पनीरसेल्वम को एआईएडीएमके के कोषाध्यक्ष पद से हटाया गया

पनीरसेल्वम
Image caption जयललिता की समाधि पर पनीरसेल्वम

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने कहा है कि उन्हें विधायक दल के नेता का पद और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया. उनका ये भी कहना है कि उन पर दबाव बनाया गया कि वो शशिकला से मुख्यमंत्री बनने के लिए अनुरोध करें.

पनीरसेल्वम ने कहा, "मेरा मानना है कि किसी ऐसे शख़्स को पार्टी का महासचिव बनाना चाहिए जिसका सम्मान हो. मुख्यमंत्री कोई भी हो सकता है, पनीरसेल्वम का मुख्यमंत्री होना जरूरी नहीं है."

समाचार एजेंसी पीटीआई ने ख़बर दी है कि इस बयान के बाद अन्नाद्रमुक प्रमुख शशिकला नटराजन ने पनीरसेल्वम को पार्टी के कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया है.

प्रदेश में राजनीतिक उठापटक के बीच पनीरसेल्वम जयललिता की समाधि के पास आधे घंटे बैठे रहे. वहां से उठने के बाद मीडिया से उन्होंने ये बातें कही. पनीरसेल्वम का कहना है कि वो किसी ऐसे शख्स को प्रदेश का मुख्यमंत्री और पार्टी का महासचिव बनाना चाहते हैं जो पार्टी को एक रख सके.

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पार्टी और काडर चाहे तो इस्तीफ़ा वापस

हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि जयललिता चाहती थीं कि उनके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम बनें. पनीरसेल्वम का ये भी कहना है कि पार्टी और काडर अगर चाहे तो वो इस्तीफा वापस ले सकते हैं.

विश्लेषकों की राय है कि पार्टी में विभाजन की सुगबुगाहट पहले ही सुनाई दे रही थी, अब पनीरसेल्वम का बयान पार्टी को इसी ओर ले जाता दिख रहा है.

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पनीरसेल्वम के इस्तीफे और शशिकला के मुख्यमंत्री बनने को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में सरगर्मी तेज़ हो गई है. शशिकला को सीएम बनाने को लेकर पार्टी के भीतर कई स्वर उठ रहे हैं. अब इसमें पनीरसेल्वम का भी नाम शामिल हो गया है.

पनीरसेल्वम का कहना है कि "काडर चिंतित हैं, मैं पार्टी को एकजुट रखना चाहता हूं अगर मैं अकेला भी रहा तो पार्टी के सम्मान की रक्षा के लिए काम करूंगा."

अम्मा की आत्मा ने कहा 'सच कहो'

जयललिता के लिए "अतिरिक्त" मुख्यमंत्री रहे पनीरसल्वम ने कहा, "अम्मा की आत्मा ने मुझ से कहा कि कुछ सच्चाइयां कही जानी चाहिए. इसलिए मैं अम्मा की समाधि पर आया."

जयललिता की मौत के तुरंत बाद पनीरसेल्वम ने कहा था कि उन्हें मधुसूदन को पार्टी का महासचिव बनाने के लिए कहा गया. बाद में उऩसे कहा गया कि शशिकला को महासचिव बनाना चाहिए.

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Image caption शशिकला के सीएम बनने पर विवाद

पनीरसेल्वम ने बताया कि उसके तुरंत बाद ही, "मंत्री आर वी उदयकुमार ने एक मुलाक़ात में कहा कि मुझे कुर्सी छोड़ देनी चाहिए और शशिकला को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए. बाद में उन्हें कहा गया कि ऐसे नहीं बोलना चाहिए. सेन्गोत्तियन(पूर्व मंत्री) ने भी इसी तरह का बयान दिया. इसलिए मैंने उन्हें बुलाया और कहा कि ऐसा करने से पार्टी की एकता को नुकसान होगा. मैंने पूछा कि आप मुझे सार्वजनिक रूप से बुरा भला क्यों कह रहे हैं."

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पनीरसेल्वम ने ऐसे वक्त में बयान दिया है जब गवर्नर चेन्नई से बाहर हैं और शशिकला को पार्टी के प्रस्ताव के मुताबिक मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी है. पार्टी का ये प्रस्ताव पहले ही राजभवन भेजा जा चुका है.

जयललिता के वफ़ादार रहे पनीरसेल्वम

पनीरसेल्वम तमिलानाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के ख़ास वफ़ादार रहे हैं. अपने जीवनकाल में जब भी जया मुश्किल में रहीं तब उन्होंने पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी. जयललिता के निधन के बाद भी पनीरसेल्वम को ही मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी.

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Image caption जया के ख़ास वफादार रहे हैं पनीरसेल्वम

शशिकला नटराजन भी जयललिता की ख़ास रही हैं. हालांकि जया के जीवन में वह सक्रिय राजनीति से दूर ही रहीं. जया ने उन्हें पार्टी में भी कोई जिम्मेदारी नहीं दी थी. जया के निधन के बाद शशिकला सक्रिय हुईं. पहले उन्होंने एआईएडीमके की कमान अपने हाथों में ली. रविवार को वह विधायक दल की नेता भी बन गईं. इसके बाद पनीरसेल्वम ने इस्तीफा दे दिया और पार्टी ने औपचारिक रूप से शशिकला को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर दी.

दूसरी तरफ जयललिता की भतीजी दीपा जयकुमार ने शशिकला को सीएम बनाए जाने की घोषणा की आलोचना की है. चेन्नई में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में शशिकला की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि शशिकला को पार्टी की तरफ से विधायक दल का नेता चुना जाना काफी दुखद है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता ने शशिकला को वोट नहीं किया था.

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