'हार के डर से ऐसा बोल रहे हैं अखिलेश'

  • 9 मार्च 2017
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत में संकेत दिए हैं कि चुनाव परिणामों मे यदि उन्हें या किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलता है तो राष्ट्रपति शासन की जगह वो मायावती से हाथ मिलाना पसद करेंगें.

उन्होंने कहा, "हां अगर सरकार के लिए ज़रूरत पड़ेगी तो राष्ट्रपति शासन कोई नहीं चाहेगा. हम नहीं चाहते कि यूपी को बीजेपी रिमोट कंट्रोल से चलाए."

BBC SPECIAL 'हाँ अगर ज़रूरत पड़ी तो ...': अखिलेश

इस पर बसपा के विधायक दल के नेता गया चरण दिनकर ने अखिलेश के बीबीसी को दिए बयान पर प्रतिक्रिया दी है,

उन्होंने कहा,"इसका मतलब है कि वो चुनाव हार गए हैं और डर से ऐसा बोल रहे हैं. अभी तो मतगणना होना बाकी है. उसके बाद ही पता चलेगा कि कौन आगे हैं. अभी से अंदाज़ा लगाना कि कौन हार गया और कौन जीत गया. सही नहीं है.परिणाम आने के बाद प्रदेश की जैसी परिस्थितियां होंगी उसे देखते हुए मायावती जी फ़ैसला लेंगी. ये उनका अधिकार है. "

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परिस्थितियों के मुताबिक़ फ़ैसला लेंगी मायावती

उनका यह भी कहना है कि बसपा को पूर्ण बहुमत से आ रही है. दूसरी परिस्थितियों के बारे में मीडिया वाले सोच रहे हैं. हम नहीं सोच रहे हैं.

सपा से गठबंधन पर फ़ैसले का अधिकार सिर्फ़ मायावती जी को है.

बीजेपी की प्रतिक्रिया

वहीं बीजेपी के नेता विजय बहादुर पाठक ने गठबंधन की बात पर बीबीसी से कहा है, "जिस तरह से सपा, बसपा और कांग्रेस उत्तर प्रदेश में एक है. केंद्र की यूपीए सरकार के समय तीनों एक साथ थे. अगर पीछे देखे तो पाएंगे कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के घपले और घोटालों को अखिलेश यादव ने संरक्षण दिया. इसलिए अगर अखिलेश यादव किसी भी विकल्प पर विचार करने की बात करते हैं तो जनता यह बात जानती है कि सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों एक-दूसरे मिले हुए हैं."

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