समाजवादी नेता रबी रे नहीं रहे

  • 7 मार्च 2017
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समाजवादी नेता और लोकसभा के पूर्व स्पीकर रबी रे का सोमवार दोपहर को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया.

91 साल के रबी रे का कटक के मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा था.

उनके परिवार में उनकी पत्नी डॉ सरस्वती स्वायन हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और गवर्नर समेत सभी प्रमुख दलों के नेताओं ने रबी रे के निधन पर शोक जताया है.

उनका अंतिम संस्कार पुरी के पास उनके पैतृक गांव में किया जाएगा.

उनके निधन की ख़बर फैलते ही उन्हें चाहने वाले सैकड़ों की तादाद में अस्पताल के पास जमा हो गए.

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Image caption ओडिशा के आठगढ़ से 6 बार विधायक चुने गए रणेंद्र कुमार स्वाईं सोमवार सुबह रबी रे का हालचाल जानने कटक मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे. उन्होंने कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं.

छात्र जीवन से ही राजनीति

उनका शव एक शोभायात्रा की शक्ल में रेवेनशॉ यूनिवर्सिटी और एम एस लॉ कॉलेज ले जाया गया जहां वो कभी छात्र रहे थे.

उनके राजनीतिक करियर की शुरूआत भी इन्हीं संस्थानों से छात्र नेता के रूप में हुई थी.

साल 1947 के शुरुआती दिनों में रबी रे ने रेवेनशॉ कॉलेज की मजेस्टिक बिल्डिंग पर तिरंगा फहराया था. इसके लिए उन्हें गिरफ़्तार कर जेल में डाल दिया गया.

समाजवादी आंदोलन से जुड़ने की प्रेरणा उन्हें राममनोहर लोहिया से मिली और उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी का गठन किया.

1967 में वो पहली बार पुरी से लोकसभा के लिए चुने गए और 1974 में ओडिशा से राज्यसभा में पहुंचे. मोरारजी देसाई की सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली.

1989 में लोकसभा का चुनाव जीतने पर उन्हें सर्वसम्मति से स्पीकर चुना गया. ये वो दौर था जब लोकसभा में किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला था और कांग्रेस पार्टी विपक्ष में थी.

सक्रिया राजनेता होने के साथ साथ रबी रे सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों में भी खूब सक्रिय रहे. उन्होंने कई संस्थाओं की नींव डाली और लंबे समय तक उनका नेतृत्व किया. इसके अलावा साहित्य में भी उनका ख़ासा दखल रहा है.

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