ELECTION SPECIAL: पहले लर्नर्स लाइसेंस था, अब सीख गए हैं राजनीति- अखिलेश यादव

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनाव प्रचार के लिए हर रोज़ हेलीकॉप्टर में निकलते हैं और करीब आधा दर्जन जनसभाओं को संबोधित करते हैं.

बीबीसी के लिए मैंने बीते हफ्ते मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर में सवार होकर उनके चुनाव प्रचार का जायज़ा लिया.

पश्चिम उत्तर प्रदेश में आयोजित रैली के मैदान के ऊपर से भीड़ का मुआयना करते अखिलेश मुझसे कहते हैं, "टर्नआउट (भीड़) अच्छा है."

उनके बाहर निकलते ही मैदान में मौजूद लोग 'अखिलेश भइया ज़िंदाबाद' के नारे लगाने लगते हैं.

समर्थकों के सिर पर समाजवादी पार्टी की लाल टोपियां हैं. मैदान में उतरने के पहले अखिलेश भी लाल टोपी पहन लेते हैं. मंच पर पार्टी कार्यकर्ता फूल मालाओं से उनका स्वागत करते हैं.

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अखिलेश के निशाने पर मोदी और नोटबंदी

अखिलेश का परिचय 'हमारे और आपके दिलों की धड़कन' और 'हमारी उम्मीद' के रूप में कराया जा रहा है.

भाषण की शुरुआत में ही अखिलेश निशाना साधते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नोटबंदी पर.

वे कहते हैं, "जिन लोगों ने कहा था कि वो अच्छे दिन लाएंगे, उन्होंने सबको लंबी लाइनों में खड़ा कर दिया. बहुत से लोगों की तो लाइन में खड़े-खड़े जान भी चली गई. एक महिला ने तो लाइन में एक बच्चे को जन्म दे दिया. बैंक वालों ने उसका नाम खजांची नाथ रख दिया. आप बताइए ये अच्छे दिन हैं?"

भीड़ से ज़ोर से आवाज़ आती है, "नहीं."

अखिलेश आगे कहते हैं, "कुछ लोग सिर्फ़ मन की बात करते हैं. हम कहते हैं कि काम की बात बताओ. ये बताओ काम क्या किया है?"

समाजवादी पार्टी का चुनावी नारा है 'काम बोलता है' और अखिलेश को एक विकास पुरुष के रूप में दर्शाए जाने की कोशिश की जा रही है.

हर एक रैली में अखिलेश उन योजनओं को गिनाते हैं जो उन्होंने पिछले पांच साल में प्रदेश के विकास के लिए चलाई हैं. जैसे नई सड़कें बनाने का काम, कॉलेज के छात्रों को मुफ़्त लैपटॉप बांटना, गरीब महिलाओं के लिए पेंशन स्कीम और ग्रामीण इलाकों में 16 घंटे बिजली की सप्लाई.

वो कहते हैं, "इस बार जब हम जीतकर आएंगे तो मुफ़्त स्मार्टफ़ोन देंगे."

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कांग्रेस से गठबंधन की बात भी हर रैली में उठाई जाती है और वो अपनी पार्टी और कांग्रेस के चुनाव चिह्न की बात करते हैं.

अखिलेश कहते हैं, "आपकी साइकिल में जब कांग्रेस का हाथ लग जाएगा तो सोचिए आपकी स्पीड कितनी तेज़ हो जाएगी? हमने ये गठबंधन किया है प्रदेश के विकास के लिए."

भाषण के अंत में जिक्र होता है मायावती और उनके बनाए हुए पार्कों का.

अखिलेश कहते हैं, "पिछले सात सालों से देख रहा हूं जो पत्थर के हाथी पार्कों में खड़े थे वो आज भी वहीं खड़े हैं और जो बैठे थे वो आज भी वहीं बैठे हैं."

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सभा खत्म करने से पहले अखिलेश पूछते हैं, "आप चाहते हो कि हम जीतें?"

जनता का जवाब साफ सुनाई देता है, "हां"

इस पर वो कहते हैं, "तो फिर वोट हमें ही देना. पांच साल पहले हमारे पास सिर्फ़ लर्नर्स लाइसेंस था. अब तो हम राजनीति भी सीख गए हैं."

साल 2017 के चुनाव में जीत अखिलेश के लिए बहुत अहम है. पिछले पांच सालों में उनकी सरकार का रिपोर्ट कार्ड कुछ ख़ास अच्छा नहीं रहा है. एक साल पहले तक तो ये कहा जाता था कि वो सिर्फ़ नाम के मुख्यमंत्री हैं और असल पावर तो पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव के हाथों में है.

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हेलिकॉप्टर नहीं, रथ से प्रचार का था प्लान

कुछ लोग तो ये भी कहते थे कि प्रदेश में पांच मुख्यमंत्री हैं और अखिलेश का नाम उस लिस्ट में सबसे नीचे है.

मगर साल की शुरुआत अखिलेश के लिए अच्छी साबित हुई. पिता और चाचा को पछाड़कर वे पार्टी के सुप्रीम लीडर बन गए. पार्टी में उनकी स्थिति मजबूत करने के लिए चुनाव में जीत ज़रूरी है.

अखिलेश मानते हैं कि पारिवारिक झगड़े के कारण उनके चुनाव प्रचार को कुछ नुकसान पहुंचा है.

वो मुझे बताते हैं, "हमने एक नया रथ बनवाया था. हमारा प्लान था कि उसमें पूरे प्रदेश का दौरा करेंगे. मगर आखिर में उसके लिए वक्त ही नहीं बचा."

समय की कमी के कारण फिलहाल अखिलेश प्रदेश का दौरा हेलीकॉप्टर के जरिए ही कर पा रहे हैं.

सात सभाओं के बाद उनका एक दिन का चुनाव प्रचार समाप्त हुआ. सूर्यास्त के बाद हेलीकॉप्टर नहीं उड़ सकता और हम उनके निजी छह सीट वाले हवाई जहाज़ में लखनऊ के लिए रवाना हो जाते हैं.

शाम के साढ़े छह बज चुके हैं और एयर होस्टेस हमें पूड़ी-सब्जी और अचार सर्व करती है. मेरे पास अभी उनके लिए कई सवाल हैं.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से बीबीसी हिंदी की ख़ास बातचीत

बसपा समर्थक भी अखिलेश को मानते हैं 'भला आदमी'

अखिलेश की अपनी छवि काफी अच्छी है. यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के समर्थक भी उन्हें 'भला आदमी' मानते हैं. मगर बहुत से लोगों का कहना है कि उनकी सरकार में गुंडों को बढ़ावा मिलता है.

अखिलेश इस आरोप का खंडन करते हैं.

वो कहते हैं, "हमने महिलाओं के लिए हेल्पलाइन शुरू की है. हमने डायल 100 की सुविधा शुरू की है जिसमें पुलिस को घटनास्थल पर 10 मिनट में हर हाल में पहुंचना पड़ता है."

साल 2012 में भी मैंने एक दिन अखिलेश के साथ हेलीकॉप्टर में उनका चुनाव प्रचार कवर किया था. उस वक़्त मैंने उनसे पूछा था कि उन्हें कितनी सीटें मिलेंगी?

उनका जवाब था, "207". क्योंकि मायावती ने साल 2007 के चुनाव में 206 सीटें जीती थीं.

2017 के चुनाव में अखिलेश कहते हैं कि समाजवादी पार्टी- कांग्रेस का गठबंधन 300 सीटें जीतकर दिखाएगा.

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'राजनीति में किस्मत अच्छी होनी चाहिए'

लखनऊ हवाई अड्डे पर उतरने के पहले मैं उनसे पूछती हूं कि उनका शाम का क्या प्लान है?

अखिलेश जवाब देते हैं, "कुछ सरकारी काम करने हैं. पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें हैं और फिर पत्नी और बच्चों के साथ कुछ वक्त भी गुज़ारना है."

अखिलेश कहते हैं, "राजनीति आसान नहीं है. इसे सब नहीं कर सकते. आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है और फिर आपकी किस्मत अच्छी होनी चाहिए."

मेहनत तो वो कर रही रहे हैं. बाकी सब किस्मत का खेल है.

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