झारखंड: कस्तूरबा स्कूलों की लड़कियों की मौत पर उठते सवाल

इमेज कॉपीरइट Niraj Sinha

झारखंड में कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय की लड़कियों की जान और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. घटनाओं का सिलसिला तेज है. जांच दर जांच बिठाई जा रही है.

पिछले हफ्ते विधानसभा में भी यह मामला गूंजा था. ताजा घटना हजारीबाग के बड़कागांव स्थित कस्तूरबा स्कूल की है. यहां शनिवार को बारहवीं कक्षा की एक छात्रा ने कथित तौर पर खुदकुशी कर ली.

अब राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट तलब की है. लड़की बड़कागांव थाना क्षेत्र के पलांडू गांव की रहने वाली है. साल 2010 में छठी कक्षा में उसका दाखिला कराया गया था.

हॉस्टल खाली, पढ़ाई ठप्प, छात्राएं दहशत में

'बलात्कार पीड़ित' की मां पर मामला वापस लेने का दबाव

रैगिंगः टॉयलेट क्लीनर पिलाने पर तीन छात्राएं गिरफ़्तार

इमेज कॉपीरइट Niraj Sinha

कस्तूरबा आवासीय स्कूलों में छठी से बारहवीं कक्षा तक की लड़कियों के लिए मुफ्त में पढ़ाई के साथ रहने- खाने और पोशाक की व्यवस्था की जाती है.

यहां आख़िरी कतार में शामिल गांव-गिराव की लड़कियों को दाखिला मिलता है. इनमें आदिवासी, दलित और पिछड़ी समुदाय की तादाद अधिक होती है.

घटना की जानकारी मिलने के बाद लड़की के परिजनों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने स्कूल को देर शाम तक घेरे रखा. स्थानीय लोग लड़की की लाश उठाने नहीं दे रहे थे.

उनका कहना था कि यह आत्महत्या का मामला नहीं है. लोग वॉर्डन की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे. हालांकि प्रशासन और पुलिस की हस्तक्षेप से फिलहाल हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं.

जब 60 साल के मांगिया ने पहली बार पहना जूता

शौचालय का सपना पूरा करतीं ये बेटियां

इमेज कॉपीरइट Niraj Sinha

जाँच पर जाँच

इस बीच, हजारीबाग के उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने अलग से जांच बिठाई है. इनमें ज़िला प्रशासन के तीन लोगों को शामिल किया गया है.

रविशंकर शुक्ला ने बीबीसी को बताया कि छात्रा के शव का पोस्टमॉर्टम मेडिकल बोर्ड से कराया गया है. देर रात पोस्टमॉर्टम की प्रकिया पूरी की गई.

उनका कहना है कि तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने स्कूल जाकर जानकारी हासिल की है. उपायुक्त का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर ये बातें सामने आई हैं कि लड़की की किसी लड़के से बात होती थी. उसे समझाया गया था और उनके घर वालों को भी स्कूल बुलाया जाना था.

वो गोरी मेम जो ब्रिटेन से आकर झारखंड की हो गई

जब एसिड अटैक पीड़िता के घर आई नन्ही परी

पेरिस में झारखंड के गाँवों की महिलाओं का हुनर

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
सूअर बेचकर शौचालय बनवाया

जबकि लड़के के परिजनों ने इन बातों को निराधार बताते हुए उसे मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है.

स्थानीय पत्रकार संजय सागर बताते हैं कि इस घटना की जानकारी मिलने के बाद कई गांवों से दूसरे अभिभावक भी अपनी बेटियों का हाल जानने स्कूल पहुंचते रहे. जबकि स्कूल की लड़कियों के चेहरे पर भय साफ़ देखा जा रहा था.

इस बीच राज्य की शिक्षा सचिव अराधना पटनायक ने बताया है कि कस्तूरबा स्कूल की लड़कियों की काउंसलिंग के लिए 'उड़ान' नाम का प्रोजेक्ट शुरू किया गया है.

प्रोजेक्ट में शिक्षक और वॉर्डन को लड़कियों की भावनात्मक तथा मनोवैज्ञानिक समस्याओं का हल निकालने की ट्रेनिंग दी जा रही है.

सांसें ‘लापता’ हैं, ‘खोज’ जारी है !

'बैंक अनपढ़ लोगों को एटीएम कार्ड नहीं देता'

वो मां जिसे बच्ची की लाश कुत्ते का पीछा करके मिली

इमेज कॉपीरइट Niraj Sinha

गुमला में मौत

पिछले 22 जनवरी को गुमला जिले के बघिमा कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में ग्यारहंवी कक्षा की एक छात्रा ने कथित तौर पर दुपट्टे से झूलकर जान दे दी थी.

तब ये बातें सामने आई थी कि लड़की की तबियत ठीक नहीं थी और उसके चाहने पर भी घर नहीं जाने दिया जा रहा था. हालांकि इस मामले में भी जांच बिठाई गई है.

इस घटना के बाद उसके घर वाले और गांवों के लोगों ने अगले दिन गुमला सिमडेगा नेशनल हाइवे को कई घंटे तक जाम रखते हुए ज़ोरदार हंगामा किया था. परिजनों ने थाने में लिखित तौर पर आवेदन दिया है कि छात्रा की कथित तौर पर हत्या की कई है.

हालात को देखते हुए गुमला के उपायुक्त ने स्कूल को दस दिनों के लिए बंद करने का आदेश दिया. शुक्रवार से स्कूल खुला है, जबकि स्कूल के लेखापाल ( इनके पास तब वार्डन का चार्ज था) को बर्खास्त कर दिया है.

इस बीच, पिछले हफ्ते ही गढ़वा जिले के रंका कस्तूरबा स्कूल की एक नाबालिग आदिवासी छात्रा को खून बहुत ज्यादा बहने की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

ये मामला सुर्खियों में आने के बाद मानव संसाधन विकास विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों से कस्तूरबा स्कूलों की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर जांच के साथ जिम्मेदारी तय करने को कहा है.

इमेज कॉपीरइट Niraj Sinha

गर्भपात

जबकि पिछले साल ही गोड्डा में कस्तूरबा की एक नाबालिग छात्रा के कथित गर्भपात कराने के मामले में दो वॉर्डन को गिरफ्तार किया गया था. लड़की के बयान पर मामला दर्ज किया गया था और तब भी राज्य मुख्यालय से जांच बिठाई गई थी.

हजारीबाग के उपायुक्त बताते हैं कि शिक्षा विभाग के निर्देश के आलोक में चार दिनों पहले ही उन्होंने बड़कागांव समेत अन्य प्रखंडों के स्कूलों में व्यवस्था मुकम्मल करने को अधिकारियों की टीम भेजी थी. और सुरक्षा के सवाल पर भी सभी वार्डनों को ताकीद की गई है.

इससे पहले पिछले दिसंबर महीने में गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड स्थित कस्तूरबा स्कूल की सातवीं कक्षा की एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थतियों में हुई मौत के बाद भी स्थानीय लोगों ने काफ़ी बवाल किया था. तब उग्र भीड़ ने शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों की पिटाई तक कर दी थी.

तलाकी पंचायत के मुखिया श्यामदेव हाजरा कहते हैं कि स्कूलों की व्यवस्था में खामियां हैं इससे लड़कियां अक्सर दबाव में रहती हैं. इनसे कई काम कराए जाते हैं.

इमेज कॉपीरइट Niraj Sinha

इन हालात पर शिक्षा के अधिकार को लेकर झारखंड में काम कर रहे एके सिंह कहते हैं, ''गौर कीजिए, भोजन, कपड़े, किताबें उपलब्ध करा दी जाती हैं और यहीं जिम्मेदारी ख़त्म मान ली जाती है. लगातार होती घटनाओं पर तत्काल जांच बिठा दी जाती है, लेकिन सिस्टम को दुरुस्त करने की कारगर कोशिशें नहीं होती.''

हक़ीकत यह है कि गांवों की लड़कियां किशोर वय की उम्र में मानिसक और नैतिक तौर पर परिपक्व और मजबूत हों, हर परिस्थितियों का सामना कर सकें, इसके लिए व्यवस्था की कमियां हैं. इनके अलावा अधिकतर स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं.

उन्होंने शिक्षा विभाग को इस बारे में एक पत्र भी लिखा था. कई वैसे स्कूल भी हैं जो सुनसान जगह पर हैं. वहां चहारदीवारी और बिजली नहीं हैं. इन घटनाओं से शिक्षा पर सीधा असर पड़ेगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे