छत्तीसगढ़ में सीनियर आईएएस अफ़सर गिरफ़्तार

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Image caption बाबूलाल अग्रवाल

छत्तीसगढ़ में 1988 बैच के आईएएस अधिकारी और उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव बाबूलाल अग्रवाल को सीबीआई ने गिरफ़्तार कर लिया है.

उनके ख़िलाफ़ चल रहे भ्रष्टाचार के एक मामले को ख़त्म करने के लिए कथित रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय के दो लोगों को डेढ़ करोड़ रुपए की रिश्वत देने का आरोप है.

दिल्ली की सीबीआई अदालत ने उन्हें पांच दिन के लिये सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है.

बाबूलाल अग्रवाल के अलावा इस मामले में उनकी पत्नी के भाई आनंद अग्रवाल और कथित दलाल भगवान सिंह को भी सीबीआई ने गिरफ़्तार किया है.

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सीबीआई के प्रवक्ता आर के गौर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इन सभी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून के तहत मामला दर्ज किया गया है.

इधर राज्य सरकार ने भी बाबूलाल अग्रवाल को निलंबित करने की घोषणा की है.

बाबूलाल अग्रवाल के ख़िलाफ़ 2010 में आयकर विभाग ने छापा मारकर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज़ किया था.

उन पर आरोप थे कि उन्होंने अपनी संपत्ति को छुपाने के लिए 200 से अधिक ग्रामीणों की बिना जानकारी के बैंकों में खाते खुलवाए थे और उनके खातों में अपनी रक़म जमा की थी.

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Image caption आय से अधिक संपत्ति होने का आरोप

इस मामले में सरकार ने उन्हें निलंबित किया था, लेकिन बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया और अदालती आदेश के अनुसार बाबूलाल अग्रवाल की फिर से नियुक्ति भी कर दी गई.

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार सीबीआई से इस मामले को ख़त्म करने के लिए कथित रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करने वाले दो लोगों से बाबूलाल अग्रवाल ने संपर्क किया और रिश्वत के रूप में डेढ़ करोड़ रुपए नकद और दो किलोग्राम सोना देने की बात पर सौदा तय हुआ.

इसमें से रक़म का बड़ा हिस्सा इन लोगों को हवाला के ज़रिये दिया गया.

सीबीआई के अनुसार जिन दो लोगों से बाबूलाल अग्रवाल संपर्क में थे, उनका प्रधानमंत्री कार्यालय से कोई लेना-देना नहीं है.

दोनों में से एक भगवान सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरे बुरहानुद्दीन नाम का दूसरा शख़्स फ़रार बताया जा रहा है.

बुरहानुद्दीन के ख़िलाफ़ झारखंड और आंध्र प्रदेश में भी कुछ मामले दर्ज हैं.

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