गर क़ानून होता तो करण जौहर पापा न बन पाते

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क्या होता अगर सरोगेसी क़ानून जैसी चीज़ अस्तित्व में होती. सीधी-सी बात है- करण जौहर और तुषार कपूर इतनी आसानी से (बिना शादी किए) पापा नहीं बन पाते.

आमिर ख़ान और शाहरुख ख़ान के लिए भी सरोगेसी का सहारा लेकर मम्मी-पापा बनना मुश्किल होता.

तुषार ने पिछले साल जून में दुनिया को बिना शादी किए अपने पिता बनने की खुशख़बरी दी थी.

आमिर ख़ान और किरण राव की जोड़ी ने साल 2011 के दिसंबर में अपने पहले बच्चे का स्वागत किया था जो सरोगेसी के सहारे दुनिया में आया था.

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जून, 2013 में शाहरुख और गौरी ख़ान ने अपने तीसरे बच्चे को एक सरोगेट मां के जरिए जन्म दिया.

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि करण, तुषार, आमिर और शाहरुख़ ने सरोगेसी का सहारा लेकर कोई ग़ैरक़ानूनी काम किया है.

बात बस इतनी भर है कि भारत में सरोगेसी को लेकर फ़िलहाल कोई तयशुदा नियम क़ानून मौजूद नहीं है.

हालांकि सरोगेसी (रेग्युलेशन) बिल- 2016 को कैबिनेट ने अगस्त, 2016 में ही मंज़ूरी दी थी पर अभी ये हक़ीक़त से दूर है.

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सरोगेसी (रेग्युलेशन) बिल, 2016 की ख़ास बातें

  • प्रस्तावित सरोगेसी कानून किराए पर कोख लेने यानी किसी तरह के पैसे के लेन-देन को प्रतिबंधित करता है.
  • समलैंगिक जोड़े, लिव-इन कपल और बैचलर व्यक्ति सरोगेसी के सहारे संतान सुख नहीं ले सकते.
  • 23-50 साल की उम्र वाले जोड़े ही मां-बाप बनने के लिए सरोगेसी का सहारा ले सकेंगे.
  • संतान चाहने वाले जोड़ों को क़ानूनी तौर पर कम से कम पांच सालों से शादीशुदा होना होगा.
  • ऐसे दंपति को पहले से कोई बच्चा न हो. वो बच्चा चाहे गोद लिया हो या फिर पैदा किया हो या सरोगेसी से हासिल किया हो.
  • वे दंपति सरोगेसी का सहारा ले सकेंगे जिनकी जीवित संतान मानसिक या शारीरिक तौर पर अस्वस्थ हो या उसे ठीक न हो सकने वाली कोई जानलेवा बीमारी हो.
  • सरोगेट मां संतान चाहने वाले दंपति की क़रीबी रिश्तेदार हों और उसकी उम्र 25 से 35 के क़रीब हो.

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