इन जज साहब से सुप्रीम कोर्ट और सरकार परेशान

कोलकाता हाई कोर्ट

दलित होने के नाते प्रताड़ना का शिकार होने का आरोप लगाने वाले कोलकाता हाई कोर्ट के जज सीएस करनन एक बार फिर मुश्किलों में हैं.

इस बार उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अवमानना का नोटिस मिला है. कुछ दिनों पहले करनन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था.

करनन ने प्रधानमंत्री को 20 जजों की सूची दी है, जिन पर उन्होंने 'भ्रष्टाचार' का आरोप लगाया है.

इमेज कॉपीरइट Twitter
Image caption जस्टिस सीएस करनन

अवमानना के नोटिस पर 13 फ़रवरी को सुनवाई तय की गई है और न्यायमूर्ति करनन को सुनवाई के दौरान हाज़िर होने को कहा गया है.

प्रधानमंत्री को लिखे गए इस पत्र का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अवमानना का नोटिस जारी करते हुए यह भी कहा है कि वो अपनी सभी फाइलें कोलकाता हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को सौंप दें.

अवमानना की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यों वाली खंडपीठ करेगी जिसका नेतृत्व भारत के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर करेंगे.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

न्यायमूर्ति करनन का विवादों से सामना होता रहा है.

मद्रास हाई कोर्ट में पदस्थापित न्यायमूर्ति करनन का जब कोलकाता हाई कोर्ट तबादला हुआ तो उन्होंने ख़ुद ही इस पर रोक लगा ली. इतना ही नहीं उन्होंने अपने चीफ़ जस्टिस को ही नोटिस जारी कर दिया था.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और फ़रवरी 2016 के बाद दिए गए उनके सभी निर्देशों पर रोक लगा दी गयी. फिर राष्ट्रपति के निर्देश के बाद उन्होंने कोलकाता हाई कोर्ट में अपना पदभार संभाला.

मद्रास हाई कोर्ट का जज रहते हुए न्यायमूर्ति करनन ने सबको अचंभे में तब डाल दिया था, जब उन्होंने अपने साथी जजों को गाली देने का आरोप लगाया था. उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति के राष्ट्रीय आयोग में जजों के ख़िलाफ़ शिकायत भी की थी.

इमेज कॉपीरइट AP

उन्होंने एक जज पर जूते से छूने का आरोप भी लगाया था.

यह आरोप उन्होंने अपने चेंबर में संवाददाता सम्मलेन आयोजित कर लगाया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ जजों का भेदभाव इसलिए हो रहा था क्योंकि वो एक दलित हैं.

न्यायमूर्ति करनन एक बार फिर चर्चा में तब आए, जब उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि दो वयस्कों के बीच अगर शारीरिक संबंध हो तो उन्हें पति-पत्नी के रूप में देखा जाना चाहिए.

अवमानना की सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, कुरियन जोसफ़, राजन गोगोई, जे चमलेश्वर, मैदान लोकुर और पीसी घोष हैं.

वहीं भारत के महाधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी सुप्रीम कोर्ट से न्यायमूर्ति करनन की गतिविधियों का संज्ञान लेने का अनुरोध किया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे