खजांची नाथ बढ़ाएगा अखिलेश का वोट बैंक?

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में एक नवजात मुद्दा बन गया है.

दो महीने 11 दिन का खजांची नाथ अधिकतर समय सोता रहता है. भूख लगने पर जागता है. उसे गोद में रहना काफी पसंद है.

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चुनावी रैलियों में केंद्र सरकार की पांच सौ और एक हज़ार रुपए के पुराने नोटों पर पाबंदी लगाने के फ़ैसले की आलोचना करते हुए वो खजांची का नाम लेते हैं. वो कहते हैं कि नोटबंदी से सबसे अधिक ग़रीब प्रभावित हुए हैं.

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खजांची का जन्म दो दिसंबर को उस समय हुआ था, जब उनकी माँ सर्वेशा देवी पैसे निकालने के लिए बैंक की कतार में खड़ी थीं.

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सरदारपुर गांव की निवासी सर्वेशा देवी कहती हैं, ''पैसे निकालने झिंझक स्थित बैंक की शाखा जाने के लिए उस दिन मैं सुबह नौ बजे घर से निकल गई थी.''

पांच बच्चों की मां 35 साल की सर्वेशा देवी की गर्भावस्था के अंतिम दिनों में थी. बैंक उनके घर से तीन किमी दूर है. इस दूरी को उन्होंने अपनी सास शशि देवी और बड़ी बेटी 10 साल की प्रीति के साथ पैदल तय किया था.

सर्वेशा देवी का परिवार बैगा नाम की एक जनजाति में आता है, जो देश के सबसे ग़रीब और वंचित समुदायों में एक है.

उनके पति संपेरा थे. पिछले साल अगस्त में टीबी से उनकी मौत हो गई थी.

कुछ महीने पहले सर्वेशा देवी का चयन ग़रीबों को मिलने वाले घर के लिए हुआ था. वो 20 हज़ार रुपए निकालने के लिए बैंक गई थीं.

सुबह 10 बजे जब बैंक खुला तो वो पैसे के लिए लगी कतार में खड़ी हो गईं.

वो कहती हैं, '' वहां सैकड़ों लोग थे. महिलाओं के लिए एक अलग कतार तो थी. लेकिन वह भी बहुत लंबी थी. दर्जनों महिलाएं मेरे आगे और दर्जनों मेरे पीछे थीं.''

दोपहर में उन्हें दबाव महसूस हुआ और दर्द शुरू हो गया.

शशि कहती हैं, '' हमने बैंक अधिकारियों से गुज़ारिश की कि हमें हमारा पैसा जल्दी दे दें जिससे हम यहां से जा सकें.''

वो कहती हैं, ''मैंने उनसे कहा कि मेरी बहू गर्भवती है और उसे दर्द शुरू हो गया है. लेकिन उन्होंने हमारी अपील पर ध्यान नहीं दिया. उनका कहना था कि हर कोई इस तरह के बहाने बनाता है. इतने में उसका पानी निकलना शुरू हो गया. वह बहुत शर्मिंदा थी.''

उन्हें लगा कि समय बर्बाद नहीं करना चाहिए. वो अपनी बहू को बैंक की सीढियों के एक कोने में ले गईं. प्रीति ने अपनी मां की शाल से ही वहां पर्दा किया. इसके कुछ मिनट बाद ही बच्चा बाहर आ गया.

सर्वेशा देवी कहती हैं, ''अगर मेरी सास वहां नहीं होतीं तो, मैं मर जाती.''

शशि देवी बच्चे पैदा कराने के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं. लेकिन इस मामले में वो नौसिखिया भी नहीं है. उनके एक दर्जन से अधिक पोते-पोतियां हैं. उनमें से अधिकांश को उन्होंने ही पैदा कराया है. इसमें सर्वेशा देवी के सभी बच्चे भी शामिल हैं.

वो कहती हैं, ''मैं बहुत गुस्से में थी. मैंने बैंक अधिकारियों से थोड़ा सहानुभूति दिखाने की अपील की. मेरी बहू ने तुरंत ही एक बच्चे को जन्म दिया था. मैंने कहा कि लोग कतार में मर भी सकते हैं.''

शशि देवी कहती हैं कि इसके बाद बैंक अधिकारियों ने उन्हें उनका पैसा दिया, जिसे वो निकालने आई थीं. खाता सर्वेशा के नाम पर था, इसलिए बैंक अधिकारियों ने उनके अंगूठे का निशान लिया और पैसा मुझे दे दिया.

बैक के शाखा प्रबंधक एसके चौधरी कहते हैं कि बैंक कर्मचारियों को बच्चे के पैदा होने के पहले तक इस बात का आभास नहीं था कि मामला कितना गंभीर है.

वो कहते हैं, ''बैंक में सैकड़ों लोग थे. बहुत भीड़ थी. आप लोगों के केवल सिर ही देख सकते थे.''

उन्होंने बताया, ''हममें से किसी के पास यह जानने का कोई जरिया नहीं था कि भीड़ में एक गर्भवती महिला भी है, जो बच्चे को जन्म देने वाली है.''

बैंक मैनेजर ने बताया कि जैसे ही उन्हें इसकी जानकारी मिली वो उस परिवार को देखने गए. यह देखकर वो तनावमुक्त हो गए कि मां और बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं.

उन्होंने एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने बहुत से सवाल पूछे. इसलिए पुलिस को इसकी सूचना दी गई.

पुलिस तुरंत आ गई और वो सर्वेशा देवी और उनके बच्चे को नज़दीक के एक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गई. वहां एक डॉक्टर ने उनकी जांच की. बाद में पुलिस वैन में उन्हें उनके घर पहुंचाया गया.

स्थानीय पत्रकार रमाकांत गुप्त, उन संवाददाताओं में शामिल थे, जो सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे थे. वो कहते हैं कि सर्वेशा देवी ने जो साहस दिखाया, उससे वो बहुत प्रभावित हुए.

वो कहते हैं, '' बच्चे को जन्म देने के तत्काल बाद सर्वेशा देवी पुलिस जीप में बैठने के लिए चलकर गईं. मैं उनके साहस को सलाम करता हूं.''

चूंकि बच्चे का जन्म बैंक में हुआ था, इसलिए ग्राम प्रधान ने उसका नाम खजांची नाथ रखने का सुझाव दिया.

सर्वेशा देवी हंसते हुए कहती हैं, '' हमने कोई नाम तय नहीं किया था, इसलिए हम इस पर सहमत हो गए.''

बड़े नाम वाला यह छोटा सा बच्चा अपने परिवार के लिए भाग्य भी लेकर आया. उसके एक महीने का होने से पहले ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसकी माँ को दो लाख रुपए का पुरस्कार देकर सम्मानित किया.

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अखिलेश के विरोधी उनके इस क़दम को विधानसभा चुनाव में वोट हथियाने के लिए उठाया गया क़दम बताते हैं. लेकिन खजांची का परिवार इस बात से खुश है कि उनका बच्चा दुनिया भर में मशहूर हो गया है.

सर्वेशा कहती हैं, ''मुख्यमंत्री ने मुझसे खजांची का अच्छे से ख्याल रखने को कहा है. मैंने उनसे इसका वादा किया है.''

वो कहती हैं, ''मैं चाहती हूं कि वह स्कूल जाए, अच्छी शिक्षा हासिल करे और नौकरी पाए. ये हमारे ख़्वाब है. लेकिन यह उसकी किस्मत पर है.''

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