BBC IMPACT: 54 साल बाद चीन लौटे वांग

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54 साल बाद चीनी सैनिक की वतन वापसी

भारत में 54 साल से फंसे पूर्व चीनी सैनिक वांग छी शनिवार को चीन पहुंच गए हैं. उनके साथ उनके बेटे और बेटी भी चीन पहुंचे हैं.

इससे पहले वांग छी ने दिल्ली एयरपोर्ट पर बीबीसी हिंदी से बात की.

वांग छी से जब पूछा गया कि वो तिरोड़ी गांव के लोगों से क्या कहेंगे तो उन्होंने कहा, "तुम लोग अफ़सोस मत करो, मैं बिल्कुल वापस आ जाऊंगा. मैं अपनी जन्मभूमि देखकर वापस आ जाऊंगा. वहां जाकर मुझे संतोष और ख़ुशी मिलेगा."

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें उम्मीद थी कि वो कभी चीन जा पाएंगे? वांग छी ने कहा, "मैंने इंदिरा गांधी के समय दरख़्वास्त की थी कि या तो मुझे चीन भेज दो या भारत का नागरिक बना दो. मैंने हज़ारों अर्ज़िया लगाईं लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. मैंने हाई कोर्ट में केस भी किया. चीन के राजदूत से संपर्क भी किया लेकिन कोई मदद नहीं मिली."

54 साल से भारत में फँसा चीनी सैनिक

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Image caption मध्य प्रदेश के बालाघाट ज़िले का तिरोड़ी गांव था वांग छी का घर

बीबीसी का शुक्रिया करते हुए कहा, "बीबीसी के खरे साब को कहीं से मालूम हो गया. मेरी स्टोरी सुनी तो उन्हें बहुत दुख हुआ और वो मेरे घर आए. मेरी पूरी कहानी सुनी और छापी. उसके बाद पूरे संसार को पता चल गया. सरकार को भी लगा कि इस आदमी को ज़रूर भेजो. इससे हमारी चीन जाने की उम्मीदें ताज़ा हो गईं."

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पूर्व चीनी सैनिक वांग छी से बीबीसी की बातचीत

आप चीन के पासपोर्ट के साथ जा रहे हैं, अब वापस कैसे लौटेंगे? इस पर वांग ने कहा, "भारत सरकार ने जाने की परमिशन दी है और कहा है कि तुम्हारा जाना ख़ुशी की बात है. तुम जा सकते है और आ सकते हो और आने के बाद फिर जा सकते हो."

Image caption वांग छी 54 साल पहले भटकते हुए भारत में दाख़िल हो गए थे और तब से यहीं फंसे थे.

जब उनसे पूछा गया कि आप अपनी पत्नी सुशीला को क्यों नहीं ले जा रहे हैं तो उन्होंने कहा, "उनकी तबीयत अभी ठीक नहीं है, हवाई जहाज़ में नहीं बैठ सकती हैं."

भारत के लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने कहा, "मेरी जाने की इच्छा नहीं है. मुझे उस जगह से प्रेम हो गया है. सब भाई-बहन जैसे हैं. लेकिन वहां भी मेरे भाई-बहन है. मां-पिता तो गुज़र गए. अब चाहता हूं कि भाई-बहनों से ही एक बार मिल लूं."

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1962 की लड़ाई के बाद वांग छी भारत में पकडे गए थे और फिर कभी चीन नहीं जा सके.

वांग छी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी शुक्रिया अदा किया. राज्यसभा सांसद तरुण विजय वांग छी से मिलने एयरपोर्ट पहुंचे थे.

उन्होंने कहा, "इससे बढ़कर दुनिया में मानवीय मूल्यों की कोई विजय नहीं हो सकती. ये भारत-चीन संबंधों में मैत्री की सर्वश्रेष्ठ कथा है. मैं इन्हें भारतीय जनता की ओर से शुभकामनाएं देने आया हूं. ये एक महान घर वापसी है. इसकी सुगंध हमेशा भारत-चीन संबंधों में रहेगी."

वांग छी ने कहा कि मैं चीन एयरपोर्ट पहुंचते ही अपनी भाषा में बात करूंगा.

आइए जानते हैं वांग छी के जीवन के बारे में 10 बातें

  • वांग छी के मुताबिक 1963 में वो ग़लती से भारत में घुस गए और पकड़े गए, उधर भारतीय अधिकारियों के अनुसार वो भारत में बिना कागज़ात के घुसे. वांग छी जासूस होने के आरोपों से इनकार करते हैं.
  • वांग छी विभिन्न जेलों में छह से सात साल रहे और उसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश के एक गांव तिरोड़ी में छोड़ दिया गया
  • वहां उन्होंने एक आटे की चक्की पर काम करना शुरू किया.
  • 1975 में उन्होंने 'दबाव' में सुशीला से शादी की.
  • परिवार से दूरी के कारण वो घंटों रोते थे और परिवार को याद करते थे.
  • 80 के दशक में पहली बार पत्रों के माध्यम से चीन में परिवार के साथ उनका संपर्क हुआ.
  • 40 साल में पहली बार 2002 में फ़ोन पर उनकी बात उनकी मां से हुई. 2006 में उनकी मां की मृत्यु हो गई.
  • उनके एक बेटा और दो बेटियां हैं.
  • वांग छी के मुताबिक़ उन्होंने मदद के लिए सभी को पत्र लिखे लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की.
  • बीबीसी में कहानी छपने के बाद चीनी दूतावास के अधिकारी उनसे मिलने उनके गांव गए थे और मदद का भरोसा दिलाया था.

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