यूपी चुनावः विदेशी भी रख रहे हैं नज़र

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यूपी चुनावों के बारे में क्या कहते हैं विदेशी

बनारस भारत का एक ऐसा शहर है जहां बड़े पैमाने विदेशी सैलानी आते हैं. वो आम तौर पर यहां अध्यात्म की तलाश में आते हैं.

अब जब वहां चुनावी माहौल की गहमा-गहमी है तो निश्चित तौर पर उन्हें आध्यात्म के अलावा भारत में होने वाले चुनाव प्रक्रिया का भी अनुभव हो रहा है.

बनारस पहुंचे ऐसे ही कुछ विदेशी सैलानियों ने बीबीसी से अपने अनुभव साझा किए.

एंटोनिएट - इटली

मैंने पूरा भारत घूमा है और मैं भारत आती-जाती रहती हूं. बनारस मुझे बहुत पसंद है. मैंने थोड़ा बहुत चुनाव प्रचार देखा और लगा कि यहां लोग बहुत फुर्तीले हैं.

ग़रीब लोग नरेंद्र मोदी को पसंद करते हैं. लोगों को उम्मीद है कि मोदी स्थिति को बदलेंगे. मैंने कांग्रेस के लोगों से बात की और मैंने उन्हें बताया कि नरेंद्र मोदी आपसे मज़बूत हैं.

उन्होंने इस बात से इनकार किया. इटली और भारत में जिस तरह चुनाव होते हैं वो बहुत अलग हैं.

Image caption एंटोनिएट

इटली में हमारे पास अच्छे नेता नहीं हैं. हमारे यहां दक्षिणपंथी और वामपंथी दोनों तरह के दल हैं.

भारत में मुझे लगता है मोदी बहुत काम कर रहे हैं. दिसंबर में जिस तरह उन्होंने नोटबंदी की घोषणा की उससे मुझे बहुत समस्या हुई थी, लेकिन मैंने पाया कि कई लोगों का मानना था कि इससे भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिलेगी.

फ़ेडेरिको - स्कॉटलैंड

मैं भारत आता जाता रहता हूं. मैं रिटायर्ड हूं और बनारस मुझे पसंद है. जिस तरह मोदी मशहूर हैं, उसे देखकर मैं स्तब्ध हूं.

जब उन्होंने नोटबंदी की घोषणा की थी तो मैं दक्षिण भारत में था और मैंने देखा कि किस तरह गरीब लोगों को परेशानी हुई.

लेकिन इसके बावजूद लोगों ने इसे ऐसे कदम की तरह देखा जिससे भ्रष्टाचार ख़त्म होगा.

Image caption फ़ेडेरिको

जिस तरह मोदी सरकार की ओर से सांप्रदायिक बातें होती हैं, इससे मुझे चिंता होती है.

जिस तरह कांग्रेस का राजनीति पर दबदबा था और उसके कार्यकाल में ब्राह्मणों ने लोगों को शोषण किया गया, मुझे समझ में आता है कि क्यों मोदी मशहूर हैं.

हर जगह मीडिया चुनाव को कंट्रोल करता है. स्कॉटलैंड में आज़ादी को लेकर जनमत संग्रह हुआ लेकिन मीडिया ने स्कॉट विरोधी भावनाओं को भड़काया.

लोगों से पूछा गया कि उनकी पेंशन कहां से आएगी?

जॉन गोरेकी - पोलैंड

Image caption जॉन गोरेकी

पांच साल पहले मैं छह महीने के लिए भारत आया था. पिछले डेढ़ महीने से मैं वाराणसी में हूं.

ये दुनिया के बेहतरीन शहरों में से एक है. यहां जीवन और मृत्यु का चक्र आपके सामने होता है. दूसरे शहरों में मृत्यु को छिपाकर रखा जाता है.

मैंने चुनाव बहुत फॉलो नहीं किया लेकिन मुझे पता है कि वाराणसी मोदी का शहर है. भारत में चुनाव को लेकर बहुत उत्साह है.

पोलैंड में ऐसा नहीं है. वहां ज़्य़ादातर लोग वोट भी नहीं देते. यहां चुनाव एक बड़ा आयोजन है. पोलैंड में कुछ बदल नहीं रहा है. वहां लोगों को राजनीतिज्ञों में भरोसा नहीं है.

भारत में लोग बदलाव में विश्वास रखते हैं. पोलैंड में शायद लोग नरेंद्र मोदी को नहीं जानते हैं लेकिन वो दुनिया के मशहूर राजनेताओं में से हैं.

मैंने देखा है कि यहां रैलियों के दौरान दुकानों को बंद कर दिया जाता है. मुझे यहां की सुरक्षा स्थिति का पता नहीं है लेकिन इससे लोगों को बहुत असुविधा होती है.

अगर दुकानों को खुला रखा जाए तो शायद लोगों को परेशानी नहीं होगी.

पैट्रिक कैंपबेल- इटली

Image caption पैट्रिक कैंपबेल

मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं. मैं भारत बांसुरी सीखने आया हूं. मैं नौ बार भारत आ चुका हूं और इसलिए मुझे भारत से प्रेम है.

ये मेरे घर जैसा है. मैं हिंदी सीखना चाहूंगा. मैं इटली के एक शॉपिंग सेंटर में लॉजिस्टिक मैनेजर था लेकिन मैं अपनी नौकरी छोड़कर यहां आ गया क्योंकि मैं ज़िंदगी की शुरुआत एक नए तरीके से करना चाहता था.

इटली में लोगों को राजनीति में बहुत भरोसा नहीं है. राजनेता पैसा ले लेते हैं लेकिन काम नहीं करते. यहां लोग सड़कों पर निकलते हैं और जोश दिखाते हैं.

इटली में राजनेता सड़कों पर नहीं निकलते. वो टीवी का सहारा लेते हैं. वहां चुनाव के दौरान शांति रहती है. जब लोग सड़कों पर निकलते हैं, नारे लगाते हैं, ये देखकर मुझे अच्छा लगता है.

इसका कारण शायद ये कि भारत में पिछले कुछ सालों में हालात बेहतर हुए हैं, जीवन का स्तर सुधरा है.

इसलिए लोगों को लगता है कि राजनीति देश को बदल सकती है. लोग कहते हैं कि वाराणसी गंदा है, लेकिन मुझे ये शहर ऐसे ही पसंद है.

यहां हर चीज़ आपके सामने है. कुछ भी छिपा नहीं है. लोग कहते हैं कि गायों को सड़कों से हटा दो लेकिन मुझे ये बात पसंद नहीं. गायें भारत का हिस्सा हैं.

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