121 साल की उम्र में पहली बार दिया वोट

  • 9 मार्च 2017
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Image caption बाबा शिवानंद के पास वोटर आईडी, पासपोर्ट और आधारकार्ड उनकी उम्र की पुष्टि करते हैं

सुनकर भले हैरानी हो, लेकिन ये सच है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देश के सबसे उम्रदराज़ और पूरी तरह से स्वस्थ बाबा शिवानंद ने 121 वर्ष की आयु में पहली बार मतदान किया.

यहां दो बातें चौंकाने वाली हैं. पहली बाबा शिवानंद की उम्र और दूसरा उनके पहली बार मतदान करने की वजह.

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Image caption 121 साल के शिवानंद ब्रह्मचारी जीवन जीते हैं

वाराणसी के भेलूपुर क्षेत्र के कबीर नगर कालोनी में स्वामी शिवानंद आश्रम में रहने वाले शिवानंद आज जब अपने अनुयायियो के साथ उत्तर प्रदेश चुनाव के अंतिम चरण के तहत वाराणसी शहर के दक्षिणी विधान सभा के लिए दुर्गाकुण्ड प्राथमिक स्कूल मतदान करने पहुँचे तो लोग हैरान रह गए.

ये पहला मौक़ा था जब शिवानंद अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि वे मौजूदा मोदी सरकार के कामकाज से काफी ख़ुश हैं और उनके भक्तों ने उनसे मतदान करने का निवेदन किया था, इसलिए वोट करने आए हैं.

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बाबा शिवानंद की इच्छा है कि सरकार ग़रीब, असहाय और बेघरों की मदद करे और उन्हें रोटी और छत दे. जो भी सरकार बने वो बदलाव लाए.

बाबा शिवानंद के पास अपने उम्र से जुड़े प्रमाण पत्रों में पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड भी है.

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8 अगस्त 1896 को अब बांग्लादेश में पड़नेवाले श्रीहट्ट ज़िले में जन्मे बाबा शिवानंद के मां-बाप काफ़ी ग़रीब थे और भीख माँगकर आजीविका चलाते थे.

वे जब चार साल के थे तो उनके माता-पिता ने उन्हें नवद्वीप निवासी बाबा श्री ओंकारनंद गोस्वामी को समर्पित कर दिया.

बाबा शिवानंद का जन्म 8 अगस्त 1896 को श्रीहट्ट जिला के हबिगँज महकुमा, ग्राम हरिपुर के थाना क्षेत्र बाहुबल में एक भीखारी ब्राह्मण गोस्वामी परिवार में हुआ था। मौजूदा समय में ये जगह बंगलादेश में स्थित है। उनके मां-बाप भिखारी थें और भीख मांगकर अपनी जीविका चलाते थें।

इसके बाद बचपन से ही उन्होंने अपने गुरूजी के सानिध्य में आध्यात्म की शिक्षा लेना शुरू किया और उन्हीं की प्ररेणा से ब्रह्मचारी बने.

बाबा शिवानंद को तेल-मसाले वाले खाने से परहेज है. उन्होंने विवाह नहीं किया.

उनके मुताबिक उनके गुरू जी की कृपा से उनको नो डिज़ायर, नो डिज़ीज़, नो डिप्रेशन और नो हाइपर टेंशन है.

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