पहला वोटर धोबी, फिर 'राजा-रानी', अंत में 'प्रजा'

  • 28 फरवरी 2017
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अमेठी में वोट डालने की एक ख़ास परंपरा

यह पोलिंग बूथ दूसरों से अलग नहीं था, न ही वहां मौजूद रिटर्निंग ऑफ़िसर, राजनीतिक दलों के एजेंट या सुरक्षाकर्मी ही अलग थे.

अलबत्ता वोटिंग कुछ अलग ढंग से ज़रूर हुई. पहला वोट डाला एक धोबी ने, फिर 'राजा' साहब और 'रानी' साहिबा ने और अंत में बारी आई 'प्रजा' की.

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पंचम लाल कनौजिया 27 फ़रवरी को रामनगर प्राइमरी स्कूल के मतदान केंद्र सुबह-सुबह पहुंच गए थे.

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Image caption वोट डालने के लिए लाइन में खड़े लोगों से कहा गया कि ईवीएम ख़राब है.

पंचम लाल ने बीबीसी से कहा, "यह रिवाज़ लंबे समय से चला आ रहा है. मेरे पिताजी सबसे पहले वोट डालते थे, अब मैं और मेरी पत्नी ऐसा करते हैं. हमारे वोट डालने के बाद ही राजा साहब और रानी साहिबा वोट डालती हैं."

आठ-सवा आठ बजे अमेठी के एक स्कूल में बने मतदान केंद्र पर 'राजा' संजय सिंह और 'रानी' अमिता सिंह पहुंचीं और वोट डाला.

तब तक बूथ के सामने लाइन लग गई थी. कुछ लोग मज़ाकिया अंदाज़ में कह रहे थे, "राजा और रानी अभी वोट डालने नहीं आए हैं, शायद इही लिए मसिनियौ ख़राब होइ गई है."

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Image caption वोट डालने पंहुचे 'राजा' संजय सिंह और 'रानी' साहिबा अमीता

लोगों को बताया गया गया था कि ईवीएम में कुछ ख़राबी आ गई है, इसलिए वोटिंग रुकी हुई है.

मतदान केंद्र पर पहुंचने से पहले संजय सिंह हिंदी कवि मलिक मोहम्मद जायसी की मज़ार पर भी गए थे. इसलिए उन्हें यहां पहुंचने में शायद कुछ देर हो गई थी.

पंचम लाल को विरासत पर गर्व

अमिता सिंह कांग्रेस की उम्मीदवार हैं. संजय सिंह की 'पहली' बीवी गरिमा सिंह बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं.

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Image caption आम जनता 'राजा' और 'रानी' के वोट डालने का इंतजार करती रही

स्थानीय पत्रकार योगेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि धोबी-राजा-रानी और फिर जनता के वोट डालने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. आज तक किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया.

पंचम लाल का परिवार पुश्तों से राजघराने यानी अमेठी की पुरानी रियासत की सेवा में रहा है. पहला वोट डालने का 'हक़' पंचम लाल के पिता उन्हें विरासत में दे गए.

क़रीब 80 साल के निरक्षर पंचम लाल यह नहीं जानते कि लोकतंत्र में राजशाही की इस परंपरा को निभाना क़ानूनी तौर पर सही है या ग़लत. लेकिन उन्हें विरासत को सँभालने और परंपरा को निभाने का फ़ख़्र ज़रूर है.

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