कितना गुलाबी रह गया है गुलाबी शहर जयपुर?

  • 4 मार्च 2017
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सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने साल 1727 में जयपुर शहर बसाया था. इसे आप देश का पहला सुनियोजित स्थापत्य वाला शहर मान सकते हैं.

वर्ष 1876 में प्रिन्स ऑफ़ वेल्स के जयपुर आगमन के मौके पर तत्कालीन महाराजा राम सिंह ने उनके स्वागत के लिए पूरे शहर को गुलाबी रंग से सजाया था.

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Image caption जयपुर का सांगानेरी गेट

जयपुर की चारदीवारी के सभी आठ प्रमुख दरवाजे- अजमेरी गेट, सांगानेरी गेट, घाटगेट, सूरज पोल, चाँद पोल, जोरावर सिंह गेट, गंगा पोल आदि गुलाबी रंग में रंग दिए गए थे.

साथ ही शहर के प्रमुख आकर्षण हवा महल, टाउन हॉल और चारदीवारी के सभी बाज़ार, दुकानें, हवेलियाँ, मंदिर आदि भी गुलाबी हो गए थे.

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Image caption जयपुर का मशहूर हवा महल

जयपुर की चारदीवारी में आज भी इमारतों पर गुलाबी रंग की ही इजाज़त है. पर गुलाबी के कई रंग देखकर सैलानी चकित हो सकते हैं कि आखिर कौन सा गुलाबी रंग असली है?

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Image caption जयपुर का किशनपोल बाज़ार

समय के साथ बार-बार पुताई होने के कारण इमारतों में गुलाबी रंग के कई रूप देखने को मिल जाते हैं. कहीं हल्का, तो कहीं गहरा गुलाबी तो कहीं गहरा गेरुआ तो कहीं एकदम बदरंग. कहीं-कहीं तो एक ही इमारत की हर मंजिल पर एक अलग रंग मिलेगा.

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Image caption जयपुर का जौहरी बाज़ार

हैरिटेज संरक्षण के प्रति जागरूकता की कमी कहिए, या आर्थिक तंगी या सरकारी अनदेखी, गेरुए (टेराकोटा) गुलाबी के अलावा भी कई रंग यहाँ देखे जा सकते हैं.

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Image caption जयपुर का रामगंज बाज़ार

शहर के बुज़ुर्ग त्रिलोकी दास खंडेलवाल कहते हैं कि पुराना गुलाबी रंग अपनी रंगत खो चुका है और किशनपोल बाज़ार की इक्का-दुक्का इमारतों को छोड़कर ये रंग अब देखने को नहीं मिलता.

वक्त, मौसम के मिज़ाज़ और परत दर परत चढ़ते रंग ने जयपुर को अलग ही रंग में रंग लिया है. पर फिर भी यह और शहरों से बहुत ख़ास है.

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