ELECTION SPECIAL: रामपुर में आज़म खान को भाजपा की चुनौती

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समाजवादी पार्टी के रामपुर से उम्मीदवार आज़म खान इस क्षेत्र से आठ बार चुनाव जीत चुके हैं. वो अपनी पार्टी के एक बड़े नेता हैं और राज्य सरकार में शहरी विकास मंत्री भी.

रामपुर में उनका जलवा है. एक तरह से वो रामपुर के नए नवाब हैं. उन्हें इस चुनाव में हराना आसान नहीं होगा. जिसने भी उनसे मुक़ाबला करने की ठानी है, उसमें दम तो है.

मगर इस बार उनकी जीत यक़ीनी नहीं है क्योंकि उन्हें चुनौती देने वाले दो मज़बूत उम्मीदवार बहुजन समाज पार्टी के डॉक्टर तनवीर अहमद खान और भारतीय जनता पार्टी के शिव बहादुर सक्सेना हैं.

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रामपुर में आज़म खान को चुनौती देने वाले दो मज़बूत उम्मीदवार बसपा और भाजपा के हैं.

मोदी के नाम पर वोट

सक्सेना ने अपनी एक रैली के दौरान समय निकाल कर बीबीसी से बात की. शिव बहादुर सक्सेना ने ज़ोरदार तरीक़े से दावा किया कि उनका मुक़ाबला डॉक्टर तनवीर से है.

वे कहते हैं, "आज़म खान तीसरे नम्बर पर आएंगे. अगर वो आठ बार चुनाव जीते हैं तो मैं भी चार बार जीता हूँ और दो बार मंत्री रह चुका हूँ."

उनके ऊँचे मनोबल का शायद एक कारण ये भी है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट माँग रहे हैं.

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हिंदू महिलाएं

शिव बहादुर सक्सेना गाँवों में नुक्कड़ सभाएँ कर रहे हैं. रामपुर से 15 किलोमीटर दूर एक गाँव में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों को बार-बार दोहराया.

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भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ नरेंद्र मोदी की मुहिम के नाम पर वोट माँगा. हिंदू महिलाओं की इज़्ज़त की सुरक्षा का वादा किया. वो सभाएँ केवल हिंदू गाँव और बस्तियों में कर रहे हैं.

क्या उन्हें मुस्लिम वोट नहीं चाहिए?

इस सवाल के जवाब में वे कहते हैं, "ऐसा ही समझ लो. हम अपने लोगों के बीच ही जा रहे हैं."

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मुस्लिम उम्मीदवार

ये कहते हुए कि उन्हें मुस्लिम वोट नहीं चाहिए, सक्सेना कहते हैं कि वो मुस्लिम विरोधी नहीं हैं और पिछले चुनावों में उन्हें मुस्लिम वोट भी मिले हैं.

याद रहे कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है.

सक्सेना कहते हैं, "आज़म खान भी सांप्रदायिक लाइन पर सियासत करते हैं. पास का एक गाँव मुस्लिम आबादी वाला है, जहाँ उन्होंने विकास का काम किया है. हिंदू गाँवों को नज़रअंदाज़ कर दिया."

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हिंदू वोट

सक्सेना का गणित इस तरह से काम कर रहा है. रामपुर शहर में देहातों से कुछ ही अधिक वोटर हैं. शहर में मुस्लिम बहुमत में हैं. देहातों में भारी संख्या हिंदू वोटरों की है.

तो अगर देहातों के सारे हिंदू वोट उन्हें मिल जाएं और शहर के मुस्लिम वोट आज़म खान और डॉक्टर तनवीर के बीच बँट जाए तो वो जीत सकते हैं.

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उनके स्टाफ़ में भी मुस्लिम अधिक हैं लेकिन शहर के हिंदुओं का एक बड़ा वर्ग उन्हें पसंद करता है.

और वो इस बात से ख़ुश है कि रामपुर में कई शहरों के मुक़ाबले काफ़ी विकास हुआ है जिसका सेहरा आज़म खान को जाता है.

अब देखना है कि रामपुर किसकी झोली में जाता है. नतीजे से समझ में आएगा कि सक्सेना का गणित सही साबित हुआ या नहीं. रामपुर में चुनाव 15 फ़रवरी को है.

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