'शास्त्री के घर जाने से मोदी को कुछ फ़ायदा संभव'

  • 7 मार्च 2017

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे और कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री का कहना है कि उनके पिता और सरदार पटेल जैसे नेताओं को अहमियत देने से भारतीय जनता पार्टी को कुछ लाभ मिल सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को वाराणसी में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पुश्तैनी मकान गए थे.

वाराणसी में पार्टी के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे मोदी लाल बहादुर शास्त्री के पुश्तैनी मकान पर करीब 20 मिनट तक रुके थे.

प्रधानमंत्री मोदी पूर्व उप प्रधानमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति भी आदर दिखाते रहे हैं.

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मोदी के दौरे से भारतीय जनता पार्टी को लाभ की संभावना से जुड़े सवाल पर अनिल शास्त्री ने कहा, "थोड़ा बहुत तो फ़ायदा ज़रूर होगा. जनता के मन में था कि इन बड़े नेताओं को जो स्थान मिलना चाहिए था नहीं मिला. और जब वो देखते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ऐसा कर रही है तो उनके मन में लगता है कि वो ठीक काम कर रहे हैं."

हालांकि अनिल शास्त्री ये भी कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के पास लाल बहादुर शास्त्री, सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेता कभी नहीं रहे. यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी उन्हें आगे रखकर राजनीति करती है.

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Image caption पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री

वो कहते हैं, "सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और लाल बहादुर शास्त्री की विश्वसनीयता, ईमानदारी और सोच पर कभी प्रश्नचिन्ह नहीं लगा.ऐसे नेता उनकी पार्टी में कभी रहे नहीं. वो ऐसे नेताओं की तलाश करके उनको आगे रखकर राजनीति कर रहे हैं."

अनिल शास्त्री का ये भी दावा कि कांग्रेस ने भी लाल बहादुर शास्त्री को पूरी अहमियत दी है.

वो कहते हैं, "हमारी पार्टी में कोई कमी तो रही नहीं. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लाल बहादुर शास्त्री स्मारक भवन का उद्घाटन किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी कोई काम करते हैं वो बड़ा शोर-शराबे और प्रचार के साथ करते हैं शायद इसलिए वो नज़र आ जाता है. "

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अनिल शास्त्री चुनाव के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल बहादुर शास्त्री के घर जाने पर भी सवाल उठाते हैं. वो कहते हैं कि इस समय वहां जाने का उद्देश्य थोड़ा संदेहपूर्ण हो जाता है.

उन्हें इस बात का भी मलाल है कि केंद्र सरकार लाल बहादुर शास्त्री के नाम का तो इस्तेमाल करती है लेकिन उनके नाम पर कोई रचनात्मक कदम नहीं उठाती.

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वो कहते हैं, "प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार करीब पौने तीन साल बाद वो शास्त्री जी के पुश्तैनी मकान पर पहुंचे. इसके पहले तो कभी गए नहीं. शास्त्री जी का नाम प्रधानमंत्री मन की बात में लेते हैं. उनकी महानता के बारे में बताते हैं लेकिन मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद शास्त्री जी की स्मृति में कोई ऐसा कार्यक्रम, कोई योजना, नहीं आई."

अनिल शास्त्री चाहते हैं कि सरकार लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर तकनीकी संस्थानों की चेन शुरु करें.

वो पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री की मौत से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग भी करते हैं.

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