तमिलनाडुः 'बंधक' विधायकों के विचित्र क़िस्से

बंधक बनाया जाना कभी-कभी भारतीय राजनेताओं के लिए ज़्यादा ही अच्छा साबित होता है.

ये पूछिए तमिलनाडु की सत्ताधारी एआईएडीएमके के उन 124 विधायकों से जिन्हें उनकी नेता ने कोई 10 दिनों से एक रिसॉर्ट में भिजवा रखा था.

कहीं विरोधी ख़ेमा उनको तोड़ ना ले, इसे रोकने के लिए उनकी नेता शशिकला नटराजन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थीं.

पिछले हफ़्ते, विधायकों को चेन्नई से 80 किलोमीटर दूर जिस रिसॉर्ट में भिजवाया गया वहाँ के कमरे का किराया, उसकी वेबसाइट के अनुसार, पाँच से छह हज़ार रूपए के बीच पड़ता है.

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कैसा था रिसॉर्ट

गूगल पर दिए गए रिव्यू के अनुसार, इस रिसॉर्ट में साधारण कमरे हैं, दो रेस्तरां, स्पा, सॉना, जिम, एक हॉट टब, एक आउटडोर पूल और इसकी रेटिंग मात्र डेढ़ स्टार है.

ये तस्वीर उस अख़बार की रिपोर्ट से बिल्कुल अलग है जिसमें लिखा था कि ये विधायक रेस्तरां में आलीशान ज़िंदगी बिता रहे हैं जहाँ वे स्विमिंग, सॉना, मसाज और एक फ़्लोटिंग रेस्तरां में खाने का लुत्फ़ उठा रहे हैं.

और एक नामी वेबसाइट की मानें तो ये विधायक समुद्रतट पर एक शांत रिसॉर्ट में वक़्त बिता रहे हैं जहाँ खाने-पीने की भरपूर सुविधा है और इस दौरान वैलेन्टाइन्स डे भी आ गया.

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असलियत में भी, अधिकतर विधायक वहाँ कुछ अच्छा वक़्त बिता रहे हैं.

खेल-मनोरंजन के इंतज़ाम

एक बंधक विधायक अर्जुनन ने बीबीसी तमिल को बताया, "अच्छा है यहाँ सब, बहुत बड़ा रिसॉर्ट है, शाकाहारी-मांसाहारी खाना है. मैं टीवी देखता हूँ, अख़बार पढ़ता हूँ. दूसरे लोग ताश, क्रिकेट, वॉलीबॉल और कबड्डी खेलते हैं. अगर आप चाहें, तो मालिश भी करवा सकते हैं."

दो विधायकों ने भी एक अख़बार को कुछ ऐसा ही बताया.

एक ने कहा, "मैं दूसरी बार विधायक बना हूँ, इससे पहले भी कई बार पाँच-सितारा होटलों में जा चुका हूँ. मगर इस बार का अनुभव एकदम अलग है, ज़रा भी बोरियत नहीं लग रही."

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एक ने कहा कि वो केवल खाना, शराब और टीवी न्यूज़ से ख़ुश हैं, तो दूसरे ने कहा कि वो मालिश भी करवाते हैं और तैरने भी जाते हैं.

रखी जा रही थी सख़्त नज़र

व्हाट्सऐप पर बँट रही तस्वीरों में दिखता है कि वहाँ मेज़ों पर चावल और प्रॉन का अंबार लगा है, और पानी के जगों से बीयर बाँटी जा रही है.

ख़बरें हैं कि बंधक विधायकों को छोटे-छोटे समूहों में बाँट दिया गया है जिनपर एक नेता नज़र रखता है जो शायद एक मंत्री होता है.

शुरू के दिनों में उन्हें अपना मोबाइल फ़ोन अपने ऊपर नज़र रखनेवाले नेता को जमा करवाना पड़ा.

एक निजी अस्पताल के डॉक्टर जा-जाकर विधायकों के शुगर और रक्तचाप की जाँच करते रहे.

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Image caption समर्थकों के साथ पनीरसेल्वम

क़िले जैसी सुरक्षा

सुरक्षा सख़्त थी. वहाँ ठहरने की कोशिश करनेवाले एक पत्रकार को ये कहकर कमरा नहीं दिया गया कि कोई कमरा ख़ाली नहीं है.

छह लोगों को कथित तौर पर "ग़ैरक़ानूनी" तौर पर वहाँ घुसने के लिए पकड़ा गया.

स्थानीय मछुआरों ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें "सख़्त आदेश थे कि वे किसी को भी नौका पर सैर ना कराएँ".

एक विधायक वहाँ से बाहर आ पाया और विरोधी गुट से जा मिला.

एस एस श्रवानन ने पत्रकारों को बताया, "मैंने भेस बदला, दीवार पर चढ़ा और कूदकर भाग आया".

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Image caption समर्थकों के साथ शशिकला

'दीवार कूदकर' बाहर आया विधायक

मगर कई लोगों ने उनके दावों को नमक-मिर्च लगाकर कही गई बातें माना. एक पत्रकार ने कहा कि रिसॉर्ट ऐसा कुछ घिरा नहीं है, वो आराम से चलकर बाहर निकले होंगे.

एक बंधक विधायक ने एक पत्रकार से कहा कि श्रवानन दिन में क्रिकेट खेल रहे थे, उन्होंने अच्छी बैटिंग की, अच्छी बोलिंग की, और फिर एक लॉन्ग जंप लगाकर निकल गए.

वैसे पाला बदलनेवाले वो पहले विधायक नहीं थे.

एक विधायक तो बड़ी ख़ामोशी से बस के रिसॉर्ट रवाना होने से पहले ही निकल लिए.

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Image caption ई पलनीसामी

ख़ाली कब होगा रिसॉर्ट

एस पी षमुगनाथन ये कहते हुए बाहर निकले कि उन्हें चक्कर आ रहे हैं और वे दवा लेना चाहते हैं, और फिर वे लौटे ही नहीं, और सीधे ओ पनीरसेल्वम के घर नज़र आए.

घटनाएँ बदलीं, मगर अंततः ऐसा लगता है बंधक विधायक जीतने में कामयाब रहे. शशिकला को जेल जाना पड़ा मगर उनके ही एक विश्वासी ई पलानीसामी मुख्यमंत्री बना दिए गए हैं.

एक पत्रकार ने बताया कि ख़बर के रिसॉर्ट पहुँचते ही रिसॉर्ट में बड़ी पार्टी हुई.

समझा जाता है कि विधायक शनिवार तक रिसॉर्ट खाली कर देंगे और विश्वासमत के लिए विधानसभा में जुटेंगे.

फ़ोन पर गालियाँ

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि रिसॉर्ट में रहने का सारा ख़र्च करदाताओं के सिर पर आएगा या पार्टी के.

अर्जुनन ने बीबीसी संवाददाता को बताया कि रिसॉर्ट पर उनका वक़्त यादगार रहा और उसमें केवल एक खलल आई कि विरोधी कैंप के सैकड़ों फ़ोन कॉल्स आते रहे.

वे कहते हैं, "लगातार फ़ोन आ रहे थे, कुछ तो इतनी गालियाँ दे रहे थे कि मेरे कान फट गए".

भारतीय राजनीति में दलबदल

भारतीय राजनीति में दलबदल की परंपरा बरसों से चल रही है.

1967 से 1971 के बीच संसद में 142 और विधानसभाओं में 1,969 राजनेताओं ने पाले बदले.

30 से ज़्यादा सरकारें गिरीं और दल बदलनेवाले 212 नेताओं को मंत्रिपद दिए गए.

दलबदल को रोकने के लिए 1985 में एक क़ानून बना और उसका असर पड़ा भी है, मगर कई लोगों को लगता है कि इस क़ानून से अफ़रा-तफ़री मची है और लोगों ने इससे बचने की हर तरक़ीब भिड़ाने की कोशिश की है.

मिसाल के तौर पर आंध्र प्रदेश में भी ऐसे हालात आए थे जब विधायकों को दलबदल से रोकने के लिए बंधक बनाया गया.

1995 में वहाँ चंद्रबाबू नायडू के समर्थक विधायकों को हैदराबाद में एक होटल में बंद कर दिया गया था.

मगर अंततः नायडू जीते और बंधक विधायकों के दिन फिरे.

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