प्रोजेक्ट का विरोध, दिल्ली को चेन्नई का रेड सिग्नल

  • 2 मार्च 2017
तमिलनाडु के पुडुकोट्टई में धरने पर बैठे लोग.

पेट्रोलियम और पाकृतिक गैस मंत्रालय के हाइड्रोकार्बन प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ मध्य तमिलनाडु के पुडुकोट्टई ज़िले के नेडुवासल गांव में पिछले दो हफ़्तों से आंदोलन चल रहा है.

प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में लोगों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है. सत्तारूढ़ एआईएडीएमके सहित कई अन्य राजनीतिक दल भी प्रोजेक्ट के विरोध का समर्थन कर रहे हैं.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलनीसामी ने भी प्रधानमंत्री से प्रोजेक्ट को स्थगित करने की अपील की है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि तमिलनाडु में पहले से जो प्रोजेक्ट चल रहा है वो 1461 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. नई लीज़ 3500 वर्ग किलोमीटर के लिए दी गई है.

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अभी तक इन जगहों पर तेल के 700 कुएं हैं, जहां से प्रतिदिन 600 टन तेल और 30 लाख क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस निकाली जाती है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि तमिलनाडु में जो हाइड्रोकार्बन का नया प्रोजेक्ट प्रस्तावित है वो सिर्फ 10 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में ही है.

पुडुचेरी और तमिलनाडु के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के तहत 4,30,000 मिट्रिक टन तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार का दोहन किया जा सकेगा.

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सरकार का दावा है कि तेल और गैस का खनन आधुनिक तकनीक से हो रहा है. इस वजह से प्रकृति और यहाँ के रहने वालों को कोई नुक़सान नहीं हो रहा.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का दावा है कि भारत ने अभी तक अपनी हाइड्रोकार्बन की क्षमता का पूरी तरह से दोहन नहीं किया है. हालांकि देश ने पेट्रोलियम पदार्थ की खोज और खनन में दो दशकों पहले से ही उदारता बरतनी शुरू कर दी थी.

फिलहाल भारत में तेल और गैस की खपत 226.3 अरब मिट्रिक टन है जबकि उत्पादन सिर्फ 70. 4 अरब मिट्रिक टन ही है.

हाइड्रो-कार्बन की नियंत्रक संस्था यानी हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के मुताबिक़ आज भी ठोस नीति के अभाव में भारत में 70 हज़ार करोड़ रूपए तक के तेल और गैस के भंडारों का दोहन नहीं हो सका है.

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इस साल फरवरी में सभी हाइड्रोकार्बन योजनाओं के लिए आर्थिक मामलों पर संसद की कमेटी ने केंद्र की '2015 डिस्कवर्ड स्माल फील्ड्स' योजना को मंज़ूरी दी थी.

पिछले साल मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'डिस्कवर्ड स्माल फील्ड्स' की नीति की घोषणा की थी. इसके तहत 2022 तक कच्चे तेल के निर्यात को 10 फ़ीसद तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है. भारत 80 फ़ीसद कच्चे तेल का आयात करता है.

हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय और 'डिस्कवर्ड स्माल फील्ड्स' ने इसी साल 15 फरवरी को 34 ठेकों का 'ऑक्शन' किया था. इसमें 22 कंपनियों को 31 स्थानों में तेल की खोज और खनन के लिए चुना गया.

इन हाइड्रो कार्बन के 31 स्थानों में तमिलनाडु के नेदुवासल में सिर्फ एक स्थान है जबकि पुडुचेरी के कराईकल में एक. असम में सबसे ज़्यादा नौ स्थान चिन्हित किए गए हैं. उसी तरह मुंबई के पास 6, आंध्र प्रदेश में 4 और गुजरात में 5 स्थान चिन्हित किए गए हैं.

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