और कितनी देर है शशिकला के शपथग्रहण में

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Image caption एआईएडीएमके ने 5 फ़रवरी को शशिकला को अपना नेता चुन लिया था.

तमिलनाडु में सत्ताधारी एआईएडीएमके पार्टी ने वीके शशिकला को रविवार को ही सदन का नेता चुन लिया था. लेकिन तीन बीत जाने के बाद भी राज्यपाल विद्यासागर राव ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं दिलाई है.

इसे लेकर अब राज्यपाल की भी आलोचना हो रही है. आमतौर पर मुख्यमंत्री को शपथ कुछ ही घंटों में दिला दी जाती है या यदि उम्मीदवार ही किसी वजह से देरी न करे तो अधिकतम 48 घंटों के भीतर शपथ दिला दी जाती है.

लेकिन शशिकला को शपथ दिलाने में हो रही देरी पर अब सिर्फ़ राजनीतिक जगत ही नहीं बल्कि क़ानून जगत में भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बीबीसी हिंदी को बताया कि ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है जिसके तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने में देरी कर सकते हों.

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Image caption ओ पनीरसेल्वम का कहना है कि उनसे इस्तीफ़ा ज़बरदस्ती लिया गया है.

जानबूझकर हो रही है देरी?

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजय हेगड़े के मुताबिक़, "यदि हालात और ख़राब हुए तो कोई मुख्यमंत्री को शपथ दिलवाने के लिए अदालत भी जा सकता है क्योंकि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि देरी जानबूझकर की जा रही है."

शशिकला को पांच फ़रवरी को विधानसभा दल का नेता चुना गया था और मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के इस्तीफ़े के साथ ज़रूरी दस्तावेज़ विधायकों की बैठक के कुछ ही देर बाद राजभवन भिजवा दिए गए थे.

राज्यपाल राव चेन्नई में नहीं थे लेकिन राजधानी आने के बजाए वो कोयंबटूर से सीधी उड़ान पकड़ कर दिल्ली पहुंच गए और फिर वहां से मुंबई पहुंचकर राजभवन चले गए.

वे महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं और तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाए सवाल

राजनीतिक संकट को निपटाने के लिए तमिलनाडु पहुंचने में हो रही उनकी देरी पर न सिर्फ़ कांग्रेस बल्कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी सवाल उठा रहे हैं.

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Image caption जयललिता की मौत के बाद से ही शशिकला के मुख्यमंत्री बनने के कयास लगाए जा रहे थे.

इसी बीच ओ पनीरसेल्वम ने भी शशिकला के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया है. कांग्रेस और सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि राज्यपाल शशिकला के ख़िलाफ़ पनीरसेल्वम को विधायकों में समर्थन जुटाने के लिए समय देने के लिए देरी कर रहे हैं.

इसी बीच पनीरसेल्वम ने कहा है कि उनसे ज़बरदस्ती इस्तीफ़ा लिया गया और नेता के रूप में शशिकला का नाम लेने के लिए कहा गया.

उन्होंने कहा कि वो अपना इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए तैयार हैं.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राजू रामाचंद्रन कहते हैं, "राज्यपाल और देरी नहीं कर सकते हैं. पार्टी के विधायकों ने शशिकला को अपना नेता चुन लिया है ऐसे में राज्यपाल के पास उन्हें शपथ दिलाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है."

कुछ वकीलों का मानना है कि राज्यपाल शशिकला के आय से अधिक मामले में अगले सप्ताह आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले तक का इंतज़ार कर सकते हैं.

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क्या करेगा सुप्रीम कोर्ट

वहीं राजू रामाचंद्रन इससे इत्तेफाक नहीं रखते.

उन्होंने कहा, "अदालत ने फ़ैसले की तारीख़ तय नहीं की है. फ़ैसला एक या दो सप्ताह के भीतर आ सकता है. लेकिन सिर्फ़ ये धारणा कि सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के फ़ैसले को पलट देगा, लोकतंत्र में शपथग्रहण में देरी का आधार नहीं हो सकती. हम ये देख रहे हैं कि संवैधानिक रूप से क्या सही है."

हेगड़े कहते हैं, "यदि उन पर अपराध सिद्ध होता है तो उनके मुख्यमंत्री बने रहने का कोई सवाल ही नहीं है. लेकिन कोई ये अनुमान नहीं लगा सकता है कि अदालत क्या करेगी और क्या नहीं. सुप्रीम कोर्ट भी अपने फ़ैसले में देरी कर सकता है क्योंकि वह राजनीतिक विवाद में पड़ना नहीं चाहेगा. जल्लीकट्टू के मामले में भी अदालत ने यह कहकर फ़ैसला टाल दिया था कि वो अपनी निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है."

हेगड़े कहते हैं कि शपथग्रहण में हो रही देरी के कारण विधायकों की राष्ट्रपति के सामने परेड लगवाने का भौंडा प्रदर्शन भी किया जा सकता है जबकि वास्तव में ये मामला तमिलनाडु विधानसभा के पटल पर ही निबट सकता है.

ये सब शशिकला को शपथ दिलाए जाने में की जा रही देरी की वजह से ही होगा.

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