BBC IMPACT: परदेस में कैसे कटी वांग की आधी सदी

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वांग छी: भारत चीन की दोस्ती ही है कि घर आ सका

वर्ष 1962 में भारत-चीन के बीच लड़ाई हुई थी. लड़ाई तो थोड़े समय बाद ख़त्म हो गई, लेकिन एक शख्स ऐसे थे जिनका संघर्ष उसी समय शुरू हुआ और 54 साल तक लगातार जारी रहा.

वांग छी एक चीनी सैनिक थे जो 1963 में कथित रूप से भारत की सीमा में ग़लती से दाखिल हो गए थे.

उन्हें पकड़ लिया गया. कई साल जेल में गुज़ारे और फिर मध्य प्रदेश के एक गांव में छोड़ दिए गए. उन्होंने चीन लौटने के लिए बहुत संघर्ष किया. दर्जनों चिट्ठियां लिखीं.

लेकिन सब बेअसर रहीं. मजबूरी में भारत में बस गए वांग छी ने शादी की, बच्चे हुए, लेकिन वतन लौटने की आस बरकरार रही.

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मैंने जब वांग छी की कहानी बीबीसी पर की तो भारत और चीन की सरकार हरकत में आई और वो अपने देश जाकर परिजनों से मिल सके. आइए जानते हैं वांग की पूरी कहानी संक्षेप में.

वांग छी की कहानी

  • वांग छी के मुताबिक 1963 में वो ग़लती से भारत में घुस गए और पकड़े गए. उधर भारतीय अधिकारियों के अनुसार वो भारत में बिना कागज़ात के घुसे.
  • वांग छी जासूस होने के आरोप से इनकार करते हैं.
  • वांग छी विभिन्न जेलों में छह से सात साल रहे और उसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश के एक गांव तिरोड़ी में छोड़ दिया गया.
  • वहां उन्होंने एक आटे की चक्की पर काम करना शुरू किया.
  • उन्हें लगातार घर की याद आती थी और घर की याद में वे बहुत रोते थे, सोचते थे कि वो कहाँ फँस गए हैं.
  • 1975 में उन्होंने 'दबाव' में सुशीला से शादी की. सुशीला के लिए भी किसी विदेशी से शादी करने का फ़ैसला आसान नहीं था, लेकिन परिवार में ग़रीबी के कारण उन्हें हामी भरनी पड़ी.

भारत और चीन की दोस्ती ही है कि मैं घर लौट सका

भारत में रहना आसान नहीं था

  • भाषा और संस्कृति अलग-अलग होने के कारण साथ रहना आसान नहीं था. सुशीला को वांग छी की भाषा ही समझ नहीं आती थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने साथ जीना सीख लिया.
  • वे हर दिन परिवार को याद करते थे.
  • ग़रीबी में जीना आसान नहीं था, लेकिन परिवार चलाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की.
  • ग़रीबी के कारण बच्चे ठीक से पढ़ नहीं पाए. स्थानीय पुलिस ने परेशान किया, उनकी पिटाई भी की. एक पूर्व पड़ोसी ने बताया कि पुलिस घूस चाहती थी, लेकिन वांग बेहद ईमानदार थे.
  • 80 के दशक में पहली बार पत्रों के माध्यम से चीन में परिवार के साथ उनका संपर्क हुआ.
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माँ से फ़ोन पर बात

  • 40 साल में पहली बार 2002 में फ़ोन पर उनकी बात उनकी मां से हुई. माँ ने कहा बेटा घर आ जाओ. उन्होंने कहा कोशिश कर रहा हूँ. 2006 में उनकी मां की मृत्यु हो गई.
  • उनके एक बेटा और दो बेटियां हैं. ग़रीबी के कारण ठीक इलाज नहीं मिलने की वजह से मानसिक तौर पर बीमार एक बेटे की मौत हो गई थी.
  • उन्होंने एक दुकान शुरू की, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसे भी बंद करना पड़ा.
  • वांग छी के मुताबिक़ उन्होंने मदद के लिए स्थानीय अधिकारियों के अलावा प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपतियों को पत्र लिखे, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की.
  • बीबीसी में कहानी छपने के बाद चीनी दूतावास के अधिकारी उनसे मिलने उनके गांव गए थे और मदद का भरोसा दिलाया था.
  • उसके बाद वांग अपने परिवार के साथ चीन गए और 54 साल बाद अपने परिवार के सदस्यों से मिले.
  • उन्होंने परिजनों से मिलने के बाद बीबीसी का ख़ासतौर पर धन्यवाद किया.

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