क्यों नहीं बिक रहा माल्या का किंगफिशर विला?

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भगोड़े घोषित किए गए कारोबारी विजय माल्या के मुंबई स्थित किंगफिशर हाउस और गोवा स्थित किंगफिशर विला के लिए सोमवार को लगी बोली में कोई भी ख़रीदार नहीं मिला.

ये दोनों माल्या की बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के दफ्तर हैं. पहले भी तीन बार इनकी नीलामी की कोशिश की गई थी, लेकिन तब भी किसी ने इन्हें ख़रीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

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स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की अगुवाई वाले कंसोर्टियम ने किंगफिशर को लगभग 9,000 करोड़ रुपए का कर्ज़ दिया था. बैंक इन संपत्तियों की नीलामी कर वसूली करना चाहते हैं.

नीलामी में ख़रीदार न मिलता देख इस बार मुंबई में विलेपार्ले स्थित किंगफिशर हाउस की रिज़र्व कीमत पिछली बार से 10 प्रतिशत कम रखी गई थी. पिछली बार रिज़र्व कीमत 115 करोड़ थी जो घट कर 103 करोड़ 50 लाख के करीब थी.

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विलेपार्ले में किंगफिशर हाउस की जगह 17000 वर्ग फुट के करीब है और हवाई अड्डे के पास होने की वजह से पहली नीलामी में रिजर्व कीमत 150 करोड़ के करीब रखी गई थी. लेकिन कोई खरीददार नहीं मिलने पर दूसरी नीलामी के लिए कीमत घटाकर 135 करोड़ रुपए कर दी गई थी.

इसके बावजूद नीलामी में हिस्सा लेने एक भी खरीददार नहीं आया था. बैंकों की ओर से एसबीआई कैपिटल नीलामी का जिम्मा उठा रहा है.

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समाचार एजेंसियों ने स्टेट बैंक के अधिकारियों के हवाले से बताया, "किंगफिशर हाउस की लोकेशन बहुत अच्छी है, लेकिन अर्थव्यवस्था में अभी उछाल नहीं आया है और रियल एस्टेट बाज़ार भी बुरे दौर में है. इसके अलावा भारत में लोग ऐसी संपत्तियों को ख़रीदने से बचते हैं, जिनमें उन्हें किसी तरह के कानूनी पचड़ों की आशंका रहती है."

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दिसंबर में गोवा के किंगफिशर विला को भी नीलाम करने की प्रक्रिया अपनाई गई थी और तब इसकी रिजर्व कीमत 81 करोड़ थी, इस बार इसकी रिज़र्व कीमत में भी 10 फ़ीसद की कटौती कर 73 करोड़ रुपये रखा गया था.

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