प्रेमी जोड़ों को बचाएगी या धमकाएगी बीजेपी

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पिछले दिनों पार्टी का घोषणा पत्र जारी करते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने वादा किया था कि उनकी पार्टी की यूपी में सरकार बनने पर हर कॉलेज के बाहर एक एंटी रोमियो स्क्वॉड को तैनात किया जाएगा जो लड़कियों की सुरक्षा की निगरानी करेगा.

लेकिन इसमें कौन से लोग शामिल होंगे, क्या ये पुलिस व्यवस्था का हिस्सा होगा या फिर इसका स्वरूप कुछ अलग होगा, इस पर पार्टी का रुख़ स्पष्ट नहीं है.

दरअसल, 14 फरवरी के दिन का युवाओं में प्रेम दिवस के तौर पर भले ही क्रेज हो लेकिन कई बार प्रेमी जोड़ों के लिए ये दिन किसी दुर्दिन से कम नहीं साबित होता. कुछेक संगठन कभी संस्कृति के नाम पर तो कभी किसी और चीज़ के नाम पर अपनी तरह से प्रेमी जोड़ों को न सिर्फ़ मिलने से रोकते हैं बल्कि कई बार तो अपमानित करने की शिकायतें भी आती हैं.

लेकिन जब से बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वॉड बनाने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया है तभी से ये सवाल उठ रहे हैं कि ये एंटी रोमियो स्क्वॉड भी क्या इसीलिए होंगे?

उत्तर प्रदेश बीजेपी की महिला मोर्चा की अध्यक्ष स्वाति सिंह कहती हैं, "उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर समस्या है. अभी तो सरकार बनने के बाद देखा जाएगा कि इसे कैसे बनाना है और इसमें पुलिस भी शामिल होगी या नहीं. लेकिन इस तरह के दल बनाने की यूपी में बहुत ज़रूरत है."

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Image caption अमित शाह

अमित शाह ने तो घोषणा पत्र में इसके सिर्फ़ गठन की ही बात की थी. लेकिन बाद में बीजेपी के कुछ नेताओं ने इसके मक़सद को भी साफ़ कर दिया था. मेरठ में एक सम्मेलन में पार्टी के सुनील भराला ने कहा था कि ये स्क्वॉड लव जिहाद जैसे मामलों पर निगरानी रखने के लिए बनाए जाएंगे.

लेकिन स्वाति सिंह ऐसा नहीं मानतीं. वे कहती हैं, "लव जिहाद की बात तो आतंकवादी करते हैं, सभी मुसलमान नहीं करते हैं. जो लोग इस तरह की बात करते हैं, उन्हें भोली-भाली लड़कियों को ऐसे लोगों के चंगुल में फँसने से बचाना भी चाहिए."

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Image caption आयशा दुर्रानी

लेकिन लखनऊ में एक छात्रा आयशा दुर्रानी से जब हमने इस बारे में बात की तो उनका कहना था कि लोगों को प्रेम करने से किसी को भी रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. आयशा कहती हैं, "आप किसी की भावनाओं को थोड़ी न रोक सकते हैं. अगर लड़कियों को छेड़खानी से बचाने के लिए ऐसे दल बनते हैं तो उनका स्वागत है. लेकिन यह प्यार करने वालों को धमकाने के लिए बनेंगे तो ये क़तई स्वीकार नहीं होगा."

वहीं विपक्षी दल इस बारे में बीजेपी की नीयत को बहुत साफ़ नहीं देख रहे हैं. समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता जूही सिंह कहती हैं कि ये तो ध्रुवीकरण को नई दिशा में ले जाने की कोशिश है. वो कहती हैं, "अभी तो बीजेपी के बड़े नेताओं का रुख़ ही इस बारे में स्पष्ट नहीं है. दरअसल उन्होंने अपने घोषणा पत्र में ऐसी तमाम बातें बिना सोचे-समझे लिख दी हैं जिन्हें कैसे लागू करना है उन्हें ही नहीं पता."

बहरहाल एंटी रोमियो स्क्वॉड का मक़सद भले ही कॉलेज या स्कूल की लड़कियों के साथ होने वाली छेड़खानी को रोकना हो और बीजेपी ने इसे सरकार बनाने के लिए एक मुद्दे की तरह उछाल दिया हो, लेकिन प्यार करनेवालों को तो इसका डर अभी से सताने लगा है.

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