145 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.

राज्य की अधिकतर सीटों पर मुक़ाबला बहुकोणीय होने के आसार हैं.

सिर्फ़ गरज कर रह जाएंगे बादल या बरसेंगे भी?

फिर छाएँगे बादल या बढ़ेगा भगवंत का मान ?

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ऐसा लग रहा है कि चुनाव मैदान में उतरी नई पार्टी आम आदमी पार्टी (आप) ने पुरानी पार्टियों शिरोमणी अकाली दल-बीजेपी गठबंधन और कांग्रेस का चुनावी गणित बिगाड़ दिया है.

शिरोमणी अकाली दल-बीजेपी गठबंधन और कांग्रेस के नेताओं की आप के ख़िलाफ़ आक्रमक बयानबाजी इस बात की तस्दीक करती है कि आप से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही है.

ज्यादातर सीटों पर नज़दीकी मुक़ाबला होता दिख रहा है. विरोधी दल की छवि को बिगाड़ने के लिए समर्थकों ने स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग का सहारा लिया.

चुनाव प्रचार के दौरान सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ग़लत ख़बरों और गर्मागर्म बहस की बाढ़ आई हुई है.

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Image caption सुखबीर सिंह अपनी बीवी हरसिमरत कौर के साथ.

इस दौरान जहां सत्तारूढ़ दलों ने अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच लेजाने की भरपूर कोशिश की. वहीं विरोधी दल कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, जन सुरक्षा और नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले पर सरकार की नाकामी को बेनकाब किया.

राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को आटा, चावल, दाल, देसी घी, चीनी, और दूध वगैरह के साथ-साथ लाखों नौकरियां देने का वादा किया है.

राज्य से नशे का कारोबार ख़त्म करने और किसानों की कर्जमाफी की बात भी राजनीतिक दलों ने की.

हालांकि चुनाव प्रचार कमोबेश बड़ी राजनीतिक शख्सियतों के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा.

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अरविंद केजरीवाल को सुनने के लिए भी हज़ारों की भीड़ जुटी. उन्होंने अकाली दल-बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के ऊपर आरोपों की झड़ी लगाई.

उन्होंने तो यहां तक आरोप लगा दिए कि आप को सत्ता में आने से रोकने के लिए राज्य की दोनों विपक्षी पार्टियां गठजोड़ कर चुकी हैं.

वहीं केजरीवाल के ऊपर पार्टी का टिकट बेचने और उग्र सिख संगठनों के साथ मेलजोल रखने के आरोप लगे.

राज्य में पार्टी का चुनाव अभियान पूर्व कॉमेडियन और सांसद भगवंत मान के नेतृत्व में चला.

कहा जा रहा है कि मान ने एक दिन में रिकॉर्ड 29 चुनावी सभाएं कीं.

सत्तारूढ़ अकाली-भाजपा गठबंधन के चुनाव प्रचार की बागडोर अकाली दल के अध्यक्ष और राज्य के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के हाथ में थी.

इस काम में उन्हें अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल का भरपूर साथ मिला. कौर केंद्र सरकार में मंत्री हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री और सुखबीर के पिता प्रकाश सिंह बादल जो एक तरह से चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखी.

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चुनाव का कितना दबाव है इसे एक प्रत्यक्षदर्शी के इस बयान से समझा जा सकता है, "जहां एक ओर भगवंत मान मंच पर लड़खड़ा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर सुखबीर सिंह बादल बड़बड़ा रहे हैं."

प्रत्यक्षदर्शी भगवंत मान के उस घटना की बात कर रहे थे जिसमें वो मंच पर लड़खड़ाते दिखे थे. इसके बाद उनके आलोचकों ने उनकी शराब पीने की कथित आदत को लेकर खिंचाई कर दी थी.

चुनाव प्रचार में सुखबीर सिंह बादल के वीडियो सोशल मीडिया पर तैरते रहे. इनमें वो एक के बाद एक ग़लत करते हुए नज़र आ रहे हैं.

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वहीं कांग्रेस के चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी एक बार फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह के कंधों पर थी. वो प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं.

इसमें उन्हें पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू का साथ मिला जिन्होंने काफी देर से कांग्रेस का दामन थामने का फ़ैसला लिया.

केजरीवाल बुज़दिल है: अमरिंदर सिंह

नवजोत सिंह सिद्धू पूर्वी अमृतसर से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अकाली दल के नेताओं पर जोरदार हमले किए हैं.

सिद्धू और भगवंत मान के तंज कसने का ख़ास अंदाज़ युवाओं को काफी रास आया.

हालांकि ज्यादातर सीटों पर काफी पहले उम्मीदवार घोषित करने का फ़ायदा चुनाव प्रचार अभियान के दौरान आप मिलता दिखा.

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हालांकि कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणा के बाद यह टक्कर काफी दिलचस्प हो गई.

आप ने दिल्ली के विधायक जरनैल सिंह को 89 साल के प्रकाश सिंह बादल के ख़िलाफ़ लांबी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया.

जरनैल 2009 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के ऊपर जूता फेंककर सुर्खियों में आए थे. वो एक पत्रकार के हैसियत से पी चिदंबरम के प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे.

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चुनाव प्रचार के दौरान उस वक़्त हंगामा मच गया जब प्रकाश सिंह बादल पर एक चुनावी सभा में गुरबचन सिंह नाम के एक ग्रामीण ने जूता फेंका.

लेकिन इस चुनाव में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लांबी सीट से चुनाव लड़ने का फ़ैसला लिया.

अमरिंदर को कितनी चुनौती दे पाएंगे जनरल जेजे सिंह

पटियाला राज परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से अमरिंदर को 'महराजा' कहा जाता है.

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कैप्टन अमरिंदर पटियाला से भी चुनाव मैदान में हैं. वहां उनका मुकाबला पूर्व जनरल जेजे सिंह से है.

वहीं भगवंत मान जलालाबाद में सुखबीर सिंह बादल को टक्कर दे रहे हैं. वहां से कांग्रेस ने दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू को मैदान में उतारा है. इससे यह विधानसभा सीट 'स्टार विधानसभा क्षेत्र' में बदल गई है.

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