आइसा और एबीवीपी के छात्रों में हुई झड़प

  • 22 फरवरी 2017
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Image caption प्रदर्शन के दौरान घायल हुए डीयू के प्रोफेसर

दिल्ली विश्वविद्याल के रामजस कॉलेज में जेएनयू के छात्र उमर ख़ालिद का कार्यक्रम रद्द होने के विरोध में निकाले गए मार्च के दौरान हुई हिंसा के लिए दोनों छात्र संगठनों ने एक दूसरे पर आरोप लगाए हैं.

वहाँ छात्र संगठनों एबीवीपी और आइसा के समर्थकों के बीच हुई झड़प में कई छात्रों के घायल होने के अलावा कुछ पत्रकारों को भी चोट लगी है.

रामजस कॉलेज के कार्यक्रम की एक आयोजक ने बीबीसी को बताया कि पुलिस से सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलने के बाद कॉलेज प्रशासन ने उमर ख़ालिद को मंज़ूरी नहीं दी जिसके विरोध में बुधवार को कॉलेज में मार्च निकाला गया था.

अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए नाम प्रकाशित ना करने का आग्रह करने वाली इस छात्रा का कहना था कि विरोध मार्च के दौरान आज़ादी के समर्थन में नारेबाज़ी की गई जिसमें कश्मीर की आज़ादी का नारा भी लगाया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने उनके मार्च पर हमला किया जिसमें कई छात्र घायल हुए.

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Image caption उमर ख़ालिद के विरोध के दौरान झड़प

विरोध के दौरान हुई नारेबाज़ी

वहीं एबीवीपी की छात्र नेता और दिल्ली छात्रसंघ की वाइस प्रेसिडेंट प्रियंका ने बीबीसी से कहा कि झड़पों में एबीवीपी के भी कम से कम दस छात्र घायल हुए हैं.

प्रियंका ने कहा, "हम देश के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी करने वाले उमर ख़ालिद का कार्यक्रम डीयू के कॉलेजों में नहीं होंने देंगे ये चेतावनी हमने दी थी."

उन्होंने कहा कि दूसरी यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बिना अनुमति के कॉलेज में प्रवेश किया जिसका विरोध किया गया जिसे लेकर दोनों ओर से झड़प हुई जिसमें उन्हें भी चोट लगी.

प्रियंका का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान आइसा के छात्रों ने 'देशविरोधी नारेबाज़ी' भी की.

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मामले पर पुलिस का रुख़

मॉरिस नगर थाने की एसएचओ आरती शर्मा ने बीबीसी को बताया कि किसी भी छात्र को हिरासत में नहीं लिया गया है.

पुलिस ने घटना के बाद कोई मामला दर्ज किया है या नहीं इस बारे में वो स्पष्ट रूप से नहीं बता सकीं.

वहीं कैच न्यूज़ के पत्रकार आदित्य मेनन का कहना है कि झड़प के दौरान उनके साथ भी एबीवीपी के छात्रों ने मारपीट की.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मैं आइसा से जुड़ीं शेहला रशीद से बातचीत कर रहा था कि इसी दौरान उन पर हमला हुआ. उन्होंने अपना फ़ोन मुझे थमाना चाहा, ये देखकर एबीवीपी के छात्रों ने मुझ पर भी हमला किया."

आदित्य मेनन का कहना है कि उनके साथ काम करने वाले पत्रकार विशाख उन्नीकृष्णनन को भी पुलिस लाठीचार्ज में चोट लगी है.

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