प्रेग्नेंट थी तभी मेरा पति मुझे छोड़कर चला गया: कमलजीत

चंडीगढ़ में एक गुप्त स्थान पर एक बैठक आयोजित की गई. इसमें पूरे पंजाब से वो महिलाएं शामिल हुईं जिन्हें विदेश में रहने वाले उनके पतियों ने छोड़ दिया है. ये महिलाएं एक ग़ैर सरकारी संगठन से मदद की उम्मीद में आई हैं.

हेल्पिंग हेल्पलेस नाम के इस एनजीओ की प्रमुख हैं अमनजोत कौर रामूवालिया. उनका अनुमान है कि पूरे पंजाब में इस तरह की 15 हज़ार महिलाएं हैं. उनका कहना है कि यह संख्या बढ़ रही है और इसमें बहुत सी पढ़ी-लिखी और सुंदर महिलाएं शामिल हैं. ये सभी संकट में हैं.

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वो कहती हैं, ''वो समाज में एक परित्यक्त पत्नी के रूप में रहने के लिए मजबूर हैं. मेरा मानना है कि यह मानवाधिकारों का हनन है.''

इन महिलाओं के पति पूरी दुनिया में फैले हुए हैं. लेकिन इनमें अमरीकी, ब्रितानी और कनाडाई लोगों की संख्या बहुत अधिक है. ये महिलाओं विदेश में एक बेहतर ज़िंदगी की उम्मीद में शादी के लिए राजी हुई थीं. लेकिन इनमें से बहुत के पतियों का उद्देश्य प्यार से अधिक पैसा था.

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ऐसे पतियों में से एक तिहाई का ब्रिटेन से होने का अनुमान है.

Image caption अमनजोत कौर रामूवालिया

रामूवालिया कहती हैं, ''वो (दूल्हे) यहां आते हैं और बहुत अधिक दहेज की मांग करते हैं. वो शादी करते हैं और दहेज के पैसे से हनीमून पर जाते हैं. इसके बाद वो कभी वापस नहीं आते हैं.''

भारत में यह परंपरा है कि लड़की का परिवार दूल्हे को दहेज में पैसा या अन्य उपहार दिए जाते हैं. हालांकि इसे 1961 में ग़ैर क़ानूनी बना दिया गया था. यह दहेज कई बार लाखों रुपए में होता है.

बैठक में भाग लेने वाली एक महिला पंजाब के बाहरी इलाक़े के एक गांव से चलकर आई थीं.

Image caption कमलजीत कौर

कलमजीत कौर नाम की इस महिला की शादी इटली निवासी एक व्यक्ति से तीन साल पहले हुई थी. लेकिन शादी के कुछ महीने बाद ही वो कमलजीत को छोड़कर चले गए. उस समय कमलजीत गर्भवती थीं.

उन्होंने बताया, ''हमारी शादी के कुछ दिन बाद ही, उन्होंने दहेज को लेकर झगड़ा शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि मेरा परिवार तुमसे खुश नहीं है.''

कमलजीत के पति उन्हें छोड़कर वापस इटली चले गए. उसके बाद से उन्होंने अपने पति को नहीं देखा है.

उनका बच्चा कई स्वास्थ्य समस्याओं के साथ पैदा हुआ. लेकिन उनके ससुराल वालों ने किसी तरह की सहायता करने से इनकार कर दिया.

उनका कहना था कि बच्चा विकलांग पैदा हुआ है. इसलिए हम तुम्हारे लिए कुछ नहीं करेंगे. अब हमारा रिश्ता ख़त्म.

कुछ महीने बाद ही कमलजीत के बच्चे की मौत हो गई. लेकिन उनके पति ने उनसे संपर्क नहीं किया.

किसी विदेशी नागरिक को भारत में तलाक़ देना एक बहुत ही जटिल और ख़र्चीली प्रक्रिया है. कई बार इसका लड़की के परिवार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

दर्शन की बेटी की शादी 1997 में हुई थी, लेकिन वो अभी भी मामला बंद होने का इंतज़ार कर रहे हैं.

वो कहते हैं, ''उन्होंने वापस जाने से पहले तक कुछ भी नहीं कहा. उन्होंन कहा मेरा विवाह विदेश में हुआ है. मुझे एक बेटा और एक बेटी हैं. इसलिए मैं आपकी बेटी को नहीं ले जा सकता. आपको जो करना है कर लो.''

दर्शन बताते हैं, ''हमने क़ानूनी क़दम उठाए. लेकिन इस झमेले में पिछले 16 साल से फंसा हुआ हूं.''

दलजीत कौर 'नॉन रेजिडेंट इंडियन कमिशन ऑफ़ पंजाब' की वकील हैं. यह संगठन विदेशी नागरिकों के मामलों को देखता है.

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वो कहती हैं, ''हमारी न्यायिक प्रक्रिया थोड़ी धीमी है. इसमें फ़ैसला होने में सालों लगता है. यहां बहुत सी मुश्किलें हैं... और बड़ी बात ये है कि इन लड़कियों के पास इस न्यायिक व्यवस्था को देने के लिए पैसे भी नहीं हैं.''

फिर वापस चंडीगढ़ में हो रही बैठक में लौटते हैं जहां गुनगुनी धूप सेंकते हुए अमनजोत कौर रामूवालिया दर्जनों महिलाओं को सलाह दे रही हैं. लेकिन वो इन महिलाओं को जो सहायता दे सकती हैं, वो बहुत सीमित है.

इस तरह किसी महिला को छोड़ना हालांकि भारत में अपराध है. एक बार अगर कोई विदेशी नागरिक भारतीय न्यायक्षेत्र को छोड़कर चला गया तो उसे वापस लाकर मुक़दमा चलाना बहुत कठिन है.

अमनजोत बताती हैं कि जितनी कहानियां हमने सुनी हैं उनमें से कुछ तो बहुत ही डरावनी हैं.

वो कहती हैं, ''एक लड़की की शादी होती है, पति सुनियोजित तरीके से उसका बलात्कार करता है और एक बच्चे के साथ उसे छोड़कर वापस चला जाता है. यहां ऐसा कोई कड़ा क़ानून नहीं है जिसके आधार पर उनका पीछा कर सकें. लड़की को अपना बचा हुआ जीवन एक छोड़ी हुई पत्नी के रूप में ही बिताना पड़ता है.''

रामूवालिया कहती हैं कि अन्य देशों को अपने नागरिकों के कारनामों के बारे में जानना चाहिए. उन्हें अपने नागरिकों को ज़िम्मेदार ठहराने के लिए भारत सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए.

ये छोड़ी गई पत्नियां भारत में अनिश्चितता का जीवन जीती हैं.

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