2040 तक अमरीका को पछाड़ देगा भारत

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption 90 के दशक के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज़ी से विकास हुआ

2040 तक दुनिया बहुत अलग होगी. इतनी अलग कि अमरीका दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्था नहीं रह जाएगा.

उसकी जगह होगा - भारत.

ये भविष्यवाणी की है अंतरराष्ट्रीय कन्सल्टेन्सी प्राइसवाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) ने.

2016: कैसी होगी भारत-चीन की आर्थिक स्थिति?

चीन की मंदी से भारत पर भी पड़ेगा असर?

चीन होगा नंबर वन

पीडब्ल्यूसी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि दो दशक के भीतर केवल चीन ऐसा देश रहेगा जिसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) भारत से ज़्यादा होगा.

रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2050 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था औसतन औसतन 4.9% के विकास दर से आगे बढ़ेगी.

इस हिसाब से विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी वर्तमान के 7% से बढ़कर 15% हो जाएगी.

मगर इससे पहले 2040 में ही भारतीय अर्थव्यवस्था अमरीका से आगे निकल जाएगी - ये कैसे संभव है? जबकि भारत में ग़रीबी का स्तर अभी भी बहुत ज़्यादा समझा जाता है.

"भारत अभी दहाड़ता शेर नहीं है"

'वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भारत बेहतर'

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption भारत में मध्यवर्ग का तेज़ी से विस्तार हुआ

विशाल आबादीका असर

एक हिसाब से सोचें तो जवाब बड़ा आसान है - भारत की विशाल आबादी ख़ुद ही अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएगी.

भारत की आबादी अभी लगभग सवा अरब (1.25 अरब) है, जो अगले दो दशक में बढ़कर एक अरब साठ करोड़ (1.6 अरब) तक पहुँच जाएगी.

ये 35 करोड़ की वृद्धि अभी की अमरीकी आबादी के बराबर है.

और इससे जो बाज़ार बनेगा, उससे अर्थव्यवस्था का आकार भी बढ़ेगा.

मगर पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट का कहना है कि भारत के उस स्तर तक के विकास में आबादी का योगदान बहुत कम रहेगा.

रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी प्रगति के कारण जो उत्पादकता बढ़ेगी उसका योगदान ज़्यादा बड़ा होगा.

इमेज कॉपीरइट AFP

चीन और भारत

भारत जिस तेज़ी से तरक्की कर रहा है वो बहुत कुछ चीन की याद दिलाता है.

दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्थाएँ सरकारी नियंत्रणों के कारण लंबे समय तक सुस्त चाल से चलती रहीं, मगर 90 के दशक में दोनों ही ने तेज़ी पकड़ी.

चीन एक बड़ी मैनुफ़ैक्चरिंग महाशक्ति बन गया.

और भारत सर्विसेज़ की दुनिया का सितारा, ख़ासतौर से इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की दुनिया में भारत का डंका बजने लगा.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption चीन से अलग भारत में राजनीति लोकतंत्र से चलती है

लोकतंत्र की भूमिका

ऐसा कहा जाता है कि भारत और चीन की राजनीतिक व्यवस्थाओं के अंतर से भारत को चीन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदा हो सकता है.

कुछ वर्षों तक कहा जाता रहा कि चीन में जैसी निरंकुश सत्ता है, उससे सरकार बिना अधिक विरोध के बड़े काम करवा सकती है.

उससे अलग भारत में संसदीय लोकतंत्र है, जिससे सहमति बनाना उतना आसान नहीं होगा.

मगर नए दौर में जो विकास हो रहा है वो बहुत कुछ लोगों के व्यक्तिगत प्रयासों पर निर्भर करता है. और भारत का शासन चूँकि क़ानून के राज और लोकतंत्र को महत्व देता है, इसलिए वहाँ निजी निवेशकों के लिए परिस्थितियाँ बेहतर हैं.

इसलिए कई मानते हैं, कि अगले ऐपल का उदय, अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन करनेवाली कंपनी, चीन की जगह भारत में होगा.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है भारत

अमरीका की मुश्किलें

तो एक शताब्दी तक दुनिया की अर्थव्यवस्था पर राज करनेवाली अमरीकी अर्थव्यवस्था तीसरे नंबर पर कैसे पहुँच जाएगी?

पिछली एक शताब्दी में अमरीका जैसे देश भारत से छह गुना कम आबादी होने के बावजूद ज़्यादा उत्पादन करते रहे.

मगर समय बदलने के साथ जैसे-जैसे आधुनिकता आती गई, ये बदलने लगा, और एशियाई देश आगे निकलने लगे.

पर ध्यान रखना होगा कि कई बार किसी अप्रत्याशित घटना से सब बदल जाता है.

60 के दशक में कई लोग कहा करते थे कि सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था अमरीका को पछाड़ देगी.

फिर 80 के दशक में ऐसे भी दावे हुए कि जापान कुछ ही सालों में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.

मगर वित्तीय संकट ने पूरे 90 के दशक में जापानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ी, वहीं राजनीति बदलने से सोवियत संघ का ही विघटन हो गया.

ऐसे में किसी बदलाव से 2040 की दुनिया की तस्वीर भी पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में सुझाई गई तस्वीर से बिल्कुल अलग हो सकती है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे