करण ही नहीं जानते कि बच्चों की मां कौन है

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इसी हफ़्ते फ़िल्मकार करण जौहर ने दो बच्चों के पिता बनने की घोषणा की. करण जौहर ने सरोगेसी (किराए की कोख) के ज़रिए सिंगल पैरेंट बनने की बात सोशल मीडिया पर बताई. करण की इस घोषणा के बाद से सबके मन में यह सवाल उठ रहा है कि आख़िर उन बच्चों की मां कौन है?

जिस महिला के अंडाणु से करण पिता बने क्या उन्हें उस महिला के बारे में पता है? या फिर क्या उस महिला को पता है कि वह करण जौहर के स्पर्म से जैविक मां बनी है?

नई दिल्ली में सीड्स ऑफ इनोसेंस हॉस्पिटल में आईवीएफ़ की निदेशक डॉ गौरी अग्रवाल का कहना है कि नहीं इनमें से किसी को भी नहीं पता होगा. उन्होंने कहा कि न तो करण जौहर को पता होगा कि किस महिला के अंडाणु से वह पिता बने और न ही उस महिला को पता होगा कि करण जौहर से स्पर्म से वह दो बच्चों की जैविक मां बनी हैं.

दो बच्चों के पिता बने बैचलर करण जौहर

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Image caption भारत को किराए की कोख के मामले में बड़े बाज़ार के रूप में देखा जाता है

डॉ अग्रवाल ने कहा, ''ये चीज़ें काफी गोपनीय होती हैं. आईवीएफ़ सेंटर में स्पर्म और अंडाणु मौजूद होते हैं. ऐसा नहीं होता है कि आप किसी महिला या पुरुष को लेकर आए और उनका अंडाणु या स्पर्म ले लिया गया. स्पर्म और अंडाणु को बहुत गोपनीय तरीके से लिया और दिया जाता है.''

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उन्होंने कहा, ''यह बात केवल एजेंसी को पता होती है कि उसके बैंक में किन-किन लोगों ने स्पर्म या अंडाणु बेचा है. एजेंसी वाले भी इन पुरुषों और महिलाओं के बैकग्राउंड की ही जानकारी रखते हैं न कि व्यक्तिगत पहचान.''

तो क्या करण जौहर ने जिस महिला का अंडाणु लिया उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मांगी होगी?

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Image caption क्या बच्चे को पूछने का हक़ नहीं है कि उसकी मां कौन है?

डॉ अग्रवाल ने कहा, ''वह महिला कौन है इसकी जानकारी नहीं मिलेगी. मुंबई में अंधेरी के जिस हॉस्पिटल में पूरी प्रक्रिया हुई वहां करण जौहर ने ज़रूर बताया होगा कि उन्हें कैसी महिला का अंडाणु चाहिए. महिला कितनी लंबी है, उसका रंग क्या है, उसका बैकग्राउंड क्या है और उसका प्रोफेशन क्या है. वह अपनी संतान की नाक-नक्श कैसी चाहते हैं, उसी आधार पर उन्हें अंडाणु के बारे में जानकारी दी गई होगी. करण को अंडाणु के बारे में जानकारी दी गई होगी न कि उस महिला के बारे में.''

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इस मामले में गोपनीयता अंडाणु बेचने वाले और ख़रीदने वाले दोनों के हक़ में होता है. डॉक्टर डोनर को लेकर कभी कोई जानकारी नहीं दे सकता. यहां तक कि किसके गर्भ में बच्चा पल रहा है इसकी जानकारी भी नहीं दी जाती है.

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डॉ गौरी ने कहा कि करण जौहर को ये पता होगा कि सरोगेट पॉजिटिव है पर किसके गर्भ में है यह पता नहीं होगा. उसी तरह उस महिला को भी पता नहीं होगा कि उसके गर्भ में किसके स्पर्म और अंडाणु का बेबी है. जिसके गर्भ में बच्चा है उसकी निगरानी हॉस्पिटल को रखना है न कि जिसका स्पर्म है वह रखता है.

बाद में यदि कोई दावा कर दे कि वह बच्चे की जैविक माता है या पिता है तो दोनों के लिए मुश्किल हो सकती है.

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करण जौहर के बच्चे जब होश संभालेंगे तो क्या उन्हें यह जानने का हक़ नहीं है कि उनकी मां कौन है? ये बच्चे स्तनपान से भी वंचित रहेंगे. इस पर डॉ अग्रवाल ने कहा कि ये सवाल अब प्रासंगिक नहीं है.

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Image caption डॉ गौरी अग्रवाल

उन्होंने कहा, ''हम काफी आगे निकल चुके हैं. किसके स्पर्म से और किसके अंडाणु से बच्चे का जन्म हो रहा है यह महत्वपूर्ण नहीं है. महत्वपूर्ण यह है कि उस बच्चे की परवरिश कैसी हो रही है. जो महिलाएं किराए पर कोख देती हैं वे वंचित तबके की होती हैं.''

डॉ गौरी ने कहा, ''उन्हें इसके लिए अच्छा पैसा मिल जाता है. यह उनके हक़ में है. जहां तक स्तनपान की बात है तो मां के दूध में जो चीजें होती हैं वही चीज़ें अब मार्केट में मिलने वाले कई मिल्क पाउडर में भी है. लोगों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं. हम यहां भावना से ज़्यादा ज़रूरत के बारे में सोच रहे हैं.''

किराए पर कोख देने वाली महिलाएं भले वंचित तबके की होती हैं लेकिन महिलाओं के अंडाणु की कीमत उसकी कद-काठी, रंग और बैकग्राउंड पर तय होती है. जो महिलाएं लंबी, गोरी, पढ़ी-लिखी और अच्छे बैकग्राउंड वाली होती हैं उनके अंडाणु की कीमत मुंहमांगी होती है. किराए पर कोख महिलाएं मजबूरी में देती हैं, लेकिन अंडाणु के साथ ऐसा नहीं है. डॉ गौरी ने कहा कि अंडाणु की कीमत न्यूनतम 50 हज़ार से असीमित है.

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अंडे कैसे लिए जाते हैं?

उन महिलाओं से अंडे लिए जाते हैं जो मां बन चुकी हैं ताकि उन्हें फिर से मां बनने में कोई दिक्क़त नहीं हो. अंडे को महिला के शरीर से इंजेक्शन के ज़रिए बाहर निकाला जाता है. इन अंडों से जिस पुरुष को बच्चा पैदा करना है उसके स्पर्म से मिलाया जाता है. वह आदमी चाहे गे ही क्यों न हो उसके स्पर्म में कोई कमी नहीं होती है.

स्पर्म और अंडे को मिलाकर बेबी (एम्बियोज) बनाया हैं. इसके साथ ही एक महिला को तैयार किया जाता है जो अपने गर्भ में इसे धारण करती है. एम्बियोज को उस महिला के गर्भ में डालने के लिए कोई सर्जरी नहीं करनी पड़ती है.

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बस एक लाइन बनाकर महिला के शरीर में डाल दिया जाता है. 15 दिनों के भीतर पता चल जाता है कि गर्भ ठहर गया है. सरोगेट और डोनर को लेकर गोपनीयता का कॉन्ट्रैक्ट होता है.

करण जौहर आख़िरी सिंगल पैरेंट?

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पिछले साल मोदी सरकार ने एक बिल पेश किया था, जिसमें अब कोई सिंगल पैरेंट नहीं बन सकता है. अब सरोगेसी के ज़रिए वही पैरेंट बने सकते हैं जिन्होंने भारतीय क़ानून के मुताबिक शादी की है. यह बिल अभी संसदीय समिति के पास है. इस बिल के ड्राफ्ट होने के बाद से ही सिंगल पैरेंट को लेकर आईवीएफ सेंटर सतर्क हो गए हैं. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि यदि किसी को सिंगल पैरेंट बनना है तो वह बच्चों गोद ले न कि इस सुविधा को शौक के रूप में इस्तेमाल किया जाए.

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