प्रेस रिव्यू: दलाई लामा के दौरे पर चीन ने भारत को चेताया

  • 4 मार्च 2017
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Image caption दलाई लामा

हिन्दुस्तान अख़बार ने लिखा है कि चीन तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के प्रस्तावित अरुणाचल दौरे से बौखला गया है. चीन ने भारत को आगाह किया है कि अगर दलाई लामा अरुणाचल गए तो रिश्तों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और विवादित सीमा क्षेत्र में शांति के माहौल को धक्का पहुंचेगा. लेकिन भारत सरकार ने चीन की आपत्ति को नज़रअंदाज़ कर दिया है.

आठ सालों के बाद दलाई लामा 4 से 13 अप्रैल के बीच अरूणाचल के दौरे पर होंगे. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने शुक्रवार को कहा कि दलाई को अरुणाचल दौरे की इजाजत मिलने की खबरों से उनका देश चिंतित है. गेंग ने कहा कि भारत दलाई लामा और सीमा विवाद की गंभीरता को समझता है और आधिकारिक आपत्ति भारत के समक्ष दर्ज करा दी है.

चीन अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत का ही हिस्सा मानता है और वहां शीर्ष नेताओं, अधिकारियों और विदेशी राजनयिकों के दौरों का विरोध करता रहा है. चीन दलाईलामा को भी विद्रोही नेता मानता है और उन पर तिब्बत की आज़ादी के लिए आंदोलन चलाने का आरोप लगाता रहा है.

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जनसत्ता अख़बार की पहली ख़बर है दिल्ली सरकार ने राजधानी में न्यूनतम मज़दूरी 13,350 रुपए प्रतिमाह करने का फ़ैसला किया है. सरकार का दावा है कि यह देश में सबसे ज़्यादा होगी. दिल्ली सरकार के इस पुराने फ़ैसले को नए उपराज्यपाल ने मंज़ूरी दे दी है. नजीब जंग ने इस प्रस्ताव को पास करने से इनकार किया था.

मज़दूर यूनियन और अन्य सामाजिक संस्थाएं समय-समय पर न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने की मांग करती रही हैं. इन्हीं को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने 70वें स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने का फैसला किया था.

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दैनिक जागरण अख़बार की पहली ख़बर है सुप्रीम कोर्ट ने किसानों की आत्महत्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है. किसान की मौत के बाद पीड़ित परिवार को मुआवज़ा दे देना समस्या का हल नहीं है. इसके बदले ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीति बनाने की जरूरत है.

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि समस्या से निपटने के लिए सरकार गलत दिशा में भटक रही है. अगर सही दिशा में कोशिश हुई, तो बहुत कुछ हासिल हो सकता है. कोर्ट ने सरकार से इस बाके में ठोस योजना तैयार कर पेश करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी.

शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की. याचिका में किसानों की आत्महत्या का मुद्दा उठाया गया है.

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