टिकट नहीं मिला, छोड़ी चुनावी राजनीति

Image caption श्यामदेव राय बीजेपी से सात बार विधायक रहे हैं

जब वाराणसी के लोग मतदान कर रहे थे उसी वक़्त दक्षिण वाराणसी से सात बार बीजेपी विधायक रह चुके श्यामदेव राय चौधरी ने चुनावी राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी. इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया गया.

उनकी जगह नीलकंठ तिवारी को टिकट दिया गया जो एकदम नया और चौंका देने वाला नाम था. पार्टी के इस फ़ैसले के बाद 78 साल के श्यामदेव राय नाराज़ हो गए.

बुधवार को वाराणसी में मतदान हुआ, सात बार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत का तोहफा देने वाले श्यामदेव राय ने उसी दौरान चुनावी राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया.

बीबीसी से बातचीत के दौरान श्यामदेव राय ने कहा, "मैं अभी भी कह रहा हूं कि मैं भविष्य में चुनाव नहीं लड़ूंगा लेकिन यदि पार्टी कोई ज़िम्मेदारी देती है तो उससे भागूंगा भी नहीं."

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इस फ़ैसले को उनकी पार्टी से नाराज़गी के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन श्यामदेव इससे इनकार करते हैं.

उनका कहना है,"ये अब बीते दिनों की बात हो गई. अब मुझे कोई शिकवा-शिकायत नहीं है और शिकवे-शिकायत इतने दिनों तक टिके भी नहीं रहते. वो धीरे-धीरे ख़त्म हो जाते हैं."

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दक्षिण वाराणसी में श्यामदेव राय की छवि एक ऐसे नेता की रही है जो लोगों तक पहुंच रखते हैं और जिनसे मिलना आसान रहता है.

लेकिन इसके बावजूद विकास के मुद्दे पर वो लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे. इस बात पर श्यामदेव की अपनी दलील है.

वो कहते हैं, "बनारस विश्व के पुरातन नगरों में से एक है और इसकी विशेषताएं गलियों में बसती हैं. आप विश्वनाथ गली में प्रवेश करें वहां चार- पांच फुट की गलियां हैं और वहां की वही विशेषता है. कोई भी प्रत्याशी या कोई माई का लाल अगर कहे दे कि हम गलियों को चौड़ा कर देंगे और यहां चार पहिया वाहन चलने लगेगा तो वो एक नंबर का झूठ बोल रहा है."

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श्यामदेव का कहना है कि चुनाव प्रत्याशियों की फेहरिस्त में अपना नाम ना देखकर हैरान और फिर नाराज़ थे.

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के दौरान वाराणसी में थे तब श्यामदेव की उनके मुलाक़ात हुई, लेकिन क्या बात हुई ये वो बताना नहीं चाहते.

हालांकि कहा जा रहा है कि उन्हें मनाने की कोशिश की गई थी. श्यामदेव राय ने चुनावी राजनीति छोड़ने का ऐलान ज़रूर किया है लेकिन उनका कहना है कि वो मरते दम तक पार्टी के लिए काम करते रहेंगे.

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