टीपू की साइकिल पंचर करने में लगीं साधना

मुलायम सिंह और साधना यादव इमेज कॉपीरइट DINESH SHAKYA

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मां (सौतेली) साधना यादव के एक इंटरव्यू पर गहमागहमी शुरू हो गई है.

अखिलेश ने एक फ़रवरी से शुरू किए अपने प्रचार अभियान को सात मार्च को खत्म किया. इस दौरान उन्होंने लगभग सवा दो सौ रैलियों को संबोधित किया. लगभग सभी प्रमुख समाचार पत्रों और टीवी चैनलों को इंटरव्यू दिए.

लेकिन क्या उनके करोड़ों के प्रचार पर चंद मिनटों का एक इंटरव्यू भारी पड़ जाएगा?

साधना यादव ने आखिरी चरण के मतदान से एक दिन पहले एक टीवी एजेंसी को इंटरव्यू दिया था.

नज़रिया: 'अखिलेश ने अपनी मां का बदला लिया है'

'अब सारा दारोमदार मुलायम सिंह पर'

एजेंसी से बातचीत में साधना अपने परिवार पर जमकर बोलीं, अखिलेश पर भड़ास निकाली और अपने बेटे प्रतीक को राज्यसभा में भेजे जाने की मांग की.

Image caption अखिलेश यादव और प्रतीक यादव

साथ ही, शिवपाल का बचाव किया और रामगोपाल की आलोचना की. यह मानने के बाद भी कि उनके बोलने से अखिलेश को चुनावी नुकसान हो सकता है फिर भी बोला.

इस बातचीत में हालाँकि ऐसा कुछ भी नहीं था जो नया हो, या चौंकाने वाला हो. सिर्फ टाइमिंग और वजह समझ से परे थे.

अगर इंटरव्यू का उद्देश्य अखिलेश को सियासी नुकसान पहुँचाना था तो आखिरी फ़ेज़ में ही क्यों? अगर नहीं था तो वे दो दिन रुक क्यों नहीं सकती थीं?

दो हफ़्तों पहले ही इटावा में मतदान के दिन उनसे अखिलेश के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा था, "प्रतीक और अखिलेश दोनों मेरी दो आँखें हैं. कोई एक आँख को दूसरी से ज्यादा चाह सकता है क्या?"

मुलायम की पत्नी क्यों आईं मीडिया के सामने?

तो आख़िर, इतनी जल्दी साधना यादव को मोतियाबिंद कैसे हो गया? वह भी सिर्फ एक आंख में!

टाइमिंग और वजह

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption मुलायम, अखिलेश और शिवपाल यादव

सार्वजनिक जगहों तक पर मीडिया से दूर रहने वाली साधना को आख़िर क्या ज़रूरत पड़ी कि न्यूज एजेंसी के रिपोर्टर को अपने घर बुलाकर इंटरव्यू दिया. ऐसा मुलायम सिंह की सहमति के बिना संभव नहीं था.

या फिर ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पारिवारिक झगड़ा इस क़दर बढ़ गया है कि मुलायम की सहमति की ज़रूरत भी नहीं समझी जा रही.

शिवपाल पहले से अखिलेश से नाराज हैं. मुलायम सिंह भी दरकिनार कर दिए जाने से नाख़ुश हैं. कहीं ऐसा तो नहीं है कि प्रतीक को आगे बढाने के प्रयास में साधना अखिलेश विरोधी खेमे का मोहरा (चेहरा) बन गई हैं.

नहीं पता पिताजी क्या करेंगे: अखिलेश यादव

'गार्जियन' रहे शिवपाल से अखिलेश की क्यों ठनी

दरअसल, यह लगने लग गया है कि सपा सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाएगी. ऐसे में शिवपाल यादव को समझ आ गया है कि अलग पार्टी बनाने के बाद उसे मज़बूत बनाने में जो ताक़त, धन और समय चाहिए वह उनके पास नहीं है. इसलिए वे चाहते हैं कि जमी जमाई पार्टी पर ही क़ब्ज़ा करना चाहिए.

और यह तब तक संभव नहीं है जब तक अखिलेश मज़बूत है. इसीलिए अब उन्हें कमज़ोर करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. ताकि हार और पारिवारिक कलह का ठीकरा उनके सर पर फोड़ा जा सके.

इमेज कॉपीरइट APARNA BISHT YADAV FB PAGE
Image caption प्रतीक यादव, उनकी पत्नी अपर्णा बिष्ट यादव, अखिलेश और परिवार के दूसरे सदस्य

घर के भीतर महाभारत

भले ही इंटरव्यू में साधना परिवार को जोड़े रखने से लेकर अखिलेश को सांसद और बाद में मुख्यमंत्री बनवाने का श्रेय ख़ुद ले रही हों लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव से चार महीने पहले जो महाभारत शुरू हुई उसका असली वजह वे ही थीं.

अखिलेश समर्थक एमएलसी उदयवीर सिंह ने तो खुली चिट्ठी लिखकर आरोप लगाए थे कि साधना गुप्ता सार्वजनिक जीवन में सामने तो नहीं आती हैं लेकिन वो पर्दे के पीछे रहकर अपने सौतेले बेटे अखिलेश यादव के खिलाफ षड्यंत्र रचती हैं.

यादव परिवार के घमासान में दूसरी बहू का 'पेंच'

यह भी माना गया कि ऐन चुनाव के मौक़े पर प्रतीक के साढ़े चार करोड़ की लैंबोर्गिनी के प्रदर्शन से अखिलेश को राजनीतिक नुकसान हुआ है.

कौन हैं साधना यादव

इमेज कॉपीरइट DINESH SHAKYA

सभी जानना चाहते हैं कि साधना यादव कौन हैं और वे अखिलेश की सौतेली मां कैसे बनीं? साथ ही, वे अखिलेश को नुकसान क्यों पहुंचाना चाहती हैं?

2003 से पहले तक सभी उन्हें साधना गुप्ता के नाम से जानते थे. इसलिए कि उनकी पहली शादी चंद्र प्रकाश गुप्ता के साथ हुई थी. मुलायम सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति वाले मामले की जांच के दौरान सीबीआई की स्टेट्स रिपोर्ट में दर्ज है कि साधना गुप्ता और चंद्र प्रकाश गुप्ता की शादी 4 जुलाई 1986 को हुई थी.

अगले साल 7 जुलाई 1987 को प्रतीक यादव का जन्म हुआ था. उसके बाद साल 1990 में साधना गुप्ता और चंद्र प्रकाश गुप्ता के बीच औपचारिक तलाक हो गया. लेकिन मुलायम सिंह से शादी उनकी पहली पत्नी मालती देवी की मृत्यु के बाद 23 मई 2003 को हुई.

समाजवादी कुनबे की 'महाभारत' के अन्य पात्र

सीबीआई के रिकॉर्ड से पता चला है कि साधना ने 1994 में अपने घर का पता मुलायम सिंह का आधिकारिक निवास बताया था.

इमेज कॉपीरइट AKHILESH YADAV TWITTER HANDLE

यही नहीं, मुलायम के रक्षा मंत्री के कार्यकाल में (1996-98) उनके साथ हवाई सफर करने वाले पत्रकार पैसेंजर्स लिस्ट में एक अनजान नाम- साधना गुप्ता देख कर चौंक जाते थे.

दुनिया को साधना गुप्ता के बारे में आधिकारिक तौर पर 2007 में खबर लगी जब मुलायम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि साधना उनकी पत्नी हैं.

मुलायम सिंह यादव के जीवन में साधना कैसे आईं?

मुलायम को बहुत करीब से जानने वाले दैनिक भास्कर के पूर्व पत्रकार दिलीप शुक्ला कहते हैं, "साधना अपने भाई प्रमोद गुप्ता के साथ नौकरी के सिलसिले में मुलायम से मिली थीं. मुलायम ने मदद करने का वादा किया.

समाजवादी कुनबे की 'महाभारत' के अन्य पात्र

"कुछ दिन में मुलायम ने उन्हें लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने आवास में आउट हाउस रहने को दे दिया. वहां से वे कुछ ही दिनों में मुख्य भवन में शिफ़्ट हो गईं."

अखिलेश से साधना का रिश्ता

अखिलेश साधना को लेकर कभी सहज नहीं रहे.

1999 में वे डिंपल से विवाह करना चाहते थे. मुलायम सिंह इस रिश्ते के खिलाफ थे. वे किसी और को ज़ुबान दे चुके थे.

परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक पिता-पुत्र में तल्ख़ी इतनी बढ़ी कि एक दिन तकरार के दौरान साधना से उनके रिश्ते पर सवाल कर दिया.

इमेज कॉपीरइट AP

अमर सिंह ने बीच-बचाव कर मामला सुलझाया. बाद में मुलायम ने इनमें से कई बातें ख़ुद इस लेखक से साझा कीं. सुलह के बाद अखिलेश-डिंपल की शादी के लिए मुलायम राज़ी हो गए और साधना की ओर उंगली न उठाने के लिए अखिलेश.

राजनीति में दख़ल

मुलायम ने साधना को राजनीति से दूर रखा था.

इमेज कॉपीरइट कॉपीरइटTWITTER
Image caption अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल यादव

लेकिन अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद साधना को महसूस होने लगा कि मुलायम पद, अधिकार और पैसा सब अखिलेश और डिंपल को दे रहे हैं जबकि उनके बेटे प्रतीक को इस मुकाबले कुछ भी नहीं.

छोटे भाई शिवपाल ने खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को साधना का परिचय करा कर उनकी मदद की.

'पुत्र मोह छोड़ राजनीति से सन्यास लें मुलायम'

अखिलेश को यह पसंद नहीं था. लेकिन उन्होंने पिता-चाचा-माँ के सामने बोलने की हिम्मत नहीं की.

फिर आगे बात बढ़ती चली गई और पारिवारिक कलक खुल कर सामने आ गया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे