भारत में कथित इस्लामिक स्टेट की जड़ें कितनी गहरी?

  • 8 मार्च 2017
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ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन के कथित संदिग्ध सदस्य मोहम्मद सैफ़ुल्ला की लखनऊ में मुठभेड़ में मौत और उसके कुछ कथित साथियों की गिरफ़्तारी से एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.

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यह सवाल पिछले साल उस समय भी उठा था, जब केरल से मुस्लिम युवाओं का एक गुट अचानक ग़ायब हो गया था. अटकलें लगीं थी कि वे सीरिया जा कर इस्लामिक स्टेट से जुड़ गए हैं.

यही सवाल केरल, महाराष्ट्र, हैदराबाद और कर्नाटक में कई मुस्लिम युवाओं की गिरफ़्तारियों के बाद भी उठा था.

'भारत के मुसलमानों को जिहाद छेड़ देना चाहिए'

Image caption मोहम्मद सैफ़ुल्ला, पिता सरताज अहमद से लड़ कर मुंबई चले गए थे

दिल्ली की चरमपंथ मामलों की शोध संस्था इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉन्फ़्लिक्ट मैनेजमेंट के निदेशक अजय साहनी का मानना है कि ऐसा कभी नहीं होगा.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "अंदाज़ा लगाएं कि 1996 से अल-क़ायदा यहाँ अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहा है. उस साल ओसामा बिन लादेन का बयान आया था कि भारत का मुसलमान बहुत परेशान है. भारत में जिहाद लाज़मी है और भारत के मुसलमान को जिहाद छेड़ देना चाहिए."

साहनी सवाल उठाते हैं, "उस ज़माने से आज तक भारत का कितना मुसलमान अल-क़ायदा से जुड़ा है, बता सकते हैं.?"

भारत में मौजूद आईएस मॉड्यूल

Image caption सैफ़ुल्ला की एक पुरानी तस्वीर

लेकिन साहनी यह ज़रूर मानते हैं कि इस्लामिक स्टेट के कुछ मॉड्यूल भारत में मौजूद हैं.

उनके अनुसार मुठ्ठी भर लोग बहकावे में आ गए हैं.

वे कहते हैं, "आप कोई भी मुहिम चला लीजिये, दो-चार लोग तो शामिल हो ही जाएंगे. लेकिन यह कोई बड़ी मुहिम बन जाएगी, मैं नहीं मानता."

लखनऊ में हुई मुड़भेड़ से पहले सैफ़ुल्ला के कुछ कथित साथियों को गिरफ़्तार किया गया था.

मंगलवार की सुबह मध्यप्रदेश में एक ट्रेन में हुए बम धमाके के बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया.

पुलिस के मुतबिक़, उनसे पूछताछ के बाद कानपुर में दो युवाओं को गिरफ़्तार किया गया. सैफ़ुल्ला को गिरफ़्तार करने की कोशिश की गई. उन्होंने आत्मसमर्पण करने से इंकार कर दिया. वे मुड़भेड़ में मारे गए.

बहके हुए मुसलमान

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ट्रेन में हुए बम धमाके के कुछ घंटों के बाद ही पुलिस ने कैसे यह निष्कर्ष निकाल लिया कि गिरफ़्तार युवकों के रिश्ते इस्लामिक स्टेट से हैं?

अजय साहनी कहते हैं, "जब ये लोग पकड़े जाते हैं तो कभी-कभी सारा सच ज़ल्द उगल देते हैं." वे आगे कहते हैं कि गिरफ़्तार युवक ख़तरनाक और मंझे हुए चरमपंथी नहीं हैं.

वे कहते है, "ये ऐसे लोग हैं जो बहक गए हैं. मन में था, कुछ कर लें. लेकिन ऐसा लगता है कि इनका कोई बड़ा अनुभव नहीं था."

पिछले साल से अब तक अदालत ने चरमपंथ से जुड़े मुक़दमों में कई मुसलमान युवाओं को बरी कर दिया है.

इससे पहले मालेगांव बम धमाकों के सभी 9 मुस्लिम अभियुक्तों को भी अदालत ने बरी कर दिया था.

इसके बाद संसद में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा था कि जेलों में मुस्लिम क़ैदियों की संख्या 21 फ़ीसद है, जबकि देश में मुसलमानों की आबादी 14 प्रतिशत ही है.

बेवजह निशाना?

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मुस्लिम समुदाय में एक सोच है कि उनके युवाओं को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है.

अजय साहनी कहते हैं कि यह सही है कि कई मुस्लिम युवा बरी हुए हैं.

लेकिन यह भी एक हक़ीक़त है कि कुछ मुस्लिम युवा सीरिया गए और वे इस्लामिक स्टेट के लिए भारत के मुसलमानों को बरगलाने की कोशिश में लगे हैं.

अजय साहनी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अल-क़ायदा की तरह इस्लामिक स्टेट को भी भारत के मुसलमान नकार चुके हैं.

भारत को लेकर आईएस के वीडियो और रेडियो संदेश

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बीबीसी मॉनीटरिंग के अनुसार इस्लामिक स्टेट की दक्षिण एशिया शाखा, जिसे खुरासान शाखा के रूप में जाना जाता है, अफ़ग़ानिस्तान में काफी सक्रिय है.

यह एक रेडियो ख़िलाफ़त 90 एफ़एम रेडियो चैनल का संचालन भी करती है जिस पर हर दिन 1330 जीएमटी पर कुछ घंटों के लिए प्रसारण होता है.

18 दिसम्बर 2015 को हुए एक प्रसारण में चैनल ने अफ़ग़ानिस्तानी, पाकिस्तानी, भारतीय और ईरानी सरकारों को 'शैतानी सरकारें' बताया था.

मई 2016 में आईएस ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें भारतीय रंगरूटों को सीरिया में ट्रेनिंग लेते हुए दिखाया गया था और समर्थकों से अपने इलाके में आने की अपील की गई थी.

19 मई को जारी एक वीडियो में कई हिंदी भाषी सदस्यों को दिखाया गया था जिनमें दो का दावा था कि वो भारत छोड़ने के बाद आईएस में शामिल हुए और अफ़ग़ानिस्तान के पाकिस्तान से सटे इलाके में जिहाद में सक्रिय हैं.

29 अक्टूबर 2016 में एक अन्य रेडियो प्रसारण में कहा गया था, "अगर अरब नायकों के घोड़े दज़ला और फ़रात का पानी पी रहे हैं, तो जल्द ही खुरासान नायकों के घोड़े भी जल्द गंगा और यमुना का पानी पियेंगे."

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