ELECTION SPECIAL: नहीं पता पिताजी क्या करेंगे: अखिलेश यादव

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
खाने की मेज़ पर अखिलेश और डिंपल क्या चर्चा करते हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीबीसी हिंदी से हुई एक ख़ास बातचीत में कहा कि वे चाहते हैं कि पिता मुलायम सिंह उनके लिए चुनाव प्रचार करें.

हालांकि अखिलेश ने ये भी कहा कि ये फ़ैसला नेताजी यानी मुलायम सिंह ही करेंगे.

अखिलेश यादव ने ये बात इस सवाल के जवाब में कही कि मुलायम ने चाचा शिवपाल यादव के चुनाव क्षेत्र में जाकर प्रचार शुरू कर दिया है.

इमेज कॉपीरइट AFP

यूपी चुनाव के पहले चरण में 63 फ़ीसद मतदान

यूपी की वो महिलाएं जिनके सामने किला जीतने की चुनौती

मुलायम का फ़ैसला

उन्होंने कहा, "मैं तो चाहता हूँ नेताजी मेरी कैम्पेन में चलें, लेकिन आख़िरकार तय तो उन्हें ही करना है. नहीं पता क्या करेंगे, किन विधानसभाओं में जाएंगे, ये भी वही तय करेंगे. उनके आशीर्वाद से ही यहाँ तक पहुंचे हैं. मैं समझता हूँ उनका आशीर्वाद इस चुनाव में भी मिलेगा."

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से बीबीसी हिंदी की ख़ास बातचीत

लेकिन अखिलेश ने बार-बार इस बात को दोहराया कि 'अगर सपा सरकार दोबारा बनती है तो सबसे ज़्यादा खुश नेताजी ही होंगे.'

पिछले करीब दो महीने से समाजवादी पार्टी की भीतरी राजनीति ने देश भर में सुर्खियां बटोरी हैं.

क्या सोच कर मतदाता डालेंगे वोट ?

यूपी में मुस्लिम वोटों को लेकर घमासान

पारिवारिक घमासान

जहाँ मुलायम सिंह के छोटे भाई और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री शिवपाल यादव ने अखिलेश का विरोध किया है तो रामगोपाल यादव अखिलेश के समर्थन में खुल कर सामने आए हैं.

Image caption उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से बातचीत करते बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव.

पार्टी में रामगोपाल समेत कई बड़े नेताओं के कई बार निष्कासन हुए और फिर वापस भी लिए गए.

जानकारों की राय रही है कि चुनावों के ठीक पहले हुए इस पारिवारिक घमासान का नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है.

'गूगल पर सबसे ज़्यादा चुटकले कांग्रेस नेता के हैं'

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
सुनिए - मुलायम कुनबे का संघर्ष

यूपी में मतदान

खुद अखिलेश यादव ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा, "समय और भाग्य पर किसी का बस नहीं है. जो होना था शायद वो निश्चित समय पर हुआ, लेकिन अब हम लोग उन चीज़ों से दूर हो गए हैं."

अखिलेश यादव को ये भी लगता है कि 'शायद जनता भी इससे ऊपर उठ कर ये सुनना या जानना चाहती है कि समाजवादी पार्टी ने विकास कितना किया.'

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए कई चरणों का मतदान शुरू हो चुका है और नतीजे 11 मार्च को आएंगे.

'काम भले ना किया, पर नाज़ है अपने नेता पर'

सीएम उम्मीदवार

जहाँ भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में किसी सीएम उम्मीदवार को न उतारने का फ़ैसला लिया, वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की तरफ़ से अखिलेश और मायावती की दावेदारी है.

चुनावों के ठीक पहले कांग्रेस ने भी समाजवादी पार्टी से सीटों को लेकर गठबंधन कर सबको थोड़ा हैरानी में डाल दिया था.

बीबीसी ने अखिलेश यादव से पूछा कि इन बातों में कितनी सच्चाई है कि इस गठबंधन का फ़ायदा शायद कांग्रेस को पहुंचे?

मायावती पर मुसलमानों को कितना भरोसा?

धर्मनिरपेक्ष वोट

अखिलेश ने कहा, "सवाल ये नहीं कि किसे ज़्यादा फ़ायदा होगा और किसे कम. मुद्दे की बात ये है कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी सरकार दोबारा बनेगी और कांग्रेस के साथ गठबंधन से."

हाल ही में कई मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने मुसलमानों से बहुजन समाज पार्टी के लिए वोट करने की अपील की थी.

पूछे जाने पर कि इससे सपा को कितना नुकसान होगा, अखिलेश कहते हैं, "नुकसान बसपा को ही होगा क्योंकि वो भाजपा के साथ पहले रह चुकी है और धर्मनिरपेक्ष लोग हमारे साथ हैं."

जानिए मोदीजी अपने भाषणों में पंच कैसे लाते हैं?

अब 'विकास' का फ़ुलफ़ॉर्म बताया मोदी ने

इमेज कॉपीरइट AFP

करीब 15 मिनट तक चली बातचीत के दौरान मैंने उनसे पूछ ही लिया कि पत्नी डिंपल यादव अलग कैम्पेन कर रही हैं और वे अलग, ऐसे में शाम को खाने की मेज़ पर बातचीत क्या होती है?

मुस्कुराते हुए अखिलेश का जवाब था, "ज़ाहिर है हम एक दूसरे से पूछते हैं कि तुम्हारी चुनावी सभा कैसी रही."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)