तमिलनाडु: हारकर भी जीत गए हैं पनीरसेल्वम

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Image caption पलनीसामी के लिए आसान नहीं है राह

मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने के लिए एडाप्पडी पलनीसामी ने चार वोटों के मामूली बहुमत से विश्वासमत जीत लिया है. हालांकि इस जीत से दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में जारी राजनीतिक अनिश्चितता पर विराम लग गया है.

पनीरसेल्वम के 11 वोट के मुक़ाबले पलनीसामी को 122 वोट मिले. विश्वासमत के दौरान तमिलनाडु विधानसभा में हिसंक झड़प भी हुई. विपक्षी पार्टी डीएमके विश्वासमत के दौरान गोपनीय बैलट से मतदान चाहती थी.

विधानसभा से डीएमके के विधायकों को निकालने के बाद ही वोटिंग हो पाई. इस दौरान विधानसभा से एक विधायक वाली मुस्लिम लीग और आठ विधायकों के साथ कांग्रेस वॉकआउट कर गईं.

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Image caption पार्टी काडरों की सहानुभूति पनीरसेल्वम के साथ?

विधानसभा में जिन हालात में विश्वासमत संपन्न हुआ उसे लेकर राज्यपाल विद्यासागर राव से डीएमके ने शिकायत की है. डीएमके का कहना है कि पलनीसामी ने उचित तरीके से विश्वासमत हासिल नहीं किया. डीएमके के इस तर्क से लोग सहमति भी जता रहे हैं.

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मूल रूप से विश्वासमत को संवैधानिक रूप से अवैध घोषित नहीं किया जा सकता. हालांकि क़ानूनी विशेषज्ञ इससे असहमति जता सकते हैं क्योंकि जब यह विधानसभा में संपन्न हुआ तब माहौल अनुकूल नहीं था.

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Image caption शशिकला के परिवार को नापंसद करते हैं लोग

राजनीतिक विश्लेषक संपत कुमार का कहना है, ''सदन में कुल 234 सदस्य हैं. विश्वासमत के दौरान 90 विधायक मौजूद नहीं थे. ये दावा करेंगे कि उन्हें सदन के भीतर नहीं रहने दिया गया. कुछ लोगों ने अपने मन से इसका बहिष्कार किया. डीएमके यदि ऐसे हालात पैदा करने में सक्षम रहता है तो प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. इसके बाद प्रदेश में फिर से चुनाव होगा. डीएमके इस बात को लेकर आश्वस्त है कि चुनाव हुआ तो वह जीत हासिल करेगा.''

तमिलानाडु के राजनीतिक हलको में अलग-अलग मामलों पर डीएमके का रुख हैरान करने वाला रहा.

डीएमके के सदस्यों ने स्पीकर पी धनपाल का घेराव किया. स्पीकर को सुरक्षाकर्मियों ने वहां से निकाला. स्पीकर के पास से माइक को तोड़कर फेंक दिया गया. स्पीकर ने दावा किया है कि उनकी शर्ट भी फाड़ दी गई. डीमके की मांग थी कि विश्वासमत के दौरान वोटिंग गोपनीय मतपत्र से हो.

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Image caption कभी जयललिता की ख़ास वफादार रही हैं शशिकला

डीएमके की मांग संविधान के हिसाब से कहीं ठहरती नहीं है. ज़ाहिर है कि डीएमके की मांग को स्पीकर ने ख़ारिज कर दिया.

विश्वासमत के दौरान वोटिंग के अलग-अलग नियम हैं. वोटिंग ध्वनिमत से भी हो सकती है. इस स्थिति में यदि किसी सदस्य को शक है और वह मतविभाजन चाहता है तो स्पीकर विधायकों को खड़ा होने के लिए कह सकता है और फिर हर पंक्ति में लोगों की गिनती की जाती है.

सीनियर राजनीतिक विश्लेषक वासंती का मानना है कि डीएमके के पक्ष में हालात नहीं हैं. हालांकि वह यह नहीं मानती हैं कि पलनीसामी के विश्वासमत जीतने से प्रदेश में राजनीति में स्थिरता आ गई है.

उन्होंने कहा, ''क़ानूनी रूप से भी यदि मुख्यमंत्री यह सोचते हैं कि वह वैध सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं तो जनता उनके साथ बहुत सहज नहीं रहने जा रही.''

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Image caption जयललिता के निधन के बाद बिखर रही है पार्टी

संपत कुमार और वासंती दोनों का यहा मानना है कि विधायक जब अपने क्षेत्र में जाएंगे तो उन पर वहां के लोगों और पार्टी काडरों का भारी दवाब होगा.

संपत कुमार ने कहा, ''ऐसा इसलिए क्योंकि एक लोकप्रिय भावना शशिकला और उनके परिवार के ख़िलाफ़ है. भले कोई ठोस सबूत नहीं हो लेकिन लोग गंभीरता से इस बात को मानते हैं कि पलनीसामी शशिकला और उनके परिवार की कठपुतली होंगे.''

वासंती ने कहा, ''सत्ता में रहते हुए शशिकला के परिवार को जितना नापंसद किया गया वैसा किसी के साथ नहीं हुआ. पार्टी काडर शशिकला को इसलिए नहीं नापसंद करते हैं कि उन्हें अम्मा से दूर रखा गया बल्कि जेल जाने से पहले उन्होंने अपने भतीजे दिनाकरण को पार्टी का उप-महासचिव भी बना दिया. ऐसे में पार्टी काडर पूछ रहे हैं कि सरकार को दिनाकरण कंट्रोल करेंगे?'' दूसरी तरफ पनीरसेल्वम को लेकर पार्टी काडरों में सहानुभूति है.

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