भारत में अब तक के चरमपंथी हमलों में क्या-क्या हुआ?

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भारत में अब तक हुए बड़े चरमपंथी हमलों में कितने आपको याद हैं, कितने मामलों में क्या हुआ, क्या आरोपियों पर लगे आरोप सच साबित हुए. कोर्ट कचहरी में मामला कहां तक पहुंचा. किन लोगों को उन हमलों के लिए सज़ा मिली है. हमले दर हमले, मामलों की एक पड़ताल, पढ़िए.

मुंबई सीरियल ब्लास्ट 1993

मुंबई महानगर के विभिन्न इलाक़ों में हुए 12 सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 लोग मारे गए थे जबकि 717 लोग घायल हुए थे. इन धमाकों के सिलसिले में कई सौ लोगों को हिरासत में लिया गया था और मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने अभियुक्त बनाए गए 129 लोगों में से 100 को दोषी ठहराया.

मगर इस सिलसिले में कई अभियुक्त अभी तक फ़रार हैं. इनमें से मामले का मुख्य अभियुक्त टाइगर मेमन और उसका भाई याक़ूब मेमन भी शामिल हैं. टाइगर मेमन को 'अंडरवर्ल्ड डॉन' दाऊद इब्राहिम का क़रीबी बताया जाता है.

1993 के धमाकों ने कैसे मुंबई को बदल डाला?

सुरक्षा एजेंसियों का आरोप है कि दाऊद इब्राहिम ने ही अल-क़ायदा और लश्कर-ए- तैयबा के साथ मिलकर मुंबई धमाकों की योजना बनाई थी.

मेमन के परिवार के चार लोगों को भी मामले में अभियुक्त बनाया गया है.

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हालांकि अदालत ने मेमन के परिवार के तीन लोगों को मामले से बरी कर दिया. अन्य अभियुक्तों में अबू सलेम, अब्दुल क़य्यूम, रियाज़ सिद्दीकी, ताहिर मर्चेंट, फ़िरोज़ खान और मुस्तफ़ा डोसा शामिल हैं.

नागपुर जेल में याक़ूब मेमन को 30 जुलाई 2005 को फांसी दी गई थी. अभियोजन पक्ष ने मामले के 40 और अभियुक्तों को फांसी दिए जाने की अपील की है.

भारतीय संसद पर हमला 2001

दिसंबर की 13 तारीख़ को हुए इस हमले में 14 लोग मारे गए थे जबकि 22 लोग घायल हुए थे.

इनमें संसद के माली के अलावा ज़्यादातर सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के लोग थे. मारे गए लोगों में पांच हमलावर भी शामिल थे जिनकी शिनाख़्त मोहम्मद, रणविजय, राणा, हैदर, तुफ़ैल और हम्ज़ा के रूप में की गई.

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संसद पर हमले के सिलसिले में पकिस्तान स्थित चरमपंथी गुटों से जुड़े तारिक़ अहमद, अबु जेहादी, ग़ाज़ी बाबा और मौलाना मसूद अज़हर को भी आरोपी बनाया गया.

इन पर हमले की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया. चरमपंथी संगठन जैश ए मोहम्मद के सदस्यों पर भी संसद हमले की साज़िश का आरोप है.

दिल्ली पुलिस की जांच में दिल्ली विश्वविद्यालय के अध्यापक सय्यद अब्दुल रहमान गिलानी, उनके भाई शौकत हुसैन गुरु और भाई की पत्नी अफशां गुरु के अलावा अफ़ज़ल गुरु को अभियुक्त बनाया गया.

अफ़ज़ल की फांसी बन गई जेएनयू की फांस

मामले के ट्रायल के दौरान कुल 90 लोगों को घटना के गवाह के रूप में पेश किया गया जिसमे 10 बचाव पक्ष के थे जबकी 80 अभियोजन पक्ष के.

निचली अदालत ने अफ़ज़ल गुरु के अलावा शौकत हुसैन और गिलानी को दोषी पाया था जबकि शौकत की पत्नी अफशां उर्फ़ नवजोत संधू को हमले से जुड़े मामलों में से सिर्फ़ एक में दोषी क़रार देते हुए पांच साल की सज़ा सुनाई गई थी.

अफशां गुरु के अलावा बाक़ी के तीन अभियुक्तों को मौत की सज़ा सुनाई गई थी जिसके ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में अपील दायर की गई थी.

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वर्ष 2003 में दिल्ली हाई कोर्ट ने गिलानी और अफशां गुरु को आरोपों से बरी कर दिया था जबकि अफ़ज़ल गुरु और शौकत हुसैन की फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा गया.

2005 में अपनी वकील नंदिता हक्सर के वसंत इन्क्लेव स्थित घर के बाहर गिलानी पर गोलियां चलाई गई थीं जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

हमलावर अज्ञात थे, लेकिन इसको लेकर दिल्ली पुलिस पर उंगलियां उठाई जाने लगीं. बाद में दिल्ली पुलिस ने इसका खंडन किया.

अफ़ज़ल गुरु को 9 फ़रवरी 2013 को फांसी दी गई थी.

मुंबई ट्रेन सीरियल धमाके 2006

जुलाई की 11 तारीख़ को मुंबई की जीवन रेखा मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिले वार धमाकों में 209 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.

इन हमलों की साज़िश के पीछे प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया यानी सिम्मी के अलावा चरमपंथी गुट, लश्कर-ए-क़ह्हार, अल क़ायदा और लश्कर-ए-तय्यबा का हाथ बताया जाता है.

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हालांकि इन धमाकों के सिलसिले में 350 से ज़्यादा लोगों को जांच के लिए हिरासत में लिया गया, 12 लोगों को दोषी पाया गया.

वर्ष 2015 में दोषी ठहराए गए लोगों में से पांच को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी. इनमें नावेद ख़ान, एहतेशाम सिद्दीक़ी, कमाल अंसारी, आसिफ़ ख़ान और फ़ैसल शेख़ शामिल हैं. दोषी पाए गए सात लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई.

अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाके 2008

इन सिलसिलेवार बम धमाकों से अहमदाबाद दहल उठा था और इसमें 56 लोग मारे गए थे जबकि 200 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे. इन धमाकों की ज़िम्मेदारी इंडियन मुजाहिद्दीन और हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी नाम के चरमपंथी संगठनों ने ली थी.

कौन से मामले थे सिमी सदस्यों पर?

गुजरात एटीएस यानी आतंकवाद निरोधी दस्ते ने धमाकों के संदिग्ध मुफ़्ती अबू बशीर के साथ नौ लोगों को गिरफ्तार किया. पिछले साल लगभग आठ सालों के बाद धम्मको के एक और आरोपी, नासिर रंगरेज को भी पकड़ा गया था.

धमाकों के फ़ौरन बाद गुजरात के सुरेंद्रनगर ज़िले से तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमे हुसैन इब्राहीम, हासिल मोहम्मद और अब्दुल क़ादिर शामिल हैं.

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इन धमाकों के सिलसिले में दायर की गई चार्जशीट में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया यानी सिम्मी के मुफ़्ती बशर, सफ़दर मंसूरी और सफ़दर नागोरी के अलावा 50 और लोगों को अभियुक्त बनाया गया.

धमाकों के सिलसिले में गुजरात पुलिस के विशेष दस्ते ने कुल 70 आरोपियों गिरफ्तार किया है.

पुलिस के आरोप पत्र के अनुसार 16 आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. इनमें धमाकों का मुख्य आरोपी अब्दुल सुभान भी शामिल है.

जयपुर सिलसिलेवार बम धमाके 2008

इन धमाकों में पर्यटन स्थलों को निशाना बनाया गया था जिसमें 63 लोग मारे गए थे और क़रीब 216 लोग ज़ख़्मी हुए थे.

संजरपुर: अब भी बटला हाउस 'एनकाउंटर' की गूंज

इन धमाकों की ज़िम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन नाम के संगठन ने मीडिया को भेजे गए इ-मेल के ज़रिए ली थी.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के शक के दायरे में बांग्लादेश से काम करने वाले चरमपंथी संगठन 'हरकत उल जिहाद अल इस्लामी' यानी हूजी भी आ गई.

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कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. कई को छोड़ भी दिया गया. मगर 14 लोगों पर पुलिस ने इन धमाकों के सिलसिले में आरोप लगाए.

इनमें से 10 कोटा से गिरफ्तार किए गए जबकि दो जोधपुर, एक बारन और एक झालावाड़ से गिरफ्तार हुआ.

निचली अदालत में मामला चला और फिर राजस्थान उच्च न्यायलय में.

वर्ष 2011 के दिसंबर माह में उच्च न्यायालय ने 14 आरोपियों को बरी कर दिया.

10 आरोपियों को फ़ौरन रिहा कर दिया गया जबकि चार के ख़िलाफ़ गुजरात और मध्य प्रदेश में अलग मामलों के लंबित होने की वजह से उन्हें जेल से रिहा नहीं किया गया.

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बम धमाकों के सिलसिले में कुल 48 गवाहों को पेश किया गया जिनमें 43 के बयान दर्ज किए गए. मगर इनमें से 38 गवाह मुकर गए.

अजमेर दरगाह धमाका 2007

वर्ष 2007 में 11 अक्टूबर की शाम अजमेर में सूफ़ी संत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर हुए धमाके में तीन लोगों की मौत हुई थी जबकि 15 लोग घायल हो गए थे. एनआईए की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई इसी साल 6 फ़रवरी को पूरी कर ली गई जिसमें घटना के 149 चश्मदीदों के बयानों को दर्ज किया गया.

कभी साबित हो पाएंगे 'हिंदू आतंक' से जुड़े तार?

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एनआईए ने 13 लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दायर किया है जिनमें से ज्यादातर लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे. इनमें स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर लेवे, लोकेश शर्मा, मुकेश वसनि, भरत मोहनलाल रतिश्वर, संदीप डांगे, रामचंद्र भावेश भाई पटेल, सुरेश नायर और मेहुल के नाम शामिल हैं. वहीं मामले के एक और अभियुक्त सुनील जोशी की रहस्यमय परिस्थितियों में गोली मारकर हत्या कर दी गई.

सभी अभियुक्त न्यायिक हिरासत में हैं. हालांकि स्वामी असीमानंद को ज़मानत मिल गई थी, मगर उनके ख़िलाफ़ दूसरे मामले लंबित होने की वजह से वो जेल से बाहर नहीं निकल पाए.

मालेगांव बम धमाके 2006

महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में 2006 के आठ सितंबर को हुए धमाकों में 37 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 125 लोग घायल हो गए थे. ये धमाके एक क़ब्रिस्तान से लगी एक मस्जिद के पास 'शब ए बारात' के दिन हुए थे.

शुरू में महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते यानी एटीएस ने हमलों के लिए प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया यानी सिमी को ज़िम्मेदार ठहराया था.

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मगर 2013 में जो आरोप पत्र अदालत में दायर किया गया उसमे. अभिनव भारत नाम के संगठन को इस हमले के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया.

पुलिस ने सिमी के एक कार्यकर्ता नूरुल होदा को गिरफ्तार भी किया. दूसरे अभियुक्तों की पहचान शब्बीर बैटरीवाला और रईस अहमद के रूप में की गई.

इस मामले की जांच में कई पेंच फंसने लगे और जांच का ज़िम्मा एनआईए को सौंप दिया गया.

एनआईए की जांच में मामला बिल्कुल उलट गया और अभिनव भारत के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनकी पहचान लोकेश शर्मा, धन सिंह, मनोहर सिंह और राजेंद्र चौधरी के रूप में की गई.

शुरू में मालेगांव धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए आठ मुस्लिम युवकों को मकोका की विशेष अदालत ने रिहा कर दिया.

मामले में मुख्य अभियुक्त बनाए गए अभिनव भारत के सदस्य शिवनारायण कालसंग्रा और श्याम साहू को मुंबई हाई कोर्ट ने फ़िलहाल ज़मानत दे दी है क्योंकि एनआईए का कहना है कि उनके ख़िलाफ़ साक्ष्य कमज़ोर हैं.

इन धमाकों के सिलसिले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भी तीन और लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया.

मगर जांच एजेंसी एनआईए ने अदालत को कहा है कि अनुसंधान में साध्वी के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिल पाए हैं इसलिए उनके खिलाफ आरोपों को ख़ारिज कर दिया जाए.

एक अन्य आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित के बारे में भी सरकारी वकील द्वारा अदालत को कहा गया है कि वो सेवा में हैं और इसलिए वो अपनी सरकारी ड्यूटी पर थे.

समझौता एक्सप्रेस ट्रेन धमाका

18 फरवरी, 2007 की रात को दिल्ली से लाहौर जाने वाली समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाके में 68 लोग मारे गए थे जबकि 12 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.

शुरू में इस मामले में इस्लामी चरमपंथी गुटों का हाथ होने की बात कही जा रही थी.

मगर बाद में सुरक्षा एजेंसियों ने इस धमाके में अभिनव भारत नाम के संगठन का हाथ होने की बात कही.

धमाकों के सिलसिले में कुल आठ लोगों को अभियुक्त बनाया गया था जिनमें से चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया.

इनमें स्वामी असीमानंद, कमल चौहान, राजेंद्र चौहान और लोकेश शर्मा शामिल हैं.

मामले के एक अन्य अभियुक्त सुनील जोशी की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी जबकि रामचंदर कालसंग्रा, संदीप डांगे अभी तक फ़रार बताए जाते हैं.

मक्का मस्जिद धमाका, हैदराबाद 2007

यह धमाका शहर के चारमीनार इलाक़े के पास स्थित मस्जिद के वज़ुख़ाने में हुआ था जिसमें 16 लोग मारे गए थे.

इनमें वो पांच लोग भी शामिल हैं जिनकी मौत घटना के बाद उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली लगने से हुई. शुरुआत में इस धमाके को लेकर चमपंथी संगठन हरकतुल जमात ए इस्लामी यानी हूजी पर शक की उंगलियां उठीं.

लगभग 50 से ज़्यादा मुसलमान युवकों को इस धमाके के सिलसिले में हिरासत में लिया गया. आंध्र प्रदेश का आतंकवाद निरोधी दस्ता सहित, नेशनल इंवेस्टिगेटिंग एजेंसी (एनआईए) और सीबीआई ने मामले की अलग-अलग जांच की.

मक्का मस्जिद के निर्दोषों पर फिर गिरी गाज

मगर तीन सालों के बाद यानी 2010 में पुलिस ने 'अभिनव भारत' नाम के संगठन से जुड़े स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार किया.

गिरफ्तारी के बाद स्वामी असीमानंद ने ऐसा बयान दिया जिसने सबको चौंका दिया. उन्होंने धमाकों में गिरफ्तार किए गए मुसलमान लड़कों से सुहानुभूति जताते हुए कहा कि वो युवक बेक़सूर हैं.

इस मामले में गिरफ्तार किए गए युवक जागीरदार, अब्दुल नईम, मोहम्म्द इमरान खान, सईद इमरान, जुनैद और रफीउद्दीन अहमद को अदालत ने बरी कर दिया.

बाद में आंध्र प्रदेश के अल्पसंख्यक आयोग ने 61 ऐसे मुसलमान युवकों को बाद में उनकी बेगुनाही के सेर्टिफ़िकेट भी दिए.

स्वामी असीमानंद के अलावा 'अभिनव भारत' से जुड़े लोकेश शर्मा, देवेंद्र गुप्ता और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को इस धमाके का अभियुक्त बनाया गया.

इन अभियुक्तों में से कुछ समझौता एक्सप्रेस और मालेगांव धमाकों के भी अभियुक्त बनाए गए हैं.

हालांकि एनआईए ने अदालत में कहा है कि उसे लोकेश शर्मा और देवेंद्र गुप्ता के ख़िलाफ़ ज़्यादा सबूत नहीं मिल पाए हैं.

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